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Narasimha Jayanti 2026: नरसिंह जयंती 2026 कब है, जानें तारीख, मुहूर्त, पूजा विधि और नरसिंह अवतार का महत्व पूरी जानकारी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, April 23, 2026
Last Updated On: Thursday, April 23, 2026
Narasimha Jayanti 2026: नरसिंह जयंती 2026 इस बार 30 अप्रैल को मनाई जाएगी. यह पर्व भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की स्मृति में होता है, जब उन्होंने अधर्म का नाश कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी. इस दिन पूजा से भय दूर होता है, शक्ति बढ़ती है और जीवन की बाधाएं समाप्त होती हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Thursday, April 23, 2026
Narasimha Jayanti 2026: हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के अवतारों का विशेष महत्व माना जाता है, और उन्हीं में से एक है उनका उग्र लेकिन भक्तों की रक्षा करने वाला स्वरूप – नरसिंह अवतार. साल 2026 में नरसिंह जयंती 30 अप्रैल को मनाई जाएगी. यह पर्व वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान ने आधे मनुष्य और आधे शेर के रूप में प्रकट होकर अधर्म का नाश किया था. यह दिन भक्ति, साहस और धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है.
नरसिंह जयंती 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
इस वर्ष चतुर्दशी तिथि 29 अप्रैल 2026 को रात 7:51 बजे शुरू होगी और 30 अप्रैल 2026 को रात 9:12 बजे समाप्त होगी. ऐसे में 30 अप्रैल को नरसिंह जयंती मनाना शुभ रहेगा.
- सायंकाल पूजा का समय: शाम 4:17 से 6:56 तक
- मध्याह्न संकल्प का समय: सुबह 10:59 से दोपहर 1:38 तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान नरसिंह का प्रकट होना सूर्यास्त के समय हुआ था, इसलिए संध्या काल में पूजा करना सबसे फलदायी माना जाता है.
नरसिंह अवतार की कथा और महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब अत्याचारी हिरण्यकशिपु ने पूरे संसार में आतंक फैला दिया था और अपने ही पुत्र भक्त प्रह्लाद को सताया, तब भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर उसका अंत किया. यह अवतार न तो पूर्ण मनुष्य था और न ही पूर्ण पशु, जिससे वह किसी भी वरदान के दायरे में नहीं आता था.
नरसिंह भगवान का यह रूप हमें सिखाता है कि जब भी अधर्म बढ़ता है, तब ईश्वर किसी न किसी रूप में प्रकट होकर धर्म की रक्षा करते हैं. यह पर्व हमें साहस, विश्वास और सच्चाई पर टिके रहने की प्रेरणा देता है.
नरसिंह जयंती की पूजा विधि
नरसिंह जयंती का व्रत और पूजा पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ की जाती है.
- व्रत से एक दिन पहले यानी त्रयोदशी को केवल एक बार भोजन करना चाहिए.
- जयंती के दिन चावल, गेहूं जैसे अनाज का सेवन वर्जित माना जाता है.
- इस दिन व्रत एकादशी की तरह नियमपूर्वक रखा जाता है.
- दोपहर में संकल्प लेना शुभ माना जाता है.
- शाम के समय भगवान नरसिंह की विधि-विधान से पूजा करें.
- रात्रि में जागरण और भजन-कीर्तन करना बेहद फलदायी होता है.
- अगले दिन सुबह पूजा के बाद ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देकर व्रत पूर्ण करें.
यह पूरी प्रक्रिया मन को शुद्ध करने और ईश्वर से जुड़ने का एक माध्यम बनती है.
नरसिंह भगवान का मंत्र और उसका प्रभाव
नरसिंह जयंती के दिन मंत्र जाप करने से विशेष लाभ मिलता है. एक सरल मंत्र है:
‘नैवेद्यं शर्करां चापि भक्ष्यभोज्यसमन्वितम्.
ददामि ते रमाकांत सर्वपापक्षयं कुरु.’
इस मंत्र का अर्थ है कि भक्त भगवान को भोग अर्पित करते हुए अपने सभी पापों के नाश की प्रार्थना करता है. नियमित जाप से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.
नरसिंह जयंती का आध्यात्मिक महत्व और लाभ
नरसिंह भगवान केवल बाहरी बुराइयों का ही नहीं, बल्कि हमारे भीतर के डर, अहंकार और क्रोध जैसे दोषों का भी नाश करने वाले माने जाते हैं. उनकी पूजा करने से जीवन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है.
ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से इस दिन व्रत और पूजा करता है, उसे शत्रुओं का भय नहीं रहता और जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं. अधूरे कार्य पूरे होते हैं और मन में नई ऊर्जा का संचार होता है.
क्यों खास है यह दिन?
नरसिंह जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह हमें यह सिखाने का दिन है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी विश्वास और धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए. यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जब इंसान अपने धर्म और सच्चाई पर अडिग रहता है, तो ईश्वर स्वयं उसकी रक्षा के लिए आते हैं.
इस तरह नरसिंह जयंती 2026 सिर्फ पूजा और व्रत का दिन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव भी है.














