3 दिन तक बंद रहेंगी बैंक शाखाएं! कहीं आपका जरूरी काम तो नहीं अटकेगा? जानिए किन बैंकों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Thursday, September 24, 2026
Updated On: Thursday, September 24, 2026
Bank Holiday के चलते लगातार 3 दिन कई बैंक शाखाएं बंद रहेंगी. जानिए किन बैंकों पर इसका असर पड़ेगा और ग्राहकों को किन बैंकिंग सेवाओं के लिए पहले से तैयारी करनी चाहिए. पढ़ें पूरी खबर
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Updated On: Thursday, September 24, 2026
Bank Holiday: अगर आपको भी Bank की तरफ से हड़ताल को लेकर कोई संदेश मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि समय रहते जरूरी काम निपटा लेना समझदारी होगी. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी यूएफबीयू (UFBU) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिन की हड़ताल बुलाई है. चूंकि इससे पहले 26 सितंबर को चौथा शनिवार और 27 सितंबर को रविवार पहले से ही बैंक अवकाश है (Bank Holiday in September), इसलिए ग्राहकों को लगातार पांच दिनों तक शाखा स्तर की सेवाओं में रुकावट का सामना करना पड़ सकता है. आइए विस्तार से समझते हैं कि इस हड़ताल का असर किन बैंकों पर पड़ेगा और आखिर कर्मचारी हड़ताल पर क्यों जा रहे हैं.
किन बैंकों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
यूएफबीयू (UFBU) के अंतर्गत सात बड़े कर्मचारी और अधिकारी संगठन आते हैं, जो देश के करीब नब्बे प्रतिशत बैंकिंग कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसमें सरकारी बैंकों के साथ साथ निजी, विदेशी, ग्रामीण और सहकारी बैंकों के कर्मचारी भी शामिल हैं. हालांकि असली असर मुख्य रूप से सरकारी क्षेत्र के बैंकों पर पड़ेगा, जिनमें भारतीय स्टेट बैंक(SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB), केनरा बैंक(Canara Bank) और यूनियन बैंक(Union Bank) जैसे बड़े नाम शामिल हैं. निजी क्षेत्र के अधिकांश बैंक सामान्य रूप से खुले रह सकते हैं, हालांकि कुछ पुरानी पीढ़ी के निजी बैंकों की चुनिंदा शाखाओं में स्थानीय कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने पर आंशिक असर देखने को मिल सकता है.
आखिर बैंक कर्मचारी हड़ताल पर क्यों जा रहे हैं
इस हड़ताल के पीछे सबसे बड़ी मांग पांच दिन के कार्य सप्ताह को लागू करने की है. मौजूदा व्यवस्था में बैंकों में रविवार के अलावा महीने का दूसरा और चौथा शनिवार ही अवकाश होता है, जबकि कर्मचारी चाहते हैं कि सभी शनिवार को छुट्टी घोषित (Bank Branches Closed) की जाए, जिसके बदले वे सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना चालीस मिनट अतिरिक्त काम करने को तैयार हैं. यह प्रस्ताव मार्च दो हजार चौबीस में हुए एक समझौते के तहत पहले ही स्वीकार किया जा चुका था, लेकिन ढाई साल बाद भी इसे लागू नहीं किया गया है. इसके अलावा कर्मचारी संगठन प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना को वापस लेने की भी मांग कर रहे हैं, जिसे वे भेदभावपूर्ण मानते हैं. इसके साथ ही पेंशन से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने की मांग भी इस हड़ताल का अहम हिस्सा है.
डिजिटल सेवाएं रहेंगी पूरी तरह चालू
ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि हड़ताल का असर केवल शाखा स्तर की सेवाओं तक ही सीमित रहेगा(Banking Services). एटीएम से पैसे निकालना, यूपीआई से भुगतान करना, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और योनो जैसी डिजिटल सुविधाएं पूरी तरह सामान्य रूप से काम करती रहेंगी. वहीं शाखा में जाकर होने वाले काम जैसे नकद जमा करना, चेक क्लियर कराना, दस्तावेज जमा करना या केवाईसी से जुड़ा काम इन तीन दिनों में प्रभावित हो सकता है.
पहले भी हो चुकी है एक हड़ताल
गौरतलब है कि यह यूएफबीयू की इस महीने की दूसरी हड़ताल है. इससे पहले ग्यारह सितंबर को भी एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल हो चुकी है, जिसका असर शुक्रवार होने की वजह से अगले दो दिन की साप्ताहिक छुट्टियों तक बना रहा था. अब यह दूसरी हड़ताल ऐसे समय पर बुलाई गई है जब बैंकों में छमाही खाता बंदी का काम भी चल रहा होता है, इसलिए इसका असर पहली हड़ताल के मुकाबले कहीं ज्यादा गंभीर माना जा रहा है.
आगे क्या हो सकता है
अगर सरकार और बैंक प्रबंधन की तरफ से इन मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं आता है, तो यूएफबीयू ने छब्बीस अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दे रखी है. यानी आने वाले समय में बैंकिंग सेवाओं में रुकावट की यह समस्या और लंबी खिंच सकती है, जब तक कि कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता.
निष्कर्ष
कुल मिलाकर अगर आपका कोई जरूरी बैंकिंग काम है, तो उसे 28 से 30 सितंबर से पहले ही निपटा लेना बेहतर रहेगा. नकद निकासी के लिए एटीएम और छोटे मोटे लेनदेन के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करना इस दौरान सबसे सुरक्षित विकल्प होगा.
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