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एसआईआर से तय होगी नागरिकता? जानिए क्या है SIR, वोटर बनने के नए नियम और विदेशी नागरिकों के लिए क्या है प्रक्रिया
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, July 13, 2026
Last Updated On: Tuesday, July 14, 2026
एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) के बाद मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया बदल गई है. जानिए SIR क्या है, नए वोटरों के लिए क्या नियम लागू हुए हैं, माता-पिता की जानकारी क्यों जरूरी हुई, विदेशी और NRI कैसे आवेदन कर सकते हैं तथा नागरिकता को लेकर क्या कहते हैं मौजूदा कानून.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, July 14, 2026
SIR Citizenship Rules: देश में इन दिनों स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चर्चा तेज है. चुनाव आयोग का कहना है कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है, ताकि केवल पात्र भारतीय नागरिक ही वोटर सूची में शामिल रहें. दूसरी ओर, इस प्रक्रिया ने नागरिकता, दस्तावेजों और वोटर बनने की पात्रता को लेकर कई नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं. खासकर पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं और विदेशी मूल के लोगों के बीच इसे लेकर जिज्ञासा और चिंता दोनों बढ़ी हैं.
क्या है SIR और क्यों हो रही है इसकी जरूरत?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची का विशेष सत्यापन अभियान है. इस प्रक्रिया में चुनाव आयोग घर-घर जाकर या निर्धारित माध्यमों से मतदाताओं का सत्यापन कराता है. बूथ लेवल अधिकारी (BLO) मतदाताओं से गणना फॉर्म या EF फॉर्म भरवाते हैं और आवश्यक दस्तावेजों की जांच करते हैं. इसका मकसद मृत, डुप्लीकेट, दूसरे स्थान पर जा चुके या अपात्र लोगों के नाम हटाना और पात्र भारतीय नागरिकों के नाम सूची में शामिल करना है. इस प्रक्रिया के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होती है, जिस पर दावा और आपत्ति दर्ज कराने का भी अवसर मिलता है.
क्या SIR नागरिकता तय करता है?
हाल के समय में SIR को लेकर यह धारणा बनी कि यह नागरिकता की जांच का माध्यम बन रहा है. हालांकि कानूनी स्थिति अलग है. सर्वोच्च न्यायालय स्पष्ट कर चुका है कि चुनाव आयोग नागरिकता तय करने वाली संस्था नहीं है. आयोग केवल मतदाता सूची तैयार करता है और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर पात्रता की जांच करता है. भारत में अभी ऐसा कोई एक दस्तावेज नहीं है जिसे अंतिम और निर्विवाद नागरिकता प्रमाण माना गया हो. पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज नागरिकता के समर्थन में उपयोग किए जा सकते हैं, लेकिन अकेले किसी एक दस्तावेज को अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता.
पहली बार वोटर बनने वालों के लिए क्या बदले नियम?
अब पहली बार ऑनलाइन फॉर्म-6 भरकर वोटर बनने वाले युवाओं के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है. आवेदन करते समय उन्हें यह बताना होगा कि उनके माता-पिता पिछली SIR प्रक्रिया में शामिल थे या नहीं. यदि माता-पिता का नाम पहले की SIR सूची में मौजूद है, तो आवेदक को उनके विधानसभा क्षेत्र, पोलिंग बूथ (पार्ट नंबर) और मतदाता सूची में दर्ज क्रमांक की जानकारी देनी होगी.
यदि माता-पिता पहले की SIR प्रक्रिया का हिस्सा नहीं रहे हैं, तो आवेदक को उनका नाम और उपलब्ध होने पर EPIC (वोटर आईडी) नंबर दर्ज करना होगा. यह घोषणा पूरी किए बिना ऑनलाइन आवेदन आगे नहीं बढ़ेगा.
चुनाव आयोग ने यह बदलाव क्यों किया?
चुनाव आयोग का कहना है कि इस नई व्यवस्था से नए मतदाताओं की पहचान का सत्यापन आसान होगा. साथ ही कई मामलों में अतिरिक्त दस्तावेज जमा कराने की जरूरत भी कम पड़ेगी. आयोग का दावा है कि इससे पात्र नागरिकों का पंजीकरण तेज और अधिक पारदर्शी बनेगा तथा फर्जी या डुप्लीकेट नामों को रोकने में मदद मिलेगी.
नए नियम पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
इस नई व्यवस्था को लेकर कानूनी विशेषज्ञों ने भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि फॉर्म-6 का प्रारूप जन प्रतिनिधित्व अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत निर्धारित होता है. यदि उसमें कोई नया प्रावधान जोड़ा जाता है, तो उसके लिए केंद्र सरकार की अधिसूचना और राजपत्र में संशोधन आवश्यक माना जाता है. अब तक इस संबंध में सार्वजनिक रूप से स्पष्ट संशोधन सामने नहीं आया है. वहीं कुछ लोगों की चिंता यह भी है कि जिनके पास माता-पिता के पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, उनके आवेदन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
विदेशी नागरिक या NRI कैसे कर सकते हैं आवेदन?
- भारतीय कानून के अनुसार केवल भारतीय नागरिक ही मतदाता बन सकते हैं. यदि कोई व्यक्ति विदेशी नागरिक है या उसके पास भारतीय नागरिकता नहीं है, तो उसका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जा सकता.
- हालांकि विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिक (NRI), जिनके पास भारतीय नागरिकता और वैध भारतीय पासपोर्ट है, वे निर्धारित नियमों के अनुसार मतदाता पंजीकरण करा सकते हैं. उन्हें निर्वाचन अधिकारी द्वारा मांगे गए दस्तावेज और आवश्यक जानकारी उपलब्ध करानी होती है.
- वहीं OCI कार्डधारक या अन्य विदेशी नागरिक केवल भारत में रहने के आधार पर वोट देने के पात्र नहीं होते.
विदेशी मूल के लोगों के सामने क्या चुनौती है?
दिल्ली सहित कई राज्यों में नेपाल मूल के ऐसे परिवार भी हैं, जो वर्षों से भारत में रह रहे हैं. कुछ मामलों में विवाह के बाद भारत आई महिलाओं या विदेशी मूल के लोगों के सामने SIR के दौरान पारिवारिक रिकॉर्ड उपलब्ध न होने की समस्या सामने आई है. चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति पहले गृह मंत्रालय से भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं. यदि जांच में भारतीय नागरिकता प्रमाणित हो जाती है, तो उन्हें SIR डेटाबेस में शामिल किया जाएगा और उनका मतदान का अधिकार सुरक्षित रहेगा.
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