असम, केरल और पुडुचेरी में 296 सीटों पर मतदान आज, 6 करोड़ मतदाता तय करेंगे उम्मीदवारों की किस्मत

Authored By: Nishant Singh

Published On: Thursday, April 9, 2026

Updated On: Thursday, April 9, 2026

Assam Kerala Puducherry Voting Day: में 296 सीटों पर आज मतदान, भारी संख्या में मतदाता लोकतंत्र के इस पर्व में ले रहे हिस्सा.

Assam Kerala Puducherry Voting Day: असम, केरल और पुडुचेरी में आज 296 सीटों पर मतदान हो रहा है, जहां करीब 6 करोड़ मतदाता 1899 उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे. कड़ी सुरक्षा के बीच वोटिंग जारी है और सभी की नजरें 4 मई को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हुई हैं.

Authored By: Nishant Singh

Updated On: Thursday, April 9, 2026

Assam Kerala Puducherry Voting Day: आज देश में लोकतंत्र का बड़ा उत्सव देखने को मिल रहा है, जहां असम, केरल और पुडुचेरी में एक साथ मतदान हो रहा है. सुबह से ही मतदान केंद्रों पर हलचल बढ़ने लगी है और लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं. इन तीनों जगहों पर कुल 296 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं, जिनमें असम की 126, केरल की 140 और पुडुचेरी की 30 सीटें शामिल हैं. इस चुनाव की खास बात यह है कि करीब 6 करोड़ मतदाता आज 1899 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे. चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे, जिससे यह साफ हो जाएगा कि जनता ने किसे अपना प्रतिनिधि चुना है.

आंकड़ों में छिपी चुनावी तस्वीर

अगर इस चुनाव को आंकड़ों के नजरिए से देखें तो यह काफी बड़ा और अहम मुकाबला बन जाता है. तीनों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में कुल 1899 उम्मीदवार मैदान में हैं. इनमें असम में 722, केरल में 863 और पुडुचेरी में 294 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. मतदाताओं की संख्या भी बेहद प्रभावशाली है करीब 6 करोड़ लोग इस चुनावी प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं. इतने बड़े स्तर पर मतदान का मतलब है कि हर एक वोट की अहमियत और जिम्मेदारी दोनों बढ़ जाती हैं. यही वजह है कि चुनाव आयोग ने सभी जगहों पर व्यापक तैयारी की है ताकि मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके.

असम: सियासी जंग और मजबूत दावेदारी

असम में इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प माना जा रहा है. यहां कुल 2.50 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है. राज्य में बहुमत का आंकड़ा 64 सीटों का है. पिछले एक दशक से यहां बीजेपी की सरकार है और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा इस बार भी मजबूत दावेदार के रूप में सामने हैं. दूसरी ओर, कांग्रेस के गौरव गोगोई अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने और पार्टी को सत्ता में वापस लाने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं. कई सीटें ऐसी हैं जहां मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है, और इन पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं. महिला मतदाताओं का बढ़ता रुझान इस चुनाव में बड़ा फैक्टर बन सकता है.

केरल: पारंपरिक मुकाबले में नई चुनौती

केरल में हमेशा की तरह इस बार भी मुकाबला दिलचस्प है, लेकिन इसमें कुछ नए समीकरण भी जुड़ गए हैं. राज्य में कुल 2.7 करोड़ मतदाता हैं और बहुमत का आंकड़ा 71 सीटों का है. यहां एलडीएफ और यूडीएफ के बीच पारंपरिक टक्कर देखने को मिलती रही है, लेकिन अब एनडीए भी तेजी से अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. वर्तमान मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ सरकार दोबारा सत्ता में आने की कोशिश कर रही है, जबकि विपक्ष पूरी ताकत से चुनौती दे रहा है. खास बात यह है कि यहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है. राज्य में हजारों पोलिंग बूथ बनाए गए हैं, जहां सुरक्षा और सुविधाओं का खास ध्यान रखा गया है.

पुडुचेरी: छोटे राज्य में बड़ा मुकाबला

पुडुचेरी भले ही आकार में छोटा हो, लेकिन यहां की सियासत भी कम दिलचस्प नहीं है. कुल 9.44 लाख मतदाता आज अपने वोट का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें महिला मतदाता थोड़ी अधिक हैं. यहां बहुमत का आंकड़ा 16 सीटों का है और कुल 294 उम्मीदवार मैदान में हैं. पिछली बार एनडीए ने बढ़त हासिल की थी और सत्ता में आई थी, जबकि यूपीए को विपक्ष में बैठना पड़ा था. इस बार भी दोनों गठबंधनों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है. सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि मतदान प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके.

नतीजों पर टिकी देश की नजर

आज का दिन भले ही मतदान का है, लेकिन असली तस्वीर 4 मई को सामने आएगी, जब चुनाव परिणाम घोषित होंगे. इन तीनों क्षेत्रों के नतीजे न सिर्फ स्थानीय राजनीति बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकते हैं. जनता किसे सत्ता सौंपती है और किसे विपक्ष में बैठाती है, यह आने वाले समय की राजनीतिक दिशा तय करेगा. फिलहाल, देश की नजरें मतदान प्रतिशत और जनता के उत्साह पर टिकी हुई हैं, जो लोकतंत्र की मजबूती का सबसे बड़ा संकेत है.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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