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Mohini Ekadashi 2026 Date: मोहिनी एकादशी 2026 कब? जानें सही तारीख, पूजा मुहूर्त, विधि, कथा और व्रत पारण
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, April 17, 2026
Last Updated On: Friday, April 17, 2026
Mohini Ekadashi 2026 Date: मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी, जो मोह और नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक है. इस दिन व्रत और पूजा करने से बुद्धि, विवेक और सही निर्णय की शक्ति मिलती है. विधि-विधान से पूजा और दान करने पर पापों से छुटकारा और शुभ फल प्राप्त होता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, April 17, 2026
Mohini Ekadashi 2026 Date: हर साल की तरह इस बार भी मोहिनी एकादशी की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि व्रत 26 अप्रैल को रखा जाए या 27 अप्रैल को. धार्मिक पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 26 अप्रैल 2026 की शाम 6:06 बजे से शुरू होकर 27 अप्रैल 2026 की शाम 6:15 बजे तक रहेगी. लेकिन उदया तिथि के आधार पर व्रत और पूजा 27 अप्रैल 2026, सोमवार को ही करना शुभ और मान्य माना गया है. इसलिए अगर आप व्रत रखना चाहते हैं, तो 27 अप्रैल की तारीख नोट कर लें.
मोहिनी एकादशी का महत्व: क्यों खास है ये दिन
मोहिनी एकादशी भगवान भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार को समर्पित है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं और असुरों के बीच अमृत का वितरण किया था. यह दिन जीवन के मोह, भ्रम और बुरी आदतों से छुटकारा पाने का प्रतीक माना जाता है.
कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से हजार यज्ञ और गौदान के बराबर पुण्य मिलता है. साथ ही व्यक्ति के जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने का मार्ग मिलता है. यह केवल धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और मानसिक संतुलन का अवसर भी है.
पूजा मुहूर्त और तिथि का सही समय
अगर आप सही समय पर पूजा करना चाहते हैं, तो यह मुहूर्त ध्यान में रखें. एकादशी तिथि 26 अप्रैल शाम से शुरू जरूर हो रही है, लेकिन पूजा और व्रत 27 अप्रैल को ही रखा जाएगा.
पूजा का शुभ समय:
सुबह 9:02 बजे से 10:40 बजे तक
यह समय भगवान विष्णु की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है. इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने पर व्रत का पूरा फल मिलता है.
व्रत पारण कब करें?
एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 28 अप्रैल 2026 को किया जाएगा.
पारण का समय: सुबह 5:43 बजे से 8:21 बजे तक
ध्यान रखें कि पारण समय के भीतर ही व्रत खोलना चाहिए, तभी व्रत पूर्ण माना जाता है. द्वादशी तिथि शाम 6:51 बजे तक रहेगी, इसलिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त है.
पूजा विधि: कैसे करें सही तरीके से आराधना
मोहिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें. घर के मंदिर में एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
इसके बाद उन्हें जल से स्नान कराएं और पीले वस्त्र अर्पित करें. चंदन का तिलक लगाएं और धूप-दीप जलाकर पूजा शुरू करें. तुलसी दल, फल, नारियल और मिठाई अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है.
पंचामृत चढ़ाकर भगवान की आरती करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें. विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से विशेष फल मिलता है. पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों को दान देना और भोजन कराना इस दिन की सबसे बड़ी सेवा मानी जाती है.
मोहिनी एकादशी की कथा: बदल सकती है जीवन की दिशा
पुराणों में एक कथा मिलती है जिसमें एक राजा का पुत्र गलत संगति में पड़कर पाप कर्मों में लिप्त हो गया था. परेशान होकर राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया. भटकते हुए वह एक ऋषि के आश्रम पहुंचा, जहां उसे मोहिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी गई.
जब उसने सच्चे मन से यह व्रत किया, तो उसके जीवन में बड़ा परिवर्तन आया. उसके पाप खत्म हुए और वह एक नया, सकारात्मक जीवन जीने लगा. यह कहानी हमें सिखाती है कि सही समय पर लिया गया निर्णय और किया गया एक अच्छा कर्म पूरी जिंदगी बदल सकता है.
क्या सीख देती है मोहिनी एकादशी?
मोहिनी एकादशी केवल व्रत नहीं, बल्कि जीवन की एक गहरी सीख है. यह हमें बताती है कि केवल ताकत ही नहीं, बल्कि समझदारी और सही समय पर लिया गया निर्णय भी उतना ही जरूरी है.
जीवन में कई बार परिस्थितियां उलझी हुई होती हैं, लेकिन अगर इंसान धैर्य और बुद्धिमत्ता से काम ले, तो हर संकट को अवसर में बदला जा सकता है. यही इस एकादशी का असली संदेश है मोह से मुक्त होकर सही रास्ता चुनना ही असली जीत है.
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