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साइबर ठगी को सुप्रीम कोर्ट ने बताया ‘डिजिटल डकैती’, CJI सूर्यकांत बोले- सामान्य वसूली से ज्यादा गंभीर अपराध
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Friday, October 30, 2026
Last Updated On: Friday, October 30, 2026
साइबर ठगी आज भारत की आर्थिक सुरक्षा, डिजिटल भरोसे और नागरिकों की गाढ़ी कमाई के लिए एक गंभीर राष्ट्रीय संकट बन चुकी है. केवल पिछले कुछ वर्षों में देशवासियों ने ऑनलाइन स्कैम, फर्जी निवेश और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे संगठित अपराधों में ₹50,000 करोड़ से अधिक गंवाए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में अब सख्त रुख अपनाया है.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Last Updated On: Friday, October 30, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केंद्र अलग अपराध बनाने पर विचार करे
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए होने वाली साइबर ठगी को ‘डिजिटल डकैती’ करार दिया है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह सामान्य जबरन वसूली से अधिक गंभीर अपराध है. वीडियो कॉल से खासकर बुजुर्गों को निशाना बनाया जा रहा है. ऐसे बेशर्म अपराधियों से बेहद सख्ती से निपटना चाहिए. कोर्ट ने यहां तक कहा कि कानून में मुकदमे से पहले दंडित करने की गुंजाइश है तो उसका भी इस्तेमाल होना चाहिए.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस बी. मोहना की बेंच गौरव कुमार साहा और निधि भंडारी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. दोनों ने अपने खिलाफ 12 राज्यों में दर्ज 35 साइबर अपराध मामलों को एक जगह लाने की मांग की थी. आरोप है कि इनकी कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम जमा करने और आगे भेजने में हुआ.
याचिकाकर्ता खुद भी धोखाधड़ी का शिकार
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि वे खुद धोखाधड़ी के शिकार हैं और उनकी जानकारी के बिना उनके खाते का इस्तेमाल हुआ. इस पर कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की सुविधा के लिए पीड़ितों को दिल्ली नहीं बुलाया जा सकता. अलग-अलग राज्यों में चल रही जांच को दिल्ली नहीं बुला सकते. अलग-अलग राज्यों में चल रही जांच प्रभावित करने की भी अनुमति किसी सूरत में नहीं दी जा सकती.
इससे पहले 28 जुलाई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह डिजिटल अरेस्ट को आपराधिक कानून में औपचारिक रूप से परिभाषित करने और इसे कठोर सजा के साथ अलग अपराध घोषित करने पर विचार करे. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस बागची तथा जस्टिस बी. मोहना की बेंच ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूतों के आधार पर राय बनने के बाद उनकी संपत्ति को फ्रीज किया जा सकता है.
त्योहारों में बचकर रहें
त्योहारों में खतरा ज्यादा, फर्जी मैसेज-ऐप से बचें, साइबर सुरक्षा कंपनी आर्किटेक ब्लॉक के मुताबिक, त्योहारों में ऑनलाइन खरीदारी, डिजिटल पेमेंट और ट्रैवल बुकिंग बढ़ने से साइबर ठगी का खतरा बढ़ सकता है. अपराधी भारी डिस्काउंट, पार्सल डिलीवरी, बैंक अलर्ट, केवाईसी अपडेट और बिजली बिल के नाम पर फर्जी मैसेज भेज सकते हैं.
एसएमएस, व्हाट्सएप और ईमेल से भेजे लिंक के जरिए निजी जानकारी चुराई जा सकती है. फर्जी ऐप पासवर्ड-ओटीपी भी चुरा सकते हैं. बचने के लिए अनजान लिंक न खोलें, संदिग्ध ऐप इंस्टॉल न करें और भुगतान या केवाईसी संबंधी संदेशों की पुष्टि आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही करें.
बैंकों की है बड़ी भूमिका
साइबर ठगी रोकने में बैंकों की भूमिका अग्रिम पंक्ति के सुरक्षा कवच जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि ठगी के पैसे को रोकने का सीधा नियंत्रण उन्हीं के पास होता है. संदिग्ध असामान्य लेन-देन को रियल-टाइम में फ्लैग करना, अवैध ‘म्यूल’ खातों पर कड़ी KYC जांच रखना और शिकायत मिलते ही तुरंत फंड फ्रीज करना पूरी तरह बैंक प्रणाली पर ही निर्भर करता है.
Written By: Rajiv Mandal
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