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Jagannath Temple Ratna Bhandar: 48 साल बाद खुला जगन्नाथ मंदिर रत्न भंडार का रहस्य, सामने आएगा सोना चांदी और रत्नों का सच
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, March 27, 2026
Last Updated On: Friday, March 27, 2026
Jagannath Temple Ratna Bhandar: पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की 48 साल बाद शुरू हुई जांच से सदियों पुराना रहस्य खुलने की उम्मीद है. इस खजाने में राजाओं और शासकों द्वारा दान किए गए सोना, चांदी और रत्न शामिल हैं, जिसकी पूरी जानकारी अब सामने आ सकती है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, March 27, 2026
Jagannath Temple Ratna Bhandar: ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर एक बार फिर चर्चा में है, और वजह है इसका रहस्यमयी रत्न भंडार. करीब 48 साल बाद इस खजाने की गिनती और जांच की प्रक्रिया शुरू हुई है, जिससे सदियों से छिपे रहस्यों पर से पर्दा उठने की उम्मीद है. अब अधिकारियों की निगरानी में सोना, चांदी और कीमती रत्नों का पूरा हिसाब तैयार किया जा रहा है. लोगों के मन में हमेशा सवाल रहा है कि आखिर इस भंडार में कितना खजाना है और यह कहां से आया. शुभ मुहूर्त में शुरू हुई इस प्रक्रिया से मंदिर के इतिहास का एक नया अध्याय सामने आ सकता है.
राजाओं की भक्ति या खजाने की कहानी?
इतिहासकार बताते हैं कि इस भव्य मंदिर की नींव 12वीं सदी में गंग वंश के राजा अनंतवर्मन देव ने रखी थी, जिसे बाद में अन्य शासकों ने पूरा किया. समय के साथ कई राजाओं ने अपनी श्रद्धा दिखाते हुए मंदिर को सोना और रत्न दान किए. खासतौर पर राजा अनंगभीम देव और सूर्यवंशी शासकों ने मंदिर को अपार संपत्ति दी. 15वीं सदी में कपिलेंद्र देव ने तो इतना दान दिया कि कहा जाता है, हाथियों पर लादकर खजाना मंदिर तक पहुंचाया गया. यही वजह है कि आज रत्न भंडार को लेकर लोगों की जिज्ञासा और भी बढ़ जाती है.
कोहिनूर से जुड़ा नाम और अनोखी परंपरा
इस खजाने की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ स्थानीय ही नहीं, बल्कि दूर-दूर के शासकों का योगदान भी शामिल है. सिख साम्राज्य के महाराजा रणजीत सिंह ने भी मंदिर के लिए सोना दान किया था और अपनी वसीयत में कोहिनूर हीरा अर्पित करने की इच्छा जताई थी. इन दानों की वजह से मंदिर में ‘सुना बेशा’ जैसी परंपरा शुरू हुई, जिसमें भगवान को सोने के आभूषणों से सजाया जाता है. यही परंपरा इस खजाने को सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि आस्था और इतिहास का प्रतीक बनाती है.
हमले, रहस्य और दो हिस्सों में बंटा खजाना
इतिहास गवाह है कि इस खजाने पर कई बार हमले भी हुए. अफगान और मुगल काल में लूट की कोशिशें हुईं, लेकिन मंदिर की संपत्ति को बचाने के लिए कई उपाय किए गए. रत्न भंडार दो हिस्सों में बंटा है—एक बाहरी कक्ष, जहां पूजा से जुड़ी चीजें रखी जाती हैं, और दूसरा अंदरूनी कक्ष, जहां असली खजाना सुरक्षित माना जाता है. यही अंदरूनी हिस्सा आज भी सबसे बड़ा रहस्य बना हुआ है. अब जब जांच शुरू हो चुकी है, तो आने वाले समय में यह साफ हो सकता है कि सदियों से छिपा यह खजाना कितना विशाल और अनोखा है.
















