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E-20 से बढ़ी बहस, इधर इथेनॉल बेचकर कौन कमा रहा है करोड़ों? सरकार ने पहली बार जारी की 501 कंपनियों की सूची
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, July 21, 2026
Last Updated On: Tuesday, July 21, 2026
E-20 पेट्रोल को लेकर बढ़ती बहस के बीच सरकार ने पहली बार 501 इथेनॉल सप्लायर कंपनियों की सूची जारी की है. तीन साल में इथेनॉल खरीद पर 1.72 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा का कदम बता रही है, जबकि उपभोक्ता माइलेज और प्रदर्शन को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, July 21, 2026
E20 Ethanol Companies: देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E-20 पेट्रोल को बढ़ावा देने की सरकारी योजना एक बार फिर चर्चा में है. एक ओर सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरण के लिए बड़ा कदम बता रही है, तो दूसरी ओर कई वाहन मालिक इसकी वजह से माइलेज घटने और गाड़ियों के प्रदर्शन पर असर पड़ने की शिकायत कर रहे हैं. इसी बीच सरकार ने पहली बार उन 501 कंपनियों की सूची सार्वजनिक की है, जो तेल विपणन कंपनियों को इथेनॉल की आपूर्ति कर रही हैं. इससे साफ हो गया है कि इथेनॉल का कारोबार अब देश के सबसे तेजी से बढ़ते उद्योगों में शामिल हो चुका है.
तीन साल में 1.72 लाख करोड़ रुपये का कारोबार
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने बीते तीन वर्षों में इथेनॉल खरीद पर करीब 1.72 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं. वर्ष 2023-24 में लगभग 48,757 करोड़ रुपये, 2024-25 में 73,996 करोड़ रुपये और 2025-26 में जून तक ही 49,577 करोड़ रुपये इथेनॉल खरीद पर खर्च किए जा चुके हैं. यह आंकड़े बताते हैं कि सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति ने इस क्षेत्र को हजारों करोड़ रुपये का नया बाजार उपलब्ध कराया है.
किन कंपनियों को मिल रहा है फायदा?
सरकार की सूची के अनुसार इथेनॉल की आपूर्ति करने वाली कंपनियों में चीनी मिलें, डिस्टिलरी, बायोफ्यूल निर्माता और कृषि आधारित उद्योग सबसे आगे हैं. इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का रस, बी-हेवी और सी-हेवी मोलासेस, शुगर सिरप, मक्का, अतिरिक्त चावल और खराब खाद्यान्न जैसे कच्चे माल का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे चीनी उद्योग के साथ-साथ कृषि आधारित कंपनियों के लिए भी आय के नए अवसर पैदा हुए हैं.
इन राज्यों की कंपनियां हैं सबसे आगे
501 कंपनियों की सूची में महाराष्ट्र सबसे आगे है. इसके बाद उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब और बिहार जैसे राज्यों की बड़ी हिस्सेदारी है. उत्तर प्रदेश में बलरामपुर चीनी मिल्स, बजाज हिंदुस्तान शुगर, धामपुर शुगर, द्वारिकेश शुगर और त्रिवेणी इंजीनियरिंग जैसी कंपनियां प्रमुख सप्लायर हैं. वहीं महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में सहकारी चीनी मिलें और निजी डिस्टिलरी इस कारोबार से जुड़ी हुई हैं.
सबसे ज्यादा E-20 पेट्रोल कहां बिका?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की सबसे अधिक बिक्री उत्तर प्रदेश में हुई, जहां 124.98 करोड़ लीटर E-20 पेट्रोल की बिक्री दर्ज की गई. इसके बाद महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, केरल और मध्य प्रदेश का स्थान रहा. इससे स्पष्ट होता है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल देश के कई बड़े राज्यों में तेजी से बढ़ रहा है.
सरकार का मकसद और उपभोक्ताओं की चिंता
भारत में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2003 में 5 प्रतिशत मिश्रण के साथ हुई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर पूरे देश में लागू किया गया. सरकार का मानना है कि इससे कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी, किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलेगा और कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा. हालांकि, आम उपभोक्ताओं को अभी तक पेट्रोल की कीमतों में कोई बड़ी राहत नहीं मिली है. वहीं कई वाहन मालिक माइलेज और इंजन प्रदर्शन को लेकर चिंता जता रहे हैं. ऐसे में E-20 नीति के फायदे और चुनौतियों पर बहस लगातार जारी है.
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