Javed Akhtar ने अपने ही समाज पर उठाए सवाल, बोले- कमियों पर बात करने से क्यों बचते हैं लोग?
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Tuesday, October 6, 2026
Updated On: Tuesday, October 6, 2026
जावेद अख्तर के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है. उन्होंने मुस्लिम समाज की अंदरूनी कमियों और कुरीतियों पर खुलकर सवाल उठाए. साथ ही आरफा खानम शेरवानी, मोहम्मद जुबैर और असदुद्दीन ओवैसी जैसे प्रमुख चेहरों के रवैये पर भी सवाल खड़े किए.
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Updated On: Tuesday, October 6, 2026
Javed Akhtar Statement: अपने बेबाक और खरी-खरी बयानों के लिए जाने जाने वाले मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने एक बार फिर बड़ा बयान(Javed Akhtar Controversy) दिया है. हमेशा बिना लाग-लपेट के सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखने वाले अख्तर साहब के निशाने पर इस बार उनका अपना ही समाज आया है. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग अपने धर्म और समाज की बुराइयों के खिलाफ बोलने से बचते हैं. उन्होंने प्रमुख चेहरों का नाम लेते हुए दोहरे रवैये पर सवाल खड़े किए हैं. आइए विस्तार से समझते हैं क्या है यह पूरा मामला.
क्या है पूरा मामला
कालजयी गीतों के रचयिता और प्रख्यात लेखक जावेद अख्तर (Javed Akhtar) हमेशा अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं. ईश्वर और खुदा के अस्तित्व को न मानने वाले जावेद अख्तर खुद को गर्व से नास्तिक बताते हैं. अब एक बार फिर उनके निशाने पर उन्हीं के समाज के लोग आए हैं. हिंदू और मुस्लिम समाज के भीतर गलत परंपराओं और कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने की तुलना करते हुए उन्होंने साफ कहा कि हिंदू समाज में ऐसे कई लोग हैं जो अपनी ही परंपराओं और सामाजिक बुराइयों की खुलकर आलोचना करते हैं, लेकिन इसके उलट मुस्लिम समाज में अपनी कम्युनिटी की समस्याओं और कमजोरियों पर खुलकर बोलने वाले लोगों की संख्या बेहद कम है.
प्रमुख चेहरों के दोहरे रवैये पर उठाए सवाल
जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने इस संदर्भ में पत्रकार आरफा खानम शेरवानी, फैक्ट-चेकर मोहम्मद जुबैर और सांसद असदुद्दीन ओवैसी जैसे प्रमुख नामों का भी सीधा जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब भी हिंदू समाज से जुड़ी किसी सामाजिक बुराई या कुरीति की बात होती है, तो कई लोग उस पर पूरी मुखरता से अपनी आवाज उठाते हैं. लेकिन जब चर्चा मुस्लिम समाज ( Muslim Community) की अंदरूनी समस्याओं, कुरीतियों और कमजोरियों की होती है, तो अक्सर एक अजीब चुप्पी देखने को मिलती है.
कमजोरियों और कमियों पर भी होनी चाहिए बात
अख्तर साहब ने जोर देकर कहा कि किसी भी समुदाय के विकास और सुधार के लिए उसकी कमियों पर सवाल उठाना बेहद जरूरी है. केवल यह मान लेना कि अपने समाज में सब कुछ ठीक है, एक सही और प्रगतिशील रवैया नहीं हो सकता.
नास्तिक होने के बावजूद समाज को आईना दिखाना फर्ज
उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि भले ही वे एक नास्तिक हैं और किसी धर्म(Javed Akhtar Muslim Community Statement) को नहीं मानते, लेकिन उनका जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ है. इस नाते अपनी कम्युनिटी की कमियों और कमजोरियों को सामने रखना उनका नैतिक फर्ज बनता है. किसी भी समाज की केवल अच्छाइयों का गुणगान करने के बजाय उसकी कमजोरियों पर भी खुलकर संवाद और बहस होनी चाहिए.
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