Ashadha Amavasya 2026: कब है आषाढ़ अमावस्या? पितरों को प्रसन्न, जानें शुभ उपाय, महत्व और पूजा विधि

Authored By: Nishant Singh

Published On: Tuesday, June 30, 2026

Last Updated On: Tuesday, June 30, 2026

Ashadha Amavasya 2026 पूजा करते श्रद्धालु, पितरों के लिए तर्पण, दान और आषाढ़ अमावस्या की पूजा विधि
Ashadha Amavasya 2026 पूजा करते श्रद्धालु, पितरों के लिए तर्पण, दान और आषाढ़ अमावस्या की पूजा विधि

Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धापूर्वक किए गए इन उपायों से पितृ दोष शांत होता है तथा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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Last Updated On: Tuesday, June 30, 2026

Ashadha Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों के स्मरण, तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है. वर्ष 2026 में आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई, मंगलवार को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है. श्रद्धापूर्वक तर्पण, पिंडदान और दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है.

आषाढ़ अमावस्या 2026: तिथि और शुभ समय

इस वर्ष अमावस्या तिथि 13 जुलाई 2026 को शाम 6:49 बजे से प्रारंभ होगी और 14 जुलाई 2026 को दोपहर 3:12 बजे तक रहेगी. व्रत और पूजा 14 जुलाई, मंगलवार को की जाएगी. इस दौरान स्नान, तर्पण, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व माना गया है.

क्यों खास मानी जाती है यह अमावस्या?

धार्मिक मान्यता है कि आषाढ़ अमावस्या पर किए गए तर्पण और दान का पुण्य सीधे पितरों तक पहुंचता है. इसलिए इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान कर अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण करते हैं और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान देते हैं. मान्यता है कि इससे पितृ दोष शांत होता है और परिवार पर पूर्वजों की कृपा बनी रहती है.

पितरों की शांति के लिए करें ये उपाय

यदि आप आषाढ़ अमावस्या पर पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो इन धार्मिक उपायों को श्रद्धापूर्वक कर सकते हैं.

मुख्य उपाय:

  • सुबह स्नान के बाद पितरों के नाम से तिल मिला जल अर्पित करें.
  • पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
  • काले तिल, अन्न, वस्त्र और अपनी क्षमता अनुसार दक्षिणा का दान करें.
  • किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं.
  • गाय, कौवे और कुत्ते को भोजन अवश्य खिलाएं.
  • “ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें.
  • संभव हो तो योग्य विद्वान की सहायता से पितृ तर्पण या श्राद्ध कर्म भी करवाएं.

पीपल पूजा और दान का महत्व

धार्मिक ग्रंथों में आषाढ़ अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि पीपल में देवताओं और पितरों का वास होता है. इसलिए इस दिन दीपदान करने और वृक्ष की परिक्रमा करने से शुभ फल प्राप्त होता है. साथ ही अन्नदान और जरूरतमंदों की सहायता करने से जीवन की कई परेशानियां दूर होने की मान्यता भी है.

क्या मिल सकते हैं धार्मिक लाभ?

धार्मिक विश्वास के अनुसार आषाढ़ अमावस्या पर श्रद्धा से किए गए उपायों से पितृ दोष की शांति मिलती है. परिवार में चल रही रुकावटें कम होती हैं, मानसिक तनाव घटता है और घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है. साथ ही आर्थिक स्थिरता और पारिवारिक खुशहाली में भी वृद्धि होने की मान्यता है. जिन लोगों के कार्य लंबे समय से अटके हुए हैं, वे भी इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा-अर्चना कर पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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