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साबरमती जेल में बंद है लॉरेंस, मगर सुरक्षा का अभेद्य घेरा है जेल
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Wednesday, October 21, 2026
Last Updated On: Wednesday, October 21, 2026
गुजरात की साबरमती जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क जांच एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है. मुंबई में राजनीतिक हस्तियों की हत्या से लेकर फिल्मी सितारों को धमकी देने और फायरिंग की घटनाओं तक, कई मामलों में बिश्नोई गिरोह का नाम चर्चा में आया है. इससे संगठित अपराध पर लगाम लगाने और उसके नेटवर्क को तोड़ने की कोशिशों पर सवाल उठ रहे हैं. कब-कब बिश्नोई गैंग ने किसे धमकाया और रंगदारी मांगी, ये भी जानते हैं…
Authored By: Galgotias Times Bureau
Last Updated On: Wednesday, October 21, 2026
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली पुलिस के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि वह कई मामलों की जांच के लिए लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi) से सीधे पूछताछ करना चाहती है, लेकिन उसे अपनी हिरासत में लेना आसान नहीं है. जेल में बंद होने के बावजूद उसके गिरोह से जुड़े लोगों के नाम अलग-अलग आपराधिक मामलों में सामने आने से जांच की चुनौती और बढ़ गई है.
इस मामले में केंद्र सरकार के सुरक्षा संबंधी प्रतिबंधों की भी अहम भूमिका बताई जाती है. सुरक्षा कारणों से बिश्नोई को साबरमती जेल से दूसरी जगह स्थानांतरित करने पर लगी रोक के कारण मुंबई पुलिस के लिए उसकी प्रत्यक्ष कस्टडी हासिल करना मुश्किल हो गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब अलग-अलग राज्यों की पुलिस को गंभीर मामलों की जांच करनी हो, तो जेल में बंद आरोपी से पूछताछ की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी?
कानून-व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
यह स्थिति कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक जटिल सवाल खड़ा करती है. एक ओर पुलिस आपराधिक मामलों की कड़ियां जोड़ने और आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश करती है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा संबंधी नियम उसकी जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि कानूनी दायरे में रहते हुए जांच एजेंसियां इस तरह के नेटवर्क की तह तक कैसे पहुंचेंगी.
बिश्नोई गिरोह के नाम से जुड़ीं मुंबई की चर्चित घटनाएं
1. सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग (अप्रैल 2024)
14 अप्रैल 2024 को मुंबई के बांद्रा स्थित अभिनेता सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने कई राउंड गोलियां चलाई थीं. घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई थी. मामले की जांच के दौरान बिश्नोई गिरोह से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की गई.
2. बाबा सिद्दीकी की हत्या (12 अक्टूबर 2024)
12 अक्टूबर 2024 को महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की बांद्रा ईस्ट इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. घटना उनके बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर हुई. गंभीर रूप से घायल बाबा सिद्दीकी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई. इस हत्याकांड की जांच में बिश्नोई गिरोह से जुड़े होने के आरोपों की भी पड़ताल हुई.
3. रोहित शेट्टी के आवास पर गोलीबारी (फरवरी 2026)
फरवरी 2026 में फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित आवास के बाहर गोलीबारी की घटना का जिक्र सामने आया. इस मामले में घटना की परिस्थितियों, हमलावरों और संभावित साजिश की जांच महत्वपूर्ण है.
4. टाइगर श्रॉफ से जुड़ी फायरिंग की खबर (अक्टूबर 2026)
18 अक्टूबर 2026 को जुहू में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर बाइक सवार हमलावरों द्वारा फायरिंग की गई. हालांकि टाइगर श्रॉफ को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, जबकि उनके ड्राइवर समेत दो लोग घायल हुए. इस घटना को लेकर बिश्नोई गिरोह से जुड़े लोगों द्वारा जिम्मेदारी लेने और धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई.
धमकियों के दायरे में आए चर्चित नाम
रणवीर सिंह: रंगदारी के लिए कथित तौर पर 10 से 20 करोड़ रुपये की मांग और वॉइस नोट के जरिए धमकी दिए जाने की खबर.
- आयुष शर्मा: अभिनेता सलमान खान के रिश्तेदार आयुष शर्मा को ईमेल के माध्यम से कथित धमकी मिलने का उल्लेख.
- आमिर खान: वर्ष 2026 में सोशल मीडिया के माध्यम से धमकी दिए जाने की खबर का जिक्र.
जेल में बंद गैंगस्टर का नेटवर्क कैसे सक्रिय?
लॉरेंस बिश्नोई के जेल में रहने के बावजूद उसके गिरोह से जुड़े लोगों के नाम विभिन्न आपराधिक मामलों में सामने आने की खबरें जांच एजेंसियों के लिए गंभीर विषय हैं. सबसे अहम सवाल यह है कि गिरोह के सदस्य किस तरह आपस में संपर्क बनाए रखते हैं, अपराध की कथित योजनाएं कैसे तैयार होती हैं और धमकी देने से लेकर वारदात को अंजाम देने तक अलग-अलग लोगों की क्या भूमिका रहती है.
इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए पुलिस को तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल संवाद, वित्तीय लेन-देन और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जैसे पहलुओं की जांच करनी पड़ती है. किसी गिरोह के नेटवर्क को तोड़ने के लिए केवल उसके कथित सरगना तक पहुंचना ही नहीं, बल्कि उसके सहयोगियों और आर्थिक मदद के स्रोतों की पहचान करना भी जरूरी है.
कानून और सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती
साबरमती जेल से स्थानांतरण पर प्रतिबंध और दूसरे राज्यों की पुलिस की जांच संबंधी जरूरतों के बीच तालमेल का मुद्दा अहम हो गया है. ऐसे मामलों में अदालतों और संबंधित प्राधिकरणों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है, ताकि सुरक्षा संबंधी चिंताओं के साथ-साथ निष्पक्ष जांच की जरूरत पूरी की जा सके.
आखिरकार, सवाल केवल यह नहीं है कि लॉरेंस बिश्नोई से पूछताछ कब और कैसे होगी. बड़ा सवाल यह है कि जेल में बंद किसी कथित गैंगस्टर के नेटवर्क को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय करने के लिए जांच एजेंसियों के पास कितने कारगर उपाय हैं और कानून के दायरे में रहकर उन उपायों का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है.













