Special Coverage
आईटी सेक्टर में लौटी तेजी, 6.1% ग्रोथ के साथ 315 अरब डॉलर पहुंचेगा कारोबार, रोजगार और एआई से बदलेगा भविष्य
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, February 25, 2026
Last Updated On: Wednesday, February 25, 2026
भारतीय आईटी सेक्टर में एक बार फिर रफ्तार लौटती दिख रही है. जियो-पॉलिटिकल तनाव और तकनीकी बदलावों के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में उद्योग का कारोबार 6.1 प्रतिशत बढ़कर 315 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. नई भर्तियों, एआई स्किल्स पर फोकस और घरेलू बाजार से बढ़ती मांग ने सेक्टर को नई मजबूती दी है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, February 25, 2026
IT Sector: वैश्विक स्तर पर जारी जियो-पॉलिटिकल तनाव, मंदी की आशंकाएं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े तेज बदलावों के बावजूद भारतीय आईटी सेक्टर ने एक बार फिर मजबूती के संकेत दिए हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में देश की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री का कुल कारोबार 6.1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 315 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. यह अनुमान उद्योग संगठन नैसकॉम ने जारी किया है. यह संकेत साफ है कि चुनौतियों के बीच भी भारतीय आईटी सेक्टर वैश्विक भरोसा बनाए रखने में सफल रहा है.
रोजगार के मोर्चे पर भी बना रहा भरोसा
आईटी सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत रोजगार सृजन रही है और आने वाले साल में भी यह रुझान जारी रहने वाला है. चालू वित्त वर्ष में करीब 1.35 लाख नई भर्तियां होने का अनुमान है, जिससे कुल प्रत्यक्ष कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 59.5 लाख तक पहुंच जाएगी. इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में यह संख्या 58.15 लाख थी. हालांकि, रोजगार में यह शुद्ध वृद्धि कई वर्षों की तुलना में धीमी मानी जा रही है, फिर भी उद्योग का लगातार नौकरियां जोड़ते रहना अपने-आप में एक सकारात्मक संकेत है.
रेवेन्यू और रोजगार के बीच क्यों दिख रहा अंतर?
नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार ने स्वीकार किया कि 6.1 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि और करीब 2.3 प्रतिशत की रोजगार वृद्धि के बीच सीधा तालमेल नहीं दिखता. उन्होंने कहा कि ऑटोमेशन, एआई और नई तकनीकों के कारण कंपनियां पहले की तुलना में कम लोगों से ज्यादा काम कर पा रही हैं. इसके बावजूद उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि आईटी सेक्टर अब भी शुद्ध रोजगार सृजक बना हुआ है और आने वाले वर्षों में कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी जारी रहने की उम्मीद है.
एआई स्किल्स पर बड़ा फोकस, भविष्य की तैयारी
आईटी इंडस्ट्री अब केवल हायरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मचारियों को भविष्य के लिए तैयार करने पर भी जोर दे रही है. नैसकॉम के अनुसार, कुल 59.5 लाख कर्मचारियों में से 20 लाख से ज्यादा लोगों को एआई की बेसिक जानकारी दी जा चुकी है, जबकि करीब 3 लाख कर्मचारियों को एडवांस एआई स्किल्स में ट्रेनिंग दी गई है. संगठन का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में एआई से जुड़ा कुल रेवेन्यू 10 से 12 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, हालांकि सभी कंपनियां अपने एआई रेवेन्यू का खुलासा नहीं करतीं.
टेक्नोलॉजी पर खर्च बढ़ा, लेकिन दिशा बदली
आईटी सेक्टर में टेक्नोलॉजी पर खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अब यह खर्च पारंपरिक आईटी सेवाओं के बजाय नए और उभरते क्षेत्रों में हो रहा है. वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कुल रेवेन्यू अनुमान को बढ़ाकर 297 अरब डॉलर कर दिया गया है, जो पहले 282.6 अरब डॉलर आंका गया था. मुख्य आईटी सेवाओं का रेवेन्यू 143 अरब डॉलर से बढ़कर 149 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट का रेवेन्यू 55 अरब डॉलर से बढ़कर 59 अरब डॉलर हो सकता है.
सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और आरएंडडी में भी उछाल
सॉफ्टवेयर उत्पादों का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2025-26 में 23 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल 21 अरब डॉलर था. वहीं इंजीनियरिंग, रिसर्च और डेवलपमेंट से जुड़ा कारोबार 59 अरब डॉलर से बढ़कर 63 अरब डॉलर होने का अनुमान है. हार्डवेयर कंपनियों के रेवेन्यू में भी इजाफा देखने को मिल सकता है और यह 21 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. ये आंकड़े बताते हैं कि आईटी सेक्टर अब मल्टी-डायमेंशनल ग्रोथ की ओर बढ़ रहा है.
भारत और नए बाजार बने ग्रोथ इंजन
पहले जहां अमेरिका और नॉर्थ अमेरिका भारतीय आईटी इंडस्ट्री की ग्रोथ का बड़ा स्रोत थे, अब एशिया-प्रशांत और पश्चिम एशिया के देशों में तेज बढ़त देखी जा रही है. खास बात यह है कि घरेलू बाजार से होने वाला रेवेन्यू वित्त वर्ष 2025-26 में 7.9 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो वैश्विक औसत से कहीं ज्यादा है. स्वास्थ्य सेवा, यात्रा और परिवहन जैसे सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, खासकर भारत में बन रहे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के चलते.
यह भी पढ़ें :- AI Impact Summit 2026: पीएम मोदी ने पेश किया MANAV विजन, जिम्मेदार और मानव केंद्रित AI की नई राह














