BRICS Summit 2026 में AI सुरक्षा पर मंथन, भारत साझा मानकों, जैव-सुरक्षा और जिम्मेदार तकनीकी विकास की दिशा दिखाएगा
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, September 12, 2026
Updated On: Saturday, September 12, 2026
BRICS Summit 2026 में AI की बढ़ती क्षमताओं के साथ सुरक्षा और जिम्मेदार इस्तेमाल पर चर्चा अहम होगी. भारत AI, एडवांस कंप्यूटिंग, क्वांटम तकनीक और सेमीकंडक्टर सहयोग पर जोर दे रहा है. साझा सुरक्षा मानक, जैव-सुरक्षा, स्वतंत्र परीक्षण और गंभीर AI घटनाओं की जानकारी साझा करना भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Saturday, September 12, 2026
BRICS Summit 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल चैटबॉट या फोटो-वीडियो बनाने की तकनीक नहीं रह गई है. स्वास्थ्य, बैंकिंग, वैज्ञानिक शोध, रोजगार, साइबर सुरक्षा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इसी के साथ AI के गलत इस्तेमाल और उससे जुड़े सुरक्षा जोखिम भी गंभीर होते जा रहे हैं. ऐसे में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit 2026 में AI के जिम्मेदार इस्तेमाल और वैश्विक गवर्नेंस पर चर्चा अहम हो सकती है.
AI के लिए अंतरराष्ट्रीय निगरानी की जरूरत
AI की तेजी से बढ़ती क्षमताओं ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या इसके लिए देशों के बीच किसी साझा निगरानी व्यवस्था की जरूरत है. भारत में हुए AI Impact Summit में भी इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय समन्वय की बात सामने आई थी. AI के क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं जैसी सहयोग प्रणाली का विचार इसी चिंता को दर्शाता है. इसका उद्देश्य शक्तिशाली AI सिस्टम से जुड़े जोखिमों की पहचान और उनसे निपटने में देशों के बीच बेहतर तालमेल बनाना हो सकता है.
AI और जैव-सुरक्षा का नया खतरा
AI के जोखिम अब डीपफेक और गलत सूचना तक सीमित नहीं हैं. AI और जैव-प्रौद्योगिकी के मेल ने जैव-सुरक्षा को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है. अगस्त में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में AI की मदद से बैक्टीरियोफेज डिजाइन किए गए, जिनमें कुछ प्रयोगशाला परीक्षणों में काम करने में सक्षम पाए गए. हालांकि ये मानव वायरस नहीं थे, लेकिन इस प्रयोग ने भविष्य में AI के जरिए खतरनाक जैविक एजेंट तैयार किए जाने की आशंका को लेकर बहस तेज कर दी है.
BRICS में साझा सुरक्षा मानकों की संभावना
BRICS के सभी देशों के लिए एक समान AI कानून बनाना फिलहाल चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उनकी तकनीकी क्षमताएं, नीतियां और कानूनी ढांचे अलग हैं. हालांकि, न्यूनतम साझा सुरक्षा मानकों पर सहमति बनाई जा सकती है. इनमें AI मॉडल की सुरक्षा जांच, गंभीर घटनाओं की जानकारी साझा करना, डीपफेक की पहचान और AI-जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े जोखिमों पर सहयोग शामिल हो सकता है.
भारत से लेकर चीन तक अलग-अलग प्राथमिकताएं
भारत AI में नवाचार को बढ़ावा देने के साथ जोखिम आधारित नियमन पर जोर देता है. स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि में AI के लाभ बढ़ाने के साथ डेटा सुरक्षा और जवाबदेही भी महत्वपूर्ण हैं. वहीं रूस AI को रणनीतिक और तकनीकी क्षमता से जोड़ता है. ब्राजील सामाजिक प्रभाव और नियमन, जबकि दक्षिण अफ्रीका विकासशील देशों की AI तक पहुंच और डिजिटल असमानता कम करने पर ध्यान देता है.
चीन भी वैश्विक AI नियमों में व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी की वकालत कर रहा है. ऐसे में BRICS में तत्काल साझा कानून भले मुश्किल हो, लेकिन सुरक्षा परीक्षण, जैव-सुरक्षा सहयोग और जोखिमों की जानकारी साझा करने जैसे कदम आगे बढ़ सकते हैं.
ग्लोबल साउथ के लिए बन सकता है मंच
BRICS की चर्चा केवल तकनीकी सुरक्षा तक सीमित नहीं रह सकती. AI के विकास और उसके नियम तय करने में विकासशील देशों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण मुद्दा है. यदि सदस्य देश जिम्मेदार AI, सुरक्षा और तकनीक तक समान पहुंच को लेकर साझा पहल आगे बढ़ाते हैं, तो BRICS ग्लोबल साउथ के लिए AI गवर्नेंस का एक प्रभावशाली मंच बन सकता है.
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