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जंतर-मंतर पर बड़ा खुलासा, प्रदर्शन की भीड़ में मिले 2500 अपराधी, FRS से पहचान, दिल्ली पुलिस ने दर्ज कीं 15 FIR
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, July 25, 2026
Last Updated On: Saturday, July 25, 2026
Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने फेसियल रिकग्निशन सिस्टम की मदद से 2,500 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान करने का दावा किया है. अब तक 15 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं. पुलिस का कहना है कि तकनीक का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और वांछित अपराधियों पर नजर रखना है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, July 25, 2026
Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा खुलासा किया है. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन की भीड़ में बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी शामिल हुए, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड पहले से मौजूद है. फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) की मदद से अब तक 2,500 से अधिक संदिग्ध आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान की गई है. इस मामले में अब तक 15 एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी हैं.
FRS तकनीक से हुई पहचान
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन स्थल के प्रमुख प्रवेश और निकास मार्गों पर चार फेसियल रिकग्निशन सिस्टम यूनिट तैनात की गई थीं. ये कैमरे सीधे दिल्ली पुलिस के डेटाबेस से जुड़े हुए हैं. जैसे ही कोई व्यक्ति कैमरे की निगरानी में आता है, उसका चेहरा कुछ ही सेकंड में रिकॉर्ड से मिलाया जाता है. यदि वह वांछित, फरार या आदतन अपराधी होता है, तो संबंधित पुलिस टीम को तुरंत सूचना भेज दी जाती है.
भीड़ की आड़ में कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश
पुलिस सूत्रों का दावा है कि कई संदिग्ध लोग प्रदर्शनकारियों की भीड़ का फायदा उठाकर पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने और माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे थे. ऐसे लोगों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि तकनीक की मदद से समय रहते संदिग्धों पर नजर रखना आसान हुआ है.
आम प्रदर्शनकारियों को नहीं होगा नुकसान
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि FRS कैमरों का उद्देश्य सामान्य प्रदर्शनकारियों की निगरानी करना नहीं है. इनका इस्तेमाल केवल उन लोगों की पहचान के लिए किया जा रहा है, जिनका आपराधिक इतिहास पहले से पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है. इसमें वांछित अपराधी, फरार आरोपी और “बैड कैरेक्टर” के रूप में चिन्हित लोग शामिल हैं.
पहले भी हो चुका है तकनीक का इस्तेमाल
दिल्ली पुलिस इससे पहले भी बड़े आयोजनों और संवेदनशील मौकों पर फेसियल रिकग्निशन सिस्टम का उपयोग कर चुकी है. गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, होली, दिवाली, ईद और रामलीला जैसे आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए इस तकनीक को तैनात किया गया था. अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक के जरिए अपराधियों की पहचान तेज और सटीक हो रही है, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिल रही है.
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