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Independence Day 2024 : आजादी का सही मतलब तभी समझ में आएगा जब अवगुणों से हम कर लेंगे खुद को आजाद
Authored By: स्मिता
Published On: Wednesday, August 14, 2024
Last Updated On: Wednesday, August 14, 2024
भारत 78 वां स्वतंत्रता दिवस (Independence Day 2024) मना रहा है। हमारे अंदर कई सारे गुण-अवगुण मौजूद रहते हैं। हमें आजादी का सही मतलब तभी समझ में आएगा जब अपने अवगुणों से हमें छुटकारा मिल जायेगा।
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Wednesday, August 14, 2024
कोई भी व्यक्ति गुण और अवगुण से अछूता नहीं होता है। जिस तरह से हर व्यक्ति की अपनी खासियत या गुण होता है, ठीक उसी तरह हर व्यक्ति में कुछ न कुछ अवगुण भी जरूर होता है। उस अवगुण पर हमेशा सोच-विचार करते रहना सही नहीं है। सोच-विचार कर उस अवगुण से आजादी पाने की कोशिश करना सही है। यह सच है कि हम अपने अवगुण से एक दिन में मुक्त नहीं हो सकते हैं, उसके लिए निरंतर प्रयास करना जरूरी है। महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन (The great scientist Albert Einstein) ने कहा है, “गलती करना उतना गलत नहीं है, जितना जानबूझकर अपनी गलती को बार-बार दोहराना अपराध है। बार-बार करना गलती करने के बावजूद अलग-अलग नतीजों की उम्मीद करना बेमानी है।”
कैसे पहचानें अपने अवगुण
भगवदगीता में श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं, सत्व, रज, और तम तीन गुणों से प्राकृतिक शक्ति बनी है। सत्व गुण सद्गुण और शुद्धता को चित्रित करता है, वहीं रजो गुण अंतहीन इच्छा-कामना और अत्यधिक महत्वाकांक्षा को बढ़ाता है। तमो गुण भ्रम, आलस्य, नशा और निद्रा को भी बढ़ा सकता है। जब रज और तम गुण पर अपना नियंत्रण और संतुलन बना लेते हैं, तो अवगुण से हम दूर हो जाते हैं। आपकी कोई ऐसी आदत जो दूसरों के साथ-साथ स्वयं पर भी बुरा प्रभाव डाले अवगुण है। ऐसा कार्य या विचार जो आपका नकारात्मक चरित्र या लक्षण प्रकट करे, अवगुण है। कभी-कभी किसी कार्य की अति भी अवगुण बन जाता है। भारतीय संस्कृति शास्त्रों के अनुसार, लोभ, मोह, काम, क्रोध और ईर्ष्या भी हमें अवगुण की ओर ले जाते हैं।
अवगुण से पीछा छूटना आसान नहीं
लेखक, स्वतंत्रता सेनानी और आध्यात्मिक गुरु आचार्य विनोबा भावे (Acharya Vinoba Bhave) ने कहा-“हमारे अंदर की कोई भी बुरी आदत हमसे लगातार बुरा काम करवाना चाहती है। इसके कारण हम अधिक सार्थक या प्रोडक्टिव काम नहीं कर पाते हैं। हमारा ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता है। हम लगातार ऐसा करते जाते हैं, क्योंकि इससे हमें अच्छा महसूस होता है। पर यह ख़ुशी कुछ समय के लिए होती है। कुछ देर बाद तात्कालिक खुशी चली जाती है और हमारे अंदर खालीपन रह जाता है। हम बुराइयों और अवगुणों से लगातार खालीपन भरने की कोशिश करते रहते हैं। यह चक्र चलता रहता है। अधिक लंबे समय तक यह प्रक्रिया हमें मानसिक और शारीरिक रूप से खोखला करता जाता है।” हमें अपने अवगुणों को पहचानकर उसे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए। अवगुण विकर्षण के माध्यम हैं, जो हमें अधिक केंद्रित, खुशहाल, प्रामाणिक और सार्थक जीवन से दूर कर देते हैं।
लगातार प्रयास से दूर होंगे अवगुण
कई तरीके हैं जो अवगुण दूर करने में मदद कर सकते हैं।
1. नकारात्मक आदतों (Negative habits) के बारे में जागरूकता
अगर आपको ज़रूरत पड़ रही है, तो उन्हें लिख लें। यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि आपके लिए कोई चीज़ बुरी है या नहीं। इसके बारे में सोचकर नकारात्मक आदतों के बारे में जागरूकता लाई जा सकती है। अगर आप लगातार निराश महसूस कर रहे हैं कि आपके जीवन में चीज़ें वैसी नहीं चल रही हैं जैसी आप चाहते हैं, तो यह एक अच्छा संकेत है। आपको कुछ बदलने की ज़रूरत है। पहला कदम जागरूकता है।
2. सही समय का चुनाव
ध्यान दें कि आपको कब अपनी बुरी आदत पर काम करने की ज़रूरत महसूस होती है। इस समय आप कैसा महसूस कर रहे हैं। क्या आप ऊब गए हैं, अकेले हैं? या उदास हैं? सही समय का चुनाव कर अपनी खराब आदतों को दूर करें।
3. समस्या का सामना करें
कोई ख़ास अवगुण की पहचान करें। एक पल के लिए रुकें। लेकिन इस स्थान का उपयोग शॉपिंग मॉल या शराब पीने में नहीं करें। इसके बजाय कुछ समय बैठें और कुछ न कुछ करें। भावनाओं को महसूस करें। आपके साथ कुछ भी बुरा नहीं होगा।
4. खुद को जानें
जब हम खुद के साथ अकेले रहने में सहज महसूस करते हैं, तो हम अपने बारे में और अधिक जान पाते हैं। खुद को जानना हमें प्रामाणिकता और सच्ची खुशी के करीब ले जाता है। इसके लिए साहस की ज़रूरत होती है,। यदि हम अपनी मनचाही ज़िंदगी जीना चाहते हैं, तो यह ज़रूरी है। जब हम ऐसा कर पाएंगे , तो हमें उन सभी पुरानी बुराइयों की ज़रूरत नहीं होगी जिनकी हम आदत डाल चुके हैं। इसके अलावा, अगर आपकी समस्या में दूसरे लोग शामिल हैं, तो खुलकर और ईमानदारी से बात करने से न डरें, क्योंकि नतीजे आपको चौंका सकते हैं।













