आरक्षण के भीतर आरक्षण (Reservation within Reservation), यह कैसी बनेगी रीत

Authored By: सतीश झा

Published On: Friday, August 2, 2024

Reservation within Reservation SC ST category
Reservation within Reservation SC ST category

मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात जजों की संविधान पीठ ने एससी-एसटी में कोटे के अंदर कोटे को मंजूरी दे दी है। यानी एससी-एसटी कोटे में उप-वर्गीकरण (Sub Categories) किया जा सकता है। सात जजों की संविधान पीठ ने ईवी चिन्नैया के 2004 के फैसले को पलट दिया, जिसमें अनुसूचित जातियों के भीतर कुछ उप-जातियों को विशेष लाभ देने से इनकार किया गया था।

Authored By: सतीश झा

Last Updated On: Friday, August 2, 2024

सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की बेंच ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है जिसमें अनुच्छेद 15 और 16 के संदर्भ में जातियों के उप-वर्गीकरण की अनुमति दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की बेंच ने 6-1 के बहुमत से फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी के अलावा अन्य छह जजों ने यह माना कि अनुच्छेद 15, 16 में ऐसा कुछ नहीं है, जो राज्य को किसी जाति को उपवर्गीकृत करने से रोकता हो। जस्टिस बीआर गवई ने अपने अलग लेकिन सहमति वाले फैसले में कहा कि राज्यों को SC-ST वर्गों से क्रीमी लेयर को भी बाहर करना चाहिए। अपने फैसले के समर्थ में उनकी तरफ से कहा गया कि अनुसूचित जाति के क्रीमी लेयर (संपन्न वर्ग) के बच्चों की तुलना गांव में मैला ढोने वाले अनुसूचित जाति के व्यक्ति के बच्चों से करना बेईमानी होगी।

जस्टिस बी आर गवई ने बाबा साहेब अंबेडकर का एक बयान पढ़ा कि-  इतिहास बताता है कि जब नैतिकता का सामना अर्थव्यवस्था से होता है, तो जीत अर्थव्यवस्था की होती है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि उपवर्गीकरण का आधार राज्य के सही आंकड़ों पर आधारित होना चाहिए, इस मामले में राज्य अपनी मर्जी से काम नहीं कर सकता।

आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में उप-वर्गीकरण की अनुमति दे दी गई है। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में सात जजों की संविधान पीठ ने सुनाया।

आरक्षण के भीतर आरक्षण (Reservation within Reservation) भारत में आरक्षण प्रणाली का एक विशेष पहलू है, जो विभिन्न जातियों, समुदायों या वर्गों के भीतर विशिष्ट उप-समूहों को आरक्षण देने की अवधारणा को संदर्भित करता है। यह विचार विशेष रूप से सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए अलग से आरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

ईवी चिन्नैया केस (2004)

इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जातियों के भीतर उप-जातियों को विशेष आरक्षण देने से इनकार किया था। अब, इस नए फैसले ने उस निर्णय को पलटते हुए एससी-एसटी के भीतर उप-वर्गीकरण को मान्यता दी है।

यह निर्णय अनुसूचित जातियों और जनजातियों के भीतर विशिष्ट उप-समूहों को आरक्षण के लाभ के लिए विशेष रूप से वर्गीकृत करने की अनुमति देता है। यह विशेष लाभ और सहायता उन उप-समूहों को प्राप्त होगी जो सामाजिक और आर्थिक रूप से अधिक असुविधाजनक स्थिति में हो सकते हैं।

विवाद और चुनौतियाँ:

अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के भीतर उप-श्रेणियाँ, जैसे अनुसूचित जातियों के भीतर कुछ जातियाँ या अनुसूचित जनजातियों के भीतर कुछ जनजातियाँ, जिन्हें विशिष्ट आरक्षण प्रदान किया जाता है। महाराष्ट्र में, यह अवधारणा अनुसूचित जातियों के भीतर विभिन्न उप-समूहों को आरक्षण देने के लिए लागू की गई है।

इस व्यवस्था को लेकर कई बार विवाद उत्पन्न होते हैं, क्योंकि इससे मुख्य रूप से आरक्षित वर्गों के भीतर असंतोष या असमानताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा, यह प्रणाली आरक्षण के लाभ को बिखरने और समाज के भीतर विभाजन को बढ़ाने का आरोप भी लगाती है।

लोकजनशक्ति पार्टी नहीं रखती है इससे इत्तेफाक

केंद्र की एनडीए सरकार (NDA Government) में शामिल लोकजनशक्ति पार्टी रामविलास गुट सुप्रीम कोर्ट के इस बात से सहमत नहीं है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि SC-ST श्रेणियों को सब-कैटेगरी में रिजर्वेशन वाले मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पक्षधर नहीं है।पार्टी के संस्थापक पद्म भूषण श्रद्धेय रामविलास पासवान जी भी इस बात की मांग करते आएं की जब तक समाज में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के खिलाफ छुआछूत जैसी प्रथा है तब तक SC-ST श्रेणियों को सब-कैटेगरी में आरक्षण और कृमिलेयर जैसे प्रावधान न हो। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह करती है की फैसले का पुर्नविचार किया जाए ताकि SC-ST समाज में भेदभाव न उत्पन्न हो और समाज को कमजोर न किया जा सके।

About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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