अब सरकारी कर्मचारियों के पास होगा दो पेंशन स्कीम का विकल्प, एनपीएस यूपीएस में कौन बेहतर

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Sunday, August 25, 2024

Unified Pension Scheme
Unified Pension Scheme

केंद्र की मोदी सरकार सरकारी कर्मचारियों के दबाव में पुरानी पेंशन व्यवस्था (ओपीएस) तो लागू नहीं की लेकिन कर्मचारियों की मांग को ध्यान में रखते हुए नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के विकल्प के रूप में यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लेकर आई है।

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Last Updated On: Sunday, August 25, 2024

पिछले कुछ वर्षों से सरकारी कर्मचारी नेशनल पेंशन सिस्टम का विरोध कर रहे हैं। कर्मचारी गारंटिड पेंशन यानि पुरानी पेंशन व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। इसे विपक्ष ने भी अपना चुनावी मुद्दा बनना शुरू कर दिया था। हालांकि हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में पुरानी पेंशन लागू करने का वादा कर सत्ता में पहुंची कांग्रेस इन राज्यों में अभी तक इसे लागू नहीं की है। केंद्र सरकार सरकारी कर्मचारियों की मांग और दबाव में अब एक नई पेंशन व्यवस्था लेकर आई है। इसे कल कैबिनेट से मंजूरी भी मिल गई है।

ओपीएस नहीं यूपीएस

केंद्र की मोदी सरकार सरकारी कर्मचारियों के विरोध के आगे झुकी है। दबाव में सरकार पुरानी पेंशन व्यवस्था (ओपीएस) तो लागू करने नहीं जा रही है लेकिन कर्मचारियों को नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के विकल्प के रूप में यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लेकर आई है। यह पेंशन स्कीम नेशनल पेंशन सिस्टम का विकल्प देगी। यानि सरकारी कर्मचारी एनपीएस और यूपीएस में से कोई एक पेंशन स्कीम को चुन सकते हैं। यह व्यवस्था एक अप्रैल 2025 से लागू होगी।

एनपीएस (NPS) में क्या-क्या है?

एनपीएस 1 जनवरी 2004 से लागू है। यानी एक जनवरी 2004 से भर्ती हुए सरकारी कर्मचारियों को एनपीएस मिलता है। जबकि उसके पहले बहाल हुए सरकारी कर्मचारी ओपीएस के तहत आते हैं। एनपीएस में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डीए का 10 फीसदी हिस्सा कटता है। वहीं 14 प्रतिशत सरकार देती है। यह राशि शेयर बाजार में लगाया जाता है। इसलिए इसमें शेयर बाजार जैसा जोखिम है।

एनपीएस में कुछ परिस्थितियों में सेवनिवृत कर्मचारियों को टैक्स भी देना होता है। इस पेंशन व्यवस्था में महंगाई भत्ता मिलने का प्रावधान नहीं है। साथ ही सेवनिवृति के बाद निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं होती है। पेंशन शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर रहती है।

इसमें कर्मचारियों को बेसिक सैलरी का 10 फीसदी और सरकार अपनी ओर से 14 फीसदी जमा करती है। सेवनिवृति के समय पेंशन पाने के लिए एनपीएस में जमा रकम का कम से कम 40 प्रतिशत राशि की एन्युटी लेनी होती है।

कर्मचारी की मृत्‍यु होने पर एनपीएस में निवेश की रकम का भुगतान नॉमिनी को होता है। अगर नॉमिनी पेंशन लेने का इच्‍छुक है तो उसे इसके लिए एन्‍युटी खरीदनी होगी।

UPS VS OPS

यूपीएस (UPS) में क्या-क्या है?

यह स्कीम एक अप्रैल 2025 से लागू होगी। इसमें सरकारी कर्मचारियों को अलग से कोई भुगतान नहीं करना है। एनपीएस के तरह ही कर्मचारियों की बेसिक सेलरी और डीए का 10 प्रतिशत इसमें जमा होगा। जबकि सरकार इसमें 14 प्रतिशत के बदले 18.5 प्रतिशत धनराशि जमा कराएगी।

सरकारी कर्मचारी यदि कम से कम 25 साल नौकरी किया है तो सेवनिवृति के समय अंतिम 12 महीने के औसत वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में उन्हें मिलन शुरू होगा। पेंशनभोगी कर्मचारियों को मौत होने के बाद उनके परिवार को मृत्यु के वक्त मिलने वाली पेंशन का 60 प्रतिशत राशि पेंशन मिलेगा।

यदि सरकारी कर्मचारी 10 साल नौकरी करने के बाद कार्यमुक्त होते हैं तो कम से कम दस हजार रुपए पेंशन मिलेगी। इस स्कीम में कर्मचारियों को महंगाई इंडेक्सेशन का लाभ मिलेगा।

यह पेंशन स्कीम शेयर बाजार पर आधारित नहीं है। इसलिए इसमें जोखिम नहीं रहेगा। सेवनिवृति के बाद कर्मचारियों को फिक्स पेंशन मिलेगी। अभी यह सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों के लिए है। यदि कोई राज्य सरकार अपने प्रदेशों में इसे लागू करना चाहे तो अपने करचरियों को विकल्प दे सकते हैं।

एनपीएस(NPS) का हो रहा था विरोध

कुछ वर्षों से सरकारी कर्मचारी एनपीएस का विरोध कर रहे थे। इसे देखते हुए कांग्रेस ने कुछ विधानसभा चुनावों में इसे मुद्दा भी बनाया था। साथ ही अपने घोषणा पत्र में पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) लागू करने का वादा किया था। जिसके बाद पार्टी हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में सत्ता में आई। हालांकि कांग्रेस इन प्रदेशों में इसे अभी तक लागू नहीं की है।

फिर भी पिछले लोकसभा चुनाव में इसे मुद्दा बनाया गया था। वहीं कर्मचारी पहले से ही पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग कर रहे थे। कर्मचारी संगठनों ने इसको लेकर फरवरी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा था। पत्र में एनपीएस बंद कर गारंटीकृत ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने की मांग की गई थी। कर्मचारी संगठनों ने एक मई से हड़ताल करने की बात भी की थी। लेकिन सरकार से बातचीत के बाद हड़ताल को टाल दिया गया था। इसके बाद सरकार यूपीएस लेकर आई है।

गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
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