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रीत वही पुरानी ! पार्टी छोड़ते ही AAP को कहा भला-बुरा कैलाश गहलोत
Authored By: सतीश झा
Published On: Monday, November 18, 2024
Last Updated On: Monday, November 18, 2024
कई बार खुद को AAP नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का 'हनुमान' बताने वाले कैलाश गहलोत ने जब आम आदमी पार्टी को छोड़ा, तो पुरानी रीत पर ही चले। हनुमान को भले ही अपने राम में कोई खोट कभी नहीं दिखा हो, लेकिन 'सियासत के हनुमान' को अब अपने 'राम' पुराने लगते हैं। 'राम' के साथ जो भी लोग हैं, उन्हें सुहाते नहीं और न ही उनकी नीति सही लगती है।
Authored By: सतीश झा
Last Updated On: Monday, November 18, 2024
नजफगढ़ से विधायक और दिल्ली सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले कैलाश गहलोत (Kailash Gehlot) ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। भाजपा मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और महासचिव दुष्यंत गौतम की उपस्थिति में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
रविवार को कैलाश गहलोत ने आम आदमी पार्टी (AAP) की प्राथमिक सदस्यता और मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। भाजपा में उनका स्वागत करते हुए मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) ने कहा कि यह दिल्ली की राजनीति का एक अहम मोड़ है। उन्होंने कहा कि गहलोत ने आप की नकारात्मक राजनीति को छोड़कर मोदी सरकार की सकारात्मक और विकासवादी नीतियों को अपनाया है। यह कदम निश्चित रूप से आगामी चुनावों में भाजपा को मजबूती देगा।
#दिल्ली– आम आदमी पार्टी और #दिल्ली_सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले नजफगढ़ से विधायक #कैलाश_गहलोत आज #भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने पार्टी मुख्यालय में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। कैलाश गहलोत ने कल #आप की प्राथमिक सदस्यता और मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।#KailashGahlot… pic.twitter.com/AAaEEqIq25
— Galgotias Times (@galgotiastimes) November 18, 2024
गहलोत ने अपने फैसले पर दी सफाई
कैलाश गहलोत ने कहा, “अगर सरकार छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई में समय बर्बाद करे, तो जनता के लिए काम नहीं हो सकता। दिल्ली का विकास तभी संभव है जब केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम किया जाए। मैंने दिल्ली की भलाई के लिए यह निर्णय लिया है।”
उन्होंने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होना उनके लिए आसान निर्णय नहीं था। गहलोत ने स्पष्ट किया, “कुछ लोगों को लगता है कि मैंने यह कदम दबाव में उठाया है, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। मैंने लंबे समय तक सोच-विचार कर यह फैसला लिया। सीबीआई और ईडी के दबाव का आरोप एक राजनीतिक साजिश है।”
आप पर निशाना साधते हुए कहा
गहलोत ने आप पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी अब अपने मूल्यों से भटक गई है। “अन्ना आंदोलन से जुड़े हमारे सपनों और सिद्धांतों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। जनता की सेवा का जो सपना हमने देखा था, वह टूट चुका है। ऐसे में पार्टी में बने रहना मेरे लिए संभव नहीं था,” उन्होंने कहा।
कैलाश गहलोत के इस कदम को दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो भाजपा को आगामी चुनावों में बढ़त दिलाने में मदद कर सकता है।














