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PM Modi To Address The Nation: अनगिनत चुनौतियां हैं। चुनौतियां भीतर भी हैं। चुनौतियां बाहर भी हैं
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Friday, August 16, 2024
Last Updated On: Friday, August 16, 2024
भारत की कई उपलब्धियों के बीच देश की प्रगति को रोकने के लिए कुछ घरेलू और बाहरी ताकते साजिश रच रही है। ऐसा प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देशवासियों को बताया। इन ताकतों से सतर्क रहने को प्रधानमंत्री ने कहा।
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Friday, August 16, 2024
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज देश के 78 वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। देश के नाम अपने संबोधन में उन्होंने सरकार की उपलब्धियां के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं से भी अवगत कराया। मोदी सरकार (Modi Government) के कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था पांचवें नंबर पर आया है। अब इसे तीसरे नंबर पर लाने का लक्ष्य मोदी सरकार ने रखा है। लेकिन सरकार की इन उपलब्धियों के बीच देश की प्रगति को रोकने के लिए कुछ घरेलू और बाहरी ताकते साजिश रच रही है, ऐसा प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देशवासियों को बताया। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को ऐसे लोगों से बचने की सलाह भी दी।
देश का भला नहीं देख सकते
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘हम संकल्प के साथ बहुत आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन सच यह भी है कि कुछ लोग होते हैं जो प्रगति देख नहीं सकते हैं। वो भारत का भला सोच नहीं सकते हैं। जब तक उनका भला न हो, तब तक उनको किसी का भला अच्छा नहीं लगता है। ऐसे विकृत मानसिकता से भरे हुए लोगों की कमी नहीं होती है। देश को ऐसे लोगों से बचना होगा।
प्रधानमंत्री ने ऐसे लोगों को निराशा की गर्त में डूबा हुआ बताया है। ऐसे मुट्ठीभर निराशा की गर्त में डूबे हुए लोग जब उनके गोद में विकृति पलती है, तब वो विनाश का कारण बन जाती है। सर्वनाश का कारण बन जाती है। अराजकता का मार्ग ले लेती है। तब देश को इतनी बड़ी हानि हो जाती है, जिसकी भरपाई करने में हमें नये सिरे से मेहनत करनी पड़ती है।
आगे बढ़ने के संकल्प से नहीं हटेंगे
ऐसे जो छुट-पुट निराशावादी तत्व होते हैं, वो सिर्फ निराश हैं। उनकी गोद में विकृति पल रही है। यह विकृति विनाश के सर्वनाश के सपनें देख रही है। ताने-बाने जोड़ने के प्रयास में लगी है। देश को इसे समझना होगा। लेकिन मैं देशवासियों को कहना चाहता हूं कि हम अपनी नेक नियत से, ईमानादारी से, राष्ट्र के प्रति समर्पण से, इन परिस्थितियों के बावजूद विपरीत मार्ग पर जाने वालों के भी दिल जीत करके, हम देश को आगे बढ़ाने के संकल्प में कभी भी पीछे नहीं हटेंगे। यह मैं विश्वास देना चाहता हूं।
चुनौतियां भीतर भी, बाहर भी
प्रधानमंत्री ने साकार की चुनौतियों के बारे में जिक्र करते हुए कहा कि चुनौतियां हैं। अनगिनत चुनौतियां हैं। चुनौतियां भीतर भी हैं। चुनौतियां बाहर भी हैं। जैसे-जैसे हम ताकतवर बनेंगे। जैसे-जैसे हमारा तवज्जो बढ़ेगा तो चुनौतियां भी बढ़ने वाली हैं। बाहर की चुनौतियां और बढ़ने वाली हैं। मुझे उसका भलीभांति अंदाज है। लेकिन मैं ऐसी शक्तियों को कहना चाहता हूं भारत का विकास किसी के लिए संकट ले करके नहीं आता है।
भारत ने कभी दुनिया को युद्ध में नहीं झोंका
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम विश्व में समृद्ध तब भी थे। हमने (भारत ने) कभी दुनिया को युद्ध में नहीं झोंका है। हम बुद्ध का देश हैं। युद्ध हमारी राह नहीं है। इसलिए विश्व चिंतित न हो। भारत के आगे बढ़ने से मैं विश्व समुदाय को विश्वास दिलाता हूं कि आप भारत के संस्कारों को समझिए, भारत के हजारों साल के इतिहास को समझिए, आप हमें संकट मत मानिए, आप उन तरकीबों से न जुड़िए, जिसके कारण पूरी मानव जाति का कल्याण करने का सामर्थ्य जिस भूमि में है, उस भूमि को ज्यादा मेहनत करनी पड़े।
चुनौतियों को चुनौती देना भारत की फितरत
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से कहा कि चुनौतियां कितनी ही क्यों न हों, चुनौती को चुनौती देना, ये हिन्दुस्तान की फितरत में है। न हम डिगेंगे। न हम थकेंगे। न हम रुकेंगे। न हम झुकेंगे। हम संकल्पों की पूर्ति करने, 140 करोड़ देशवासियों का भाग्य बदलने, भाग्य सुनिश्चित करने, राष्ट्र के सपनों को साकार करने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। हर बदनीयत वालों को हम हमारी नेकनीयत से जीतेंगे। यह मैं विश्वास देता हूं।













