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Indian Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में, IT शेयरों पर दबाव
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, September 9, 2026
Last Updated On: Wednesday, September 9, 2026
Indian Stock Market: भारतीय शेयर बाजार बुधवार को कमजोर वैश्विक संकेतों और बढ़ते कच्चे तेल की कीमतों के बीच गिरावट के साथ खुला. सेंसेक्स 533 अंक और निफ्टी 135 अंक टूटा. आईटी व सर्विसेज शेयरों पर दबाव रहा. अमेरिका-ईरान तनाव और आईपीओ बाजार में बढ़ती लिक्विडिटी निकासी से निवेशकों की चिंता बढ़ी.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, September 9, 2026
Indian Stock Market: भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत कमजोरी के साथ की. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 533 अंक फिसलकर 75,044 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 135 अंक टूटकर 23,498 पर कारोबार करता दिखा. बाजार में इस गिरावट के पीछे कमजोर वैश्विक संकेतों के साथ-साथ कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और घरेलू स्तर पर आईपीओ बाजार की ओर बढ़ता पैसा प्रमुख कारण माने जा रहे हैं. खास तौर पर आईटी और सर्विसेज से जुड़े शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया.
शुरुआत में ही बिकवाली का दबाव
कारोबार खुलते ही निवेशकों का रुझान सतर्क नजर आया. निफ्टी आईटी और निफ्टी सर्विसेज शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव वाले सेक्टरों में रहे. इनके अलावा फाइनेंशियल सर्विसेज, रियल्टी, ऑटो, पीएसयू बैंक, प्राइवेट बैंक, एफएमसीजी, मीडिया, कंजम्पशन और ऑयल एंड गैस जैसे कई इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे. इससे बाजार की व्यापक कमजोरी का अंदाजा लगाया जा सकता है.
कुछ सेक्टरों ने संभाला मोर्चा
जहां कई प्रमुख सेक्टरों में गिरावट रही, वहीं कुछ हिस्सों में खरीदारी देखने को मिली. निफ्टी एनर्जी, हेल्थकेयर, फार्मा, मेटल, पीएसई और कमोडिटीज इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे. सेंसेक्स में एलएंडटी, एनटीपीसी, सन फार्मा, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे शेयरों में मजबूती रही. इसके उलट एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और टीसीएस समेत कई बड़े शेयरों में दबाव बना रहा.
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
बाजार की चिंता सिर्फ घरेलू कारकों तक सीमित नहीं है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेला है और ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है. महंगे तेल से भारत जैसे बड़े आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है. इसी वजह से निवेशकों के बीच वैश्विक जोखिम को लेकर सतर्कता बढ़ी हुई है.
आईपीओ बाजार खींच रहा निवेशकों का पैसा
जानकारों के मुताबिक बाजार पर दूसरा बड़ा दबाव तेजी से बढ़ता IPO बाजार है. जून के बाद से आईपीओ में लिस्टिंग गेन करीब 22 प्रतिशत तक पहुंचने से रिटेल और संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है. इस साल निफ्टी का रिटर्न करीब 9.5 प्रतिशत नकारात्मक रहने के बीच निवेशकों को आईपीओ में बेहतर अवसर नजर आ रहे हैं. यहां तक कि एफआईआई ने एक्सचेंजों के जरिए इस साल करीब 2.84 लाख करोड़ रुपये की इक्विटी बेची है, लेकिन आईपीओ में लगभग 36,000 करोड़ रुपये लगाए हैं. ऐसे में बाजार की मौजूदा दिशा पर वैश्विक घटनाओं के साथ आईपीओ की ओर जा रही लिक्विडिटी का असर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
वैश्विक बाजारों से भी मिले-जुले संकेत
एशियाई बाजारों में कारोबार पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा. टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक और सोल के बाजार बढ़त में रहे, जबकि जकार्ता में कमजोरी देखने को मिली. इससे पहले अमेरिकी बाजार भी मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे. डाओ जोन्स में 1.18 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.32 प्रतिशत की गिरावट रही. ऐसे में भारतीय बाजार के सामने फिलहाल वैश्विक अनिश्चितता, महंगा कच्चा तेल और घरेलू पूंजी के बदलते रुझान तीन बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं.
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