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किस जज ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर उठाए सवाल? जस्टिस कौल की किताब में नियुक्तियों को लेकर बड़े खुलासे
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Monday, October 26, 2026
Last Updated On: Monday, October 26, 2026
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संजय किशन कौल ने अपनी पुस्तक ‘डिवाइडेड फियर और फेवर’ में पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के कामकाज और न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. भारत में मुख्य न्यायाधीशों की निष्पक्षता पर बहस नई नहीं है. जस्टिस दीपक मिश्रा के कार्यकाल में पीठों के गठन और मुकदमों के आवंटन पर सार्वजनिक विवाद हुआ; जस्टिस रंजन गोगोई के मामले में व्यक्तिगत आचरण की शिकायत की आंतरिक जांच हुई; और जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ के मामले में हालिया बहस कॉलेजियम और सरकार के संबंधों पर केंद्रित है.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Last Updated On: Monday, October 26, 2026
Supreme Court judge controversy: कौल का कहना है कि चंद्रचूड़ की नियुक्तियों के मामले में सरकार के प्रति जरूरत से ज्यादा नरम रुख अपनाते थे. कॉलेजियम की औपचारिक चर्चा से पहले ही सरकार की सहमति लेने पर विचार करते थे. पुस्तक में उन्होंने नियुक्तियों से जुड़े विवादों, एक अल्पसंख्यक उम्मीदवार पर सवालों और कॉलेजियम की खामियों का भी उल्लेख किया है. जस्टिस कौल की पुस्तक ने न्यायपालिका और केंद्र के संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
कॉलेजियम मामले में ‘बीच का रास्ता’ अपनाने को कहा
जस्टिस संजय किशन कौल के मुताबिक तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने एक मामले में उन्हें ‘बीच का रास्ता’ अपनाने और मामले को आगे नहीं बढ़ाने की सलाह दी थी.
कौल के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में छह रिक्त पदों को भरने के लिए कॉलेजियम की बैठक की तैयारी की जा रही थी. बैठक में नाम प्रस्तावित करने से पहले सहमति बनाने की कोशिश भी की गई थी. बैठक में जाते समय चंद्रचूड़ ने छठा नाम प्रस्तावित किया. कौल के संदेह के अनुसार यह वह नाम था, जिस पर सरकार की राय के आधार पर विचार किया गया था. उन्होंने इस पर विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि कॉलेजियम की औपचारिक चर्चा से पहले सरकार की सहमति लेना गलत संदेश देगा.
नियुक्तियों में सरकारी हस्तक्षेप पर सवाल
न्यायाधीशों की नियुक्तियों में सरकार के कथित हस्तक्षेप, कॉलेजियम की बैठक से पहले सरकार की मंजूरी लेने की कोशिश और अल्पसंख्यक समुदाय के एक उम्मीदवार की जाति को लेकर पूछे गए सवालों का भी उल्लेख किया गया है. रमेश ने कहा कि जिन मुद्दों पर अलग-अलग विचार होने चाहिए थे, उन्हें उन्होंने अपनी पुस्तक ‘डिवाइडेड फियर और फेवर’ में दर्ज किया है.
चंद्रचूड़ ने क्या दी प्रतिक्रिया
- पुस्तक नहीं पढ़ी: पुस्तक पढ़ने और उसमें लिखी बातों के संदर्भ को समझने के बाद ही विस्तार से प्रतिक्रिया दी जा सकती है.
- कॉलेजियम की बैठक सौहार्दपूर्ण थी: कौल के साथ अपने संबंधों को सम्मानजनक बताया.
- बैठक छोड़ने की घटना याद नहीं: कॉलेजियम की बैठक के बीच से उठकर चले जाने के आरोप की पुष्टि नहीं की.
- सरकार से संवाद होता है: उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्तियों में सरकार की भूमिका होती है और सरकार के साथ संवाद भी होता है.
पुराना नहीं है विवाद
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पद की संवैधानिक जिम्मेदारी केवल न्यायिक फैसले सुनाने तक सीमित नहीं है. कॉलेजियम के जरिए न्यायाधीशों की नियुक्ति, मुकदमों का आवंटन, संवैधानिक मामलों की सुनवाई और न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा भी इस पद से जुड़ी हैं. इसी वजह से समय-समय पर कुछ मुख्य न्यायाधीशों के कामकाज, प्रशासनिक फैसलों या कथित हितों के टकराव पर सार्वजनिक बहस हुई है.
Written By: Rajiv Mandal













