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गलवान के बाद नई शुरुआत? छह साल बाद भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग, BRICS सम्मेलन पर टिकी दुनिया की नजर
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, July 31, 2026
Last Updated On: Friday, July 31, 2026
Xi Jinping India Visit: गलवान संघर्ष के बाद पहली बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. संभावित यात्रा से पहले भारत-चीन के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं और सीमा विवाद समेत कई अहम मुद्दों पर बातचीत की उम्मीद बढ़ गई है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, July 31, 2026
Xi Jinping India Visit: भारत और चीन के संबंध पिछले कुछ वर्षों में कई उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं. वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में गहरी तल्खी आ गई थी. अब करीब छह साल बाद एक ऐसा मौका सामने आ रहा है, जो दोनों देशों के बीच संवाद की नई शुरुआत बन सकता है. खबर है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आ सकते हैं. यदि यह दौरा तय होता है, तो गलवान संघर्ष के बाद उनकी यह पहली भारत यात्रा होगी और इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा.
BRICS सम्मेलन से पहले बढ़ी कूटनीतिक हलचल
सूत्रों के अनुसार, 12 और 13 सितंबर को प्रस्तावित BRICS सम्मेलन में शामिल होने के लिए शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना है. इसे लेकर नई दिल्ली और बीजिंग के बीच कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय वार्ताओं का दौर शुरू होगा. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के भी चीन जाकर अहम बैठकें करने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, इन बैठकों की तारीखों पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है.
सीमा विवाद पर बातचीत को मिल सकती है रफ्तार
भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा विवाद सबसे बड़ा मुद्दा रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) की बैठक होने की उम्मीद है. इस बैठक का उद्देश्य सीमा से जुड़े मामलों पर संवाद को आगे बढ़ाना और तनाव कम करने के उपाय तलाशना होगा. इसके बाद दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच भी बातचीत प्रस्तावित है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन बैठकों में सकारात्मक प्रगति होती है, तो द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की संभावना मजबूत हो सकती है.
इस संभावित दौरे की प्रमुख बातें
- गलवान संघर्ष के बाद शी जिनपिंग की पहली संभावित भारत यात्रा.
- नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना.
- भारत और चीन के बीच उच्च-स्तरीय कूटनीतिक वार्ताओं की तैयारी.
- सीमा विवाद पर WMCC और विशेष प्रतिनिधियों की बैठक की उम्मीद.
द्विपक्षीय बैठक पर रहेंगी सबकी निगाहें
यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो सबसे अधिक चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके बीच संभावित द्विपक्षीय बैठक को लेकर होगी. ऐसी मुलाकात में सीमा विवाद, व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है. गलवान के बाद दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है.
वैश्विक चुनौतियों के बीच बढ़ा BRICS का महत्व
इस बार BRICS सम्मेलन केवल सदस्य देशों की नियमित बैठक भर नहीं माना जा रहा, बल्कि बदलते वैश्विक हालात के कारण इसकी अहमियत और बढ़ गई है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बढ़ते शुल्क, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव जैसे मुद्दों के बीच भारत और चीन सहित BRICS देशों की भूमिका पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी. ऐसे समय में यदि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सकारात्मक संवाद होता है, तो इसका असर केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर भी पड़ सकता है.क्या रिश्तों में आएगी नई गर्माहट?
भारत और चीन के बीच मतभेद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, लेकिन लगातार संवाद की कोशिशें यह संकेत देती हैं कि दोनों देश तनाव कम करने के रास्ते तलाश रहे हैं. यदि शी जिनपिंग का भारत दौरा तय होता है और शीर्ष नेतृत्व के बीच सार्थक बातचीत होती है, तो यह भविष्य के संबंधों के लिए एक नई दिशा तय कर सकता है. हालांकि, वास्तविक बदलाव इस बात पर निर्भर करेगा कि बातचीत के दौरान दोनों पक्ष कितनी ठोस सहमति बना पाते हैं.
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