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विकास को लेकर मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने दी ये नई थ्योरी
Authored By: सतीश झा
Published On: Friday, July 19, 2024
Last Updated On: Friday, July 19, 2024
संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत झारखंड प्रवास पर थे। झारखंड सहित देश को विकास की नई दृष्टि से देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि मनुष्यों के बाद, कुछ लोग सुपरमैन बनना चाहते हैं, फिर वे ’देवता’, फिर ’भगवान’ और फिर ’विश्वरूप’ बनना चाहते हैं। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा हैकि अब सरसंघचालक के बयान के बाद इससे नया विमर्श शुरु होगा।
Authored By: सतीश झा
Last Updated On: Friday, July 19, 2024
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत झारखंड के गुमला में एक कार्यक्रम में गए। समाज और देश को लेकर उन्होंने कई सारी बातें कहीं। लेकिन, जैसे ही बात विकास की आई, तो उन्होंने नई थ्योरी दी।
सरसंघचालक ने कही ये बात
“मनुष्यों के बाद, कुछ लोग सुपरमैन बनना चाहते हैं, फिर वे ‘देवता’, फिर ‘भगवान’ और फिर ‘विश्वरूप’ बनना चाहते हैं।”
डॉ मोहन भागवत ने झारखंड के गुमला में एक गैर-लाभकारी संगठन विकास भारती द्वारा आयोजित ग्राम-स्तरीय कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि क्या प्रगति का कभी कोई अंत होता है? जब हम अपने लक्ष्य तक पहुंचते हैं, तो हम देखते हैं कि अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। उन्होंने कहा, ”देश के भविष्य को लेकर कोई संदेह नहीं है, अच्छी चीजें होनी चाहिए, इसके लिए सभी काम कर रहे हैं, हम भी प्रयास कर रहे हैं…”
विकासों का कोई अंत नहीं
सरसंघचालक ने कहा कि आंतरिक और बाह्य दोनों प्रकार के विकासों का कोई अंत नहीं है। यह एक सतत प्रक्रिया है और इसीलिए हमें हमेशा थोड़ा ‘अससमाधान’ (बिना समाधान) पर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहुत कुछ किया गया है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ बाकी है। एक कार्यकर्ता को यह सोचना चाहिए कि उसने बहुत कुछ किया है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ बाकी है क्योंकि और अधिक करने की गुंजाइश हमेशा रहती है… समाधान तभी निकलेगा जब लगातार विकास होता रहेगा। संघ प्रमुख ने कहा कि भारत के लोगों का अपना स्वभाव है और कई लोग बिना किसी नाम या प्रसिद्धि की इच्छा के देश के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं।













