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Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी का पावन पर्व पितृ दोष से मुक्ति के उपाय, जानें पूजा विधि, डेट और महत्व
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, April 20, 2026
Last Updated On: Monday, April 20, 2026
Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और आस्था से जुड़ा हुआ पर्व है, जिसे हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है. साल 2026 में यह शुभ दिन 23 अप्रैल 2026 को पड़ रहा है. इस दिन को “गंगा जयंती” भी कहा जाता है, [...]
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, April 20, 2026
Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और आस्था से जुड़ा हुआ पर्व है, जिसे हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है. साल 2026 में यह शुभ दिन 23 अप्रैल 2026 को पड़ रहा है. इस दिन को “गंगा जयंती” भी कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी तिथि पर मां गंगा का पुनः प्राकट्य हुआ था. धार्मिक दृष्टि से यह दिन इतना खास माना जाता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म व्यक्ति को कई जन्मों तक शुभ फल देते हैं और जीवन में सुख-शांति लाते हैं.
कब है गंगा सप्तमी 2026? जानें सही तिथि और मुहूर्त
गंगा सप्तमी का पर्व उदयातिथि के अनुसार मनाया जाता है, इसलिए इस बार यह 23 अप्रैल को मनाया जाएगा.
- सप्तमी तिथि की शुरुआत: 22 अप्रैल 2026, रात 10:49 बजे
- सप्तमी तिथि समाप्त: 23 अप्रैल 2026, रात 8:49 बजे
मुख्य शुभ समय:
- मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक
- स्नान का शुभ समय: सुबह 5:48 बजे से 7:26 बजे तक
यह समय पूजा, स्नान और दान-पुण्य के लिए विशेष फलदायी माना जाता है.
पितृ दोष से मुक्ति का श्रेष्ठ दिन क्यों?
गंगा सप्तमी को पितरों की शांति और मोक्ष के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने और तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.
जो लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति चाहते हैं, उनके लिए यह दिन किसी वरदान से कम नहीं है. इस दिन किया गया तर्पण और दान पितरों को तृप्त करता है और उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं.
गंगा सप्तमी की पौराणिक कथा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां गंगा का जन्म ब्रह्मा जी के कमंडल से हुआ था. कहा जाता है कि वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन ही उनका पुनः प्राकट्य हुआ था. मां गंगा ने अपने पवित्र जल से भगवान विष्णु की वंदना की और फिर स्वर्ग में अपना स्थान प्राप्त किया.
स्कंद पुराण और पद्म पुराण में भी इस दिन के महत्व का वर्णन मिलता है. इन ग्रंथों के अनुसार, गंगा स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि गंगा सप्तमी को आध्यात्मिक शुद्धि का पर्व माना जाता है.
गंगा सप्तमी पर क्या करें? (पूजा विधि और उपाय)
इस दिन कुछ विशेष कार्य करने से कई गुना अधिक पुण्य फल मिलता है
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. संभव हो तो गंगा नदी में स्नान करें, नहीं तो घर के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
- स्नान के बाद मां गंगा की विधिपूर्वक पूजा करें और उन्हें फूल, दीप, धूप और नैवेद्य अर्पित करें.
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र या गंगा स्तोत्र का जाप करें, इससे विशेष लाभ मिलता है.
- पितरों की शांति के लिए तर्पण अवश्य करें.
- जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें.
- शाम के समय दीपदान करें, यह आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाता है.
गंगा सप्तमी पर क्या न करें?
इस पवित्र दिन कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है
- गंगा नदी या किसी भी जल स्रोत को गंदा न करें, जैसे कचरा या प्लास्टिक डालना.
- मांसाहार और शराब का सेवन न करें.
- झूठ बोलने, क्रोध करने या किसी का अपमान करने से बचें.
- घर में कलह या विवाद से दूर रहें और शांति बनाए रखें.
हरिद्वार में गंगा उत्सव की रौनक
गंगा सप्तमी के दिन विशेष रूप से हरिद्वार में भव्य उत्सव मनाया जाता है. ढोल-नगाड़ों के साथ मां गंगा की शोभायात्रा निकाली जाती है और श्रद्धालु बड़ी संख्या में गंगा स्नान करते हैं. इस दिन का माहौल पूरी तरह भक्तिमय और ऊर्जा से भरपूर होता है, जो हर किसी को आध्यात्मिक अनुभव कराता है.
निष्कर्ष: क्यों खास है गंगा सप्तमी?
गंगा सप्तमी सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का अवसर है. इस दिन मां गंगा की पूजा, स्नान और दान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है. अगर आप भी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव और पितृ दोष से मुक्ति चाहते हैं, तो गंगा सप्तमी 2026 का यह पावन दिन जरूर याद रखें.
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