विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट, गोल्ड रिजर्व भी घटा, जानिए क्या है इसकी वजह और अर्थव्यवस्था पर असर

Authored By: Nishant Singh

Published On: Saturday, July 4, 2026

Last Updated On: Saturday, July 4, 2026

विदेशी मुद्रा भंडार और गोल्ड रिजर्व में गिरावट को दर्शाता प्रतीकात्मक चित्र, भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजार पर प्रभाव।
विदेशी मुद्रा भंडार और गोल्ड रिजर्व में गिरावट को दर्शाता प्रतीकात्मक चित्र, भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजार पर प्रभाव।

भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश का विदेशी मुद्रा भंडार 5.654 अरब डॉलर घटकर 666.933 अरब डॉलर रह गया है. गोल्ड रिजर्व में भी बड़ी कमी दर्ज हुई है. विशेषज्ञ इसे वैश्विक तनाव, रुपये पर दबाव और आरबीआई के बाजार हस्तक्षेप का परिणाम मान रहे हैं. 

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Saturday, July 4, 2026

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश के विदेशी मुद्रा भंडार में एक सप्ताह के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. 26 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 5.654 अरब डॉलर घटकर 666.933 अरब डॉलर रह गया. इससे एक सप्ताह पहले इसमें बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, लेकिन अब फिर कमी देखने को मिली है. विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का अहम पैमाना माना जाता है, क्योंकि इसका उपयोग आयात भुगतान, विदेशी कर्ज चुकाने और रुपये को स्थिर बनाए रखने में किया जाता है.

मुख्य आंकड़े

  • विदेशी मुद्रा भंडार: 666.933 अरब डॉलर
  • एक सप्ताह में गिरावट: 5.654 अरब डॉलर
  • पिछले सप्ताह का स्तर: 672.587 अरब डॉलर

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में भी आई कमी

विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) होता है. आरबीआई के अनुसार इसमें भी गिरावट दर्ज की गई है. यह 150 मिलियन डॉलर घटकर 541.067 अरब डॉलर रह गया. डॉलर के मुकाबले यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी विदेशी मुद्राओं की कीमतों में बदलाव का असर भी इन परिसंपत्तियों पर पड़ा, जिससे कुल विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित हुआ.

फॉरेन करेंसी एसेट्स से जुड़ी बातें

  • FCA में 150 मिलियन डॉलर की कमी.
  • कुल FCA: 541.067 अरब डॉलर.
  • वैश्विक मुद्रा विनिमय दरों में बदलाव का सीधा असर पड़ा.

गोल्ड रिजर्व में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज

इस बार सबसे अधिक गिरावट गोल्ड रिजर्व में देखने को मिली. एक सप्ताह के भीतर भारत का सोने का भंडार 5.394 अरब डॉलर घटकर 102.536 अरब डॉलर रह गया. इसके अलावा, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) और IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन में भी कमी दर्ज की गई है. इससे साफ है कि विदेशी मुद्रा भंडार के लगभग सभी प्रमुख हिस्सों में दबाव बना हुआ है.

गोल्ड रिजर्व और अन्य आंकड़े

  • गोल्ड रिजर्व: 102.536 अरब डॉलर
  • गिरावट: 5.394 अरब डॉलर
  • SDRs: 18.558 अरब डॉलर
  • IMF रिजर्व पोजिशन: 4.7772 अरब डॉलर

रिकॉर्ड स्तर से क्यों फिसला विदेशी मुद्रा भंडार?

गौर करने वाली बात यह है कि फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. लेकिन इसके बाद पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और वैश्विक अनिश्चितता का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा. रुपये पर दबाव बढ़ने के कारण आरबीआई को मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा. रुपये को अधिक कमजोर होने से बचाने के लिए केंद्रीय बैंक ने डॉलर की बिक्री सहित कई कदम उठाए, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आना स्वाभाविक माना जा रहा है.

गोल्ड रिजर्व में कमी की वजह क्या है?

सरकार ने विदेशी खर्च और आयात पर नियंत्रण रखने के उद्देश्य से कई कदम उठाए. इसी क्रम में लोगों से अनावश्यक विदेशी यात्राएं कम करने, ईंधन की बचत करने और सोने की खरीद सीमित रखने की अपील भी की गई. साथ ही सोने के आयात शुल्क में बढ़ोतरी किए जाने के बाद गोल्ड इंपोर्ट में कमी दर्ज हुई. इसका असर देश के गोल्ड रिजर्व पर भी देखने को मिला. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति अस्थायी हो सकती है और आने वाले महीनों में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार इसमें सुधार भी संभव है.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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