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पेपर लीक विवाद पर एक्शन मोड में केंद्र सरकार: फास्ट ट्रैक कोर्ट से प्रशासनिक बदलाव तक, अब किस-किस पर गिरेगी गाज?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, July 24, 2026
Last Updated On: Friday, July 24, 2026
NEET-UG पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार एक्शन मोड में नजर आ रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट, नए कानून और प्रशासनिक बदलाव का ऐलान किया है. वहीं विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा है. अब सभी की नजर सरकार के अगले बड़े फैसलों पर टिकी है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, July 24, 2026
paper leak controversy: NEET-UG पेपर लीक विवाद अब केवल एक परीक्षा का मामला नहीं रह गया है. यह मुद्दा सड़क से लेकर संसद तक राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन चुका है. देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन, विपक्ष के लगातार हमलों और शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार अब डैमेज कंट्रोल मोड में दिखाई दे रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद मोर्चा संभालते हुए स्पष्ट किया है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा. इसके साथ ही सरकार ने कई बड़े फैसलों की शुरुआत कर दी है.
PM मोदी का सख्त संदेश, फास्ट ट्रैक कोर्ट का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया और वीडियो संदेश के जरिए कहा कि छात्रों का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने पेपर लीक के मामलों में दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया. उनका कहना था कि वर्षों तक मामलों के लंबित रहने से अपराधियों का मनोबल बढ़ता है, इसलिए अब ऐसे मामलों की रोजाना सुनवाई कर जल्द फैसला सुनिश्चित किया जाएगा.
मिशन मोड में जुटे मंत्रालय
प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों ने तेजी से काम शुरू कर दिया. सरकार ने शुरुआती चरण में दिल्ली, बॉम्बे, कलकत्ता और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी है. इन अदालतों में पेपर लीक से जुड़े मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई होगी, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके.
शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव
सरकार ने केवल कानूनी कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव किए. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेश गंगवार को नया शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया, जबकि तत्कालीन शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला कर उन्हें पंचायती राज विभाग भेज दिया गया. इस फैसले को शिक्षा विभाग में जवाबदेही तय करने की दिशा में सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है.
वीडियो संदेश से छात्रों को दिया भरोसा
प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए गहरा आघात है. उन्होंने बताया कि सरकार की पहली प्राथमिकता यह थी कि छात्रों का एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो. इसलिए कम समय में दोबारा परीक्षा आयोजित कर परिणाम भी जारी किए गए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नए कानून का मसौदा तैयार किया जा चुका है, जिससे भविष्य में ऐसे अपराधों पर और सख्ती से रोक लगाई जा सके.
सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन
सरकार के कदमों के बाद जलवायु कार्यकर्ता और छात्र आंदोलन का समर्थन कर रहे सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया. केंद्रीय मंत्रियों ने उनसे मुलाकात कर सरकार की ओर से कई आश्वासन दिए. इनमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने, संसद में परीक्षा सुधार पर चर्चा कराने और पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिवारों की मदद पर सकारात्मक विचार करने जैसी बातें शामिल रहीं. हालांकि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया.
अब सबकी नजर अगले फैसलों पर
सरकार अब पेपर लीक के खिलाफ प्रस्तावित कानून को जल्द संसद में लाने की तैयारी कर रही है. माना जा रहा है कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा. दूसरी ओर विपक्ष अब भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत कई दलों का कहना है कि केवल प्रशासनिक बदलाव से जवाबदेही तय नहीं होगी. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार आने वाले दिनों में केवल नए कानून तक सीमित रहेगी या फिर राजनीतिक स्तर पर भी कोई बड़ा फैसला देखने को मिलेगा.
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