Special Coverage
पंजाब कांग्रेस में सियासी खींचतान जारी, बघेल ने सुनी 92 नेताओं की बात, फैसला टला
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, July 11, 2026
Last Updated On: Saturday, July 11, 2026
पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा. भूपेश बघेल ने 92 नेताओं से लंबी बैठक कर उनकी नाराजगी सुनी, लेकिन कोई फैसला नहीं लिया. उन्होंने सभी मांगें पार्टी हाईकमान तक पहुंचाने का भरोसा दिया. अब सबकी नजर केंद्रीय नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, July 11, 2026
Punjab Congress Crisis: पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी विवाद फिलहाल खत्म होता नजर नहीं आ रहा. प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर उठे असंतोष ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इसी विवाद को सुलझाने के लिए पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल चंडीगढ़ पहुंचे, जहां उन्होंने करीब दो घंटे तक पार्टी के असंतुष्ट नेताओं से विस्तार से चर्चा की. बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा सहित कुल 92 नेताओं ने हिस्सा लिया. नेताओं ने अपनी चिंताएं खुलकर रखीं और संगठन में बदलाव की मांग दोहराई, लेकिन बैठक के बाद भी कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया.
राजा वडिंग की नेतृत्व क्षमता पर उठे सवाल
बैठक में शामिल नेताओं का मुख्य मुद्दा पंजाब कांग्रेस की मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था था. असंतुष्ट गुट का मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के नेतृत्व में आगामी विधानसभा चुनाव जीतना आसान नहीं होगा. नेताओं ने संगठन को मजबूत करने के लिए नए नेतृत्व की जरूरत पर जोर दिया. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य पार्टी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि उसे चुनावी रूप से अधिक मजबूत बनाना है. इस दौरान कई नेताओं ने जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी और संगठनात्मक कमियों का भी उल्लेख किया.
भूपेश बघेल ने सुनी शिकायतें, लेकिन फैसला टाला
बैठक के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि सभी नेताओं की बातें गंभीरता से सुनी गई हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश नेतृत्व से जुड़े फैसले पार्टी हाईकमान के स्तर पर लिए जाते हैं और प्रभारी होने के नाते वह अकेले कोई निर्णय नहीं कर सकते. उन्होंने नेताओं को भरोसा दिलाया कि उनकी सभी मांगों और सुझावों को केंद्रीय नेतृत्व तक पूरी गंभीरता के साथ पहुंचाया जाएगा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आगामी चुनाव में टिकट उसी उम्मीदवार को मिलेगा जिसकी जीत की संभावना सबसे मजबूत होगी. इस बयान को नेताओं को भरोसा दिलाने की कोशिश माना जा रहा है.
चन्नी और रंधावा ने दिया एकजुटता का संदेश
बैठक से पहले चरणजीत सिंह चन्नी ने मीडिया से बातचीत में संकेत दिया कि उनका गुट अपनी मांगों पर कायम रहेगा और आगे की रणनीति परिस्थिति के अनुसार तय करेगा. वहीं बैठक समाप्त होने के बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि चर्चा सकारात्मक माहौल में हुई और सभी नेताओं को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिला. उन्होंने कहा कि पंजाब में कांग्रेस की वापसी तभी संभव है जब संगठन मजबूत हो और कठिन फैसले समय रहते लिए जाएं. उनके अनुसार पार्टी को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जिस पर कार्यकर्ताओं और जनता दोनों का भरोसा हो.
2027 चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
पंजाब में वर्ष 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं. ऐसे समय में संगठन के भीतर चल रही खींचतान कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन सकती है. हाल ही में पार्टी ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने और चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार अभियान समिति की जिम्मेदारी देने का फैसला किया था. अब सवाल यह है कि क्या हाईकमान असंतुष्ट नेताओं की मांगों पर कोई नया निर्णय लेगा या मौजूदा व्यवस्था के साथ ही चुनावी तैयारी आगे बढ़ेगी. फिलहाल इतना तय है कि पंजाब कांग्रेस में मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और आने वाले दिनों में हाईकमान की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है.
यह भी पढ़ें :- E20 के बाद अब E25, E30 और E85 की तैयारी, पेट्रोल में बड़े बदलाव की राह पर भारत, जानिए आपकी गाड़ी पर क्या होगा असर















