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मोदी कैबिनेट का रेयर अर्थ मैग्नेट पर बड़ा दांव, चीन को सीधी चुनौती
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Wednesday, November 26, 2025
Last Updated On: Wednesday, November 26, 2025
मोदी कैबिनेट ने रेयर अर्थ मैग्नेट की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए 7,280 करोड़ की मेगा स्कीम को मंजूरी दे दी है. चीन के दबदबे को सीधी टक्कर देने वाली यह योजना भारत में पहली बार पूरी REPM प्रोडक्शन चेन स्थापित करेगी, जिससे आयात निर्भरता कम होने के साथ उभरते सेक्टरों में आत्मनिर्भरता को बड़ा सहारा मिलेगा.
Authored By: Ranjan Gupta
Last Updated On: Wednesday, November 26, 2025
Modi Cabinet Strategy: भारत ने चीन के वैश्विक दबदबे को चुनौती देने की दिशा में आज निर्णायक कदम उठा लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में देश की पहली रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी मिली है, जिसके लिए सरकार ने 7,280 करोड़ रुपये का विशाल पैकेज तय किया है. यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब चीन दुनिया के लगभग 60-70% रॉ रेयर अर्थ का उत्पादन करता है और 90% से ज्यादा प्रोसेसिंग पर उसका नियंत्रण है. ऐसी स्थिति में भारत अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने, भविष्य की तकनीक में आत्मनिर्भर बनने और वैश्विक वैल्यू चेन में मजबूत स्थान हासिल करने की दिशा में आक्रामक कदम बढ़ा रहा है.
यह योजना न सिर्फ भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा उपकरण जैसे हाई-टेक सेक्टरों में मजबूत बनाएगी, बल्कि देश में पहली बार रेयर अर्थ ऑक्साइड्स से लेकर धातु, मिश्रधातु और फ़ाइनल मैग्नेट निर्माण तक की पूर्ण वैल्यू चेन स्थापित करेगी.
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स क्यों जरूरी हैं?
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स दुनिया के सबसे ताकतवर मैग्नेट्स में गिने जाते हैं. इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर और विंड एनर्जी, मोबाइल और लैपटॉप जैसे गैजेट्स, एयरोस्पेस और डिफेंस सिस्टम में होता है. ये मैग्नेट कई हाई-टेक उपकरणों की रीढ़ माने जाते हैं. सरकार की नई योजना का लक्ष्य है कि देश में पूरी उत्पादन चेन तैयार की जाए यानी रेयर अर्थ ऑक्साइड्स से लेकर धातु, धातु से मिश्रधातु और फिर तैयार मैग्नेट तक. इससे एक ही जगह पूरी प्रक्रिया बन जाएगी, जो अभी भारत में मौजूद नहीं है.
2030 तक मांग दोगुनी होने की संभावना
भारत में इन मैग्नेट्स की मांग हर साल बढ़ रही है. अनुमान है कि 2025 की तुलना में 2030 तक यह मांग लगभग दोगुनी हो जाएगी. अभी स्थिति यह है कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है. नई योजना से पहली बार देश में पूरी REPM मैन्युफैक्चरिंग लाइन खड़ी होगी. इससे रोजगार बढ़ेगा, घरेलू कंपनियों को मजबूती मिलेगी और विदेशी निर्भरता कम होगी. यह कदम भारत की Net Zero 2070 की प्रतिबद्धता को भी आगे बढ़ाएगा, क्योंकि ये मैग्नेट क्लीन एनर्जी सेक्टर में बहुत जरूरी होते हैं.
इंपोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर है भारत
फिलहाल भारत रेयर अर्थ मैग्नेट्स के लिए विदेशों पर काफी निर्भर है. देश में प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग की क्षमता अभी सीमित है. सरकार का मानना है कि इंसेंटिव सिस्टम से इस क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा. इससे प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग और मैग्नेट बनाने की नई क्षमता विकसित होगी. यह योजना सरकार की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा भी है, जिसमें जरूरी मिनरल सप्लाई चेन को सुरक्षित करना और भविष्य की टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनना शामिल है.
सरकार ने इस स्कीम में कुल 7,280 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. इसमें से 6,450 करोड़ रुपये अगले पांच सालों में सेल्स-लिंक्ड इंसेंटिव के रूप में दिए जाएंगे. वहीं करीब 750 करोड़ रुपये फैसिलिटी बनाने के लिए कैपिटल सब्सिडी के तौर पर मिलेंगे. योजना के तहत सरकार ग्लोबल बिडिंग के जरिए पांच मैन्युफैक्चरर्स को चुनेगी. हर कंपनी को 1,200 MTPA तक उत्पादन क्षमता दी जाएगी.
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