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कोयला ब्लॉक आवंटन मामला, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया मनमोहन सिंह के खिलाफ समन, CBI की क्लोजर रिपोर्ट को दी मंजूरी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, July 29, 2026
Last Updated On: Wednesday, July 29, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ 2015 में जारी समन रद्द करते हुए CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली. अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के पास संज्ञान लेने का पर्याप्त आधार नहीं था. इससे मामले की कार्यवाही औपचारिक रूप से समाप्त हो गई.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, July 29, 2026
कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत ने वर्ष 2015 में विशेष CBI अदालत द्वारा जारी समन को रद्द करते हुए कहा कि उस समय उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उनके खिलाफ कार्यवाही शुरू करने का पर्याप्त आधार नहीं था. साथ ही अदालत ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए इस मामले में उनके खिलाफ चल रही प्रक्रिया को समाप्त कर दिया.
क्या था पूरा मामला?
कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में CBI ने जांच के बाद डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ कोई आपराधिक जिम्मेदारी नहीं पाई थी और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी. हालांकि, विशेष CBI अदालत ने उस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया और 2015 में उनके खिलाफ समन जारी कर दिया था. इसी आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट के पास CBI की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और उसके बाद मामले का संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था. अदालत ने माना कि जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत निष्कर्षों को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्वीकार किया जाना चाहिए था. इसी कारण विशेष अदालत का आदेश रद्द कर दिया गया और मामले को बंद करने का निर्देश दिया गया.
निधन के बाद भी क्यों हुई सुनवाई?
डॉ. मनमोहन सिंह का दिसंबर 2024 में निधन हो चुका था. इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने इस अपील पर सुनवाई जारी रखी. अदालत का मानना था कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ कुछ प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज थीं, जिनकी न्यायिक समीक्षा आवश्यक थी. सुनवाई के दौरान उनके पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि भले ही अपील तकनीकी रूप से समाप्त मानी जा सकती है, लेकिन रिकॉर्ड पर दर्ज टिप्पणियों को हटाना न्यायहित में जरूरी है.
CBI की रिपोर्ट को मिली अंतिम स्वीकृति
सुनवाई के दौरान अदालत ने CBI द्वारा दायर दोनों क्लोजर रिपोर्टों का अध्ययन किया और पाया कि जांच एजेंसी के निष्कर्षों को अस्वीकार करने का कोई ठोस कारण नहीं था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया और CBI की क्लोजर रिपोर्ट को अंतिम रूप से मंजूरी दे दी.
फैसले का क्या महत्व है?
इस फैसले के साथ ही संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के दौर के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक में डॉ. मनमोहन सिंह का नाम औपचारिक रूप से विवाद से बाहर हो गया है. सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी जांच एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार करने के लिए अदालत के पास ठोस और पर्याप्त कानूनी आधार होना आवश्यक है. यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा सकता है.
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