सबसे बड़ा सवाल : राजद में होगी भगदड़, भाई ही भाई को कितना पहुंचाएगा नुकसान

Authored By: सतीश झा

Published On: Thursday, August 21, 2025

Last Updated On: Thursday, August 21, 2025

Lalu Prasad Yadav परिवारिक विवाद और RJD में संकट.
Lalu Prasad Yadav परिवारिक विवाद और RJD में संकट.

पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के परिवार में जिस प्रकार से दोनों भाइयों के बीच सियासी रंजिश आहिस्ता-आहिस्ता सामने आ रही है, उससे लगता है कि चुनाव की घोषणा के बाद राजद (RJD) में भगदड़ होगी. जानकारों का मानना है कि जिसे भी तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के नेतृत्व वाले RJD से टिकट नहीं मिलेगा, वह अपनी किस्मत तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) की टीम में आकर आजमाना चाहेगा. यदि इस प्रकार की घटना की संख्या अधिक होगा, तो यकीनन सियासी नुकसान लालू परिवार (Lalu Family) को ही होगा.

Authored By: सतीश झा

Last Updated On: Thursday, August 21, 2025

पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के परिवार में धीरे-धीरे सामने आ रही दोनों भाइयों की सियासी रंजिश अब पार्टी की एकता पर सवाल खड़े कर रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव की घोषणा के बाद राजद (RJD) में बड़ी भगदड़ देखने को मिल सकती है.

आंकड़ें कह रहे हैं अलग कहानी

सियासत में आंकड़ों का खेल हमेशा अहम रहा है. पिछले विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) में राजद (RJD) को जहां सबसे बड़ी पार्टी बनने का मौका मिला, वहीं कई सीटों पर उसकी जीत बेहद कम अंतर से दर्ज की गई. आंकड़ों के मुताबिक, RJD ने करीब 15 सीटें ऐसी जीतीं जहां जीत का अंतर 5000 वोट से भी कम था. इतनी कम बढ़त वाली सीटें अगले चुनाव में पार्टी के लिए चुनौती बन सकती हैं. विपक्षी दल इन्हीं सीटों पर अपना पूरा जोर लगाने की रणनीति बना रहे हैं.

समीकरण बदलने के संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि जिन 15 सीटों पर राजद की जीत का अंतर बेहद कम था, वहां मतदाताओं का मामूली सा रूझान बदलना भी चुनाव परिणामों को पलट सकता है. वहीं जहानाबाद जैसी सीटों पर हार यह संकेत देती है कि राजद का वोटबैंक खिसक रहा है और विपक्ष धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है.

छोटे वोट अंतर ने बदले कई नतीजे

बिहार में 2020 के विधानसभा चुनाव में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने जमकर मेहनत की थी. उनकी अगुवाई में RJD सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई, लेकिन बहुमत से वह कुछ कदम दूर रह गई. चुनाव नतीजों पर नजर डालें तो कई सीटों पर तस्वीर बेहद रोचक रही. कुछ सीटें ऐसी थीं जहां राजद को 2000 से भी कम वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा. वहीं, कई सीटों पर पार्टी ने बेहद कम अंतर से जीत दर्ज की.

इन नतीजों से साफ होता है कि यदि थोड़ा-सा भी वोट RJD के पक्ष या विपक्ष में इधर-उधर होता, तो चुनाव का पूरा गणित बदल सकता था. यही कारण है कि 2025 का चुनाव राजद और विपक्षी दलों, दोनों के लिए और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है.

जहानाबाद में नहीं चला राजद का जादू

जहां एक तरफ राजद कम अंतर से कई सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रहा, वहीं जहानाबाद सीट पर उसे हार का सामना करना पड़ा. यहां जनता दल (यू) और भाजपा समर्थित उम्मीदवार ने राजद के प्रत्याशी को कड़ी टक्कर देते हुए हराया था. यह हार इसलिए भी अहम मानी जाती है क्योंकि जहानाबाद क्षेत्र को राजद का परंपरागत गढ़ माना जाता रहा है.

हालिया बयानबाजी ने बढ़ाई खाई

पिछले दिनों तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) ने खुले मंच से यह बयान देकर हलचल मचा दी थी कि वे “भाई की तरह नेता नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने वाले कार्यकर्ता बनना चाहते हैं.” वहीं, तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के करीबी नेताओं ने इशारों-इशारों में कहा कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इस बयानबाजी ने दोनों खेमों के बीच की तनावपूर्ण स्थिति को और गहरा दिया है.

परिवार और पार्टी पर असर

विशेषज्ञों का कहना है कि लालू परिवार के भीतर की खींचतान लंबे समय तक पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को असमंजस में रख सकती है.अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले चुनावों से पहले भाई-भाई के बीच की यह सियासी जंग RJD को किस हद तक कमजोर करेगी और इसका फायदा विरोधी दलों को किस तरह मिलेगा.

तेज प्रताप ने उतारे उम्मीदवार तो NDA की राह होगी आसान

लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और RJD से निकाले गए तेज प्रताप यादव ने अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए उम्मीदवार उतारने का फैसला किया, तो इसका सीधा असर राजद (RJD) पर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेज प्रताप यादव उन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारते हैं, जहां राजद पहले से ही कमजोर रही है या जहां पार्टी ने बहुत कम अंतर से जीत दर्ज की थी, तो वहां वोट बंटवारे की स्थिति बन सकती है. ऐसे हालात में सबसे ज्यादा फायदा एनडीए (NDA) गठबंधन (BJP-JDU) को होगा, जो पहले से ही राज्य की सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम कर रहा है.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बिहार की कई सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी रहा है. यदि इन सीटों पर तेज प्रताप (Tej Pratap Yadav) समर्थित उम्मीदवार उतरे और अल्पसंख्यक या यादव वोट बैंक का थोड़ा भी हिस्सा खिसक गया, तो राजद के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

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About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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