Special Coverage
प्रियंका वाड्रा (Priyanka Vadra): ‘इलेक्शन इन वेटिंग’ खत्म, जानें कहां से लड़ेंगी चुनाव
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Tuesday, June 18, 2024
Last Updated On: Wednesday, June 26, 2024
जब राहुल गांधी वायनाड और रायबरेली दोनों सीटों से चुनाव जीत गए तो यह बात और साफ हो गई कि 18 वीं लोकसभा में ही प्रियंका भी सांसद बनेंगी। लेकिन वे कहां से चुनाव लड़ेंगी यह साफ नहीं था।
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Wednesday, June 26, 2024
आखिरकार प्रियंका वाड्रा का ‘इलेक्शन इन वेटिंग’ (Election in Waiting) समाप्त हुआ। ऐसा नहीं है कि पार्टी उन्हें चुनाव की टिकट नहीं दे रही थी। बल्कि प्रियंका खुद चुनाव से दूर रहना चाहती थी। हर बार वह चुनाव लड़ने से मना कर देती थीं। अब वह चुनाव मैदान मे उतरने जा रही हैं। इसकी घोषणा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Congress National President Mallikarjun Kharge) ने आज स्वयं की। वह केरल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ेंगी।
वायनाड से चुनावी मैदान में प्रियंका (Priyanka Contesting from Wayanad)
प्रियंका वाड्रा पहली बार चुनाव लड़ेंगी। एक तरह से कहा जाए तो प्रियंका चुनावी राजनीति में प्रवेश करने वाली है। अब तक वो सक्रिय राजनीति में तो थीं लेकिन सिर्फ पार्टी के प्रचार-प्रसार तक अपने को सीमित की हुई थीं। पिछले लोकसभा चुनाव 2019 की तर्ज पर ही इस बार भी राहुल गांधी दो सीट से चुनाव लड़े थे। केरल के वायनाड और उत्तर प्रदेश के रायबरेली से। इस बार इन्हें दोनों सीटों पर जीत मिली। अब राहुल गांधी वायनाड सीट को छोड़ेंगे और रायबरेली के सांसद बने रहेंगे। वायनाड से प्रियंका वाड्रा उपचुनाव में कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार होंगी।
राहुल (Rahul) छोड़ेंगे वायनाड सीट
प्रियंका उपचुनाव लड़ेंगी, इसका संकेत लोकसभा चुनावों के दौरान ही मिल गया था। जब राहुल गांधी को अमेठी के बजाय रायबरेली से उतारा गया था। जबकि सोनिया गांधी (Sonia Ghandi) की रायबरेली सीट छोड़ने और राहुल के वायनाड से चुनाव लड़ने पर उम्मीद की जा रही थी कि यदि राहुल उत्तर प्रदेश में भी कहीं से चुनाव में उतरते हैं तो वह अमेठी सीट होगी। तब प्रियंका वाड्रा रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राहुल को रायबरेली से और अमेठी से किशोरी लाल शर्मा को उतारा गया। तब कांग्रेस से प्रियंका के बावत सवाल किया गया था। तब इसका जवाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने दिया था।
जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने कहा था, ‘प्रियंका गांधी तो कभी भी उपचुनाव लड़ सकती हैं। अभी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार करना है। इसलिए वे चुनाव नहीं लड़ रही हैं।’ तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि प्रियंका उपचुनाव लड़कर ही संसद पहुंचेंगी। जब राहुल गांधी वायनाड और रायबरेली दोनों सीटों से चुनाव जीत गए तो यह बात और साफ हो गई कि 18 वीं लोकसभा (18th Loksabha) में ही प्रियंका भी सांसद बनेंगी। लेकिन वे कहां से चुनाव लड़ेंगी यह साफ नहीं था। अब जब कि राहुल गांधी ने वायनाड सीट छोड़ने की घोषणा कर दी है तो प्रियंका वाड्रा को पार्टी ने वहां से अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया।
प्रियंका पार्टी के महासचिव, कांग्रेस वर्किंग कमिटी, पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी महासचिव, उत्तर प्रदेश प्रभारी जैसे पदों पर संगठन में काम करती रही है। वह वर्तमान में कांग्रेस महासचिव और वर्किंग कमेटी की सदस्य हैं। प्रियंका सबसे पहले 2004 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के प्रचार अभियान से जुड़ी थीं। उस चुनाव के बाद केंद्र मे कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार बनी थी। इसके पहले वह अनौपचारिक रूप से सोनिया गांधी की रायबरेली सीट पर चुनाव प्रचार का जिम्मा संभालती थीं।
उत्तर प्रदेश में सक्रिय रहीं हैं प्रियंका
कहा जाता है कि साल 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly Elections)में जब राहुल गांधी पार्टी के लिए राज्यव्यापी अभियान संभाल रहे थे तब प्रियंका अमेठी और रायबरेली की 10 विधानसभा सीटों पर अपना ध्यान केंद्रित की थीं। उस चुनाव में कांग्रेस की हार हुई थी। साल 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस-सपा गठबंधन कराने में प्रियंका वाड्रा की भूमिका अहम मानी जाती थी। उस चुनाव में भी राहुल-अखिलेश की जोड़ी को उत्तर प्रदेश मे नकार दिया था। उस चुनाव में भाजपा ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर 325 सीटें जीती थी। उसमें भाजपा ने अकेले 312 सीटें जीती थी। तब सपा 47 और कांग्रेस को 7 सीटें मिली थी।
अपने नेतृत्व में पार्टी को नहीं जीता पाई
इसके बाद प्रियंका ने उत्तर प्रदेश का पिछला विधानसभा चुनाव में भी खूब मेहनत की। प्रदेश में कांग्रेस वह चुनाव प्रियंका के नेतृत्व में लड़ा। 23 जनवरी 2019 को उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए पार्टी का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया गया। फिर 11 सितंबर 2020 को उन्हें पूरे उत्तर प्रदेश का प्रभारी महासचिव नियुक्त कर दिया गया। उस चुनाव में प्रियंका ने युवाओं और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित किया। उसमें 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने का वादा किया गया था। तब उन्होंने राज्य में ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ (I’m a girl, I can fight) का नारा दिया था। लेकिन उनका यह नारा तब नहीं चल पाया। उत्तर के उस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना। पार्टी को 403 विधानसभा सीटों में से सिर्फ दो सीट पर जीत मिल पाई।













