वंदे मातरम् को राष्ट्रगान जैसा दर्जा: नए नियम, सजा का प्रावधान और जरूरी प्रोटोकॉल की पूरी जानकारी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, May 7, 2026
Updated On: Thursday, May 7, 2026
Vande Mataram: वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गान के समान दर्जा देने के प्रस्ताव के बाद इसके सम्मान से जुड़े सख्त नियम लागू होंगे. अब इसके अपमान या गायन में बाधा डालना कानूनी अपराध माना जाएगा, जिसमें जेल और जुर्माने का प्रावधान है. नए दिशा-निर्देश सरकारी समारोहों और सार्वजनिक आयोजनों में पालन जरूरी बनाते हैं.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Thursday, May 7, 2026
Vande Mataram: भारत में देशभक्ति के प्रतीकों का हमेशा खास महत्व रहा है, और अब इस दिशा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गान के समान दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. यह फैसला केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं है, बल्कि इसके साथ कई नियम और जिम्मेदारियां भी जुड़ी हुई हैं. बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित यह गीत अब पहले से ज्यादा संवेदनशील और सम्मानजनक श्रेणी में आ जाएगा, जिससे इसके प्रति लोगों का व्यवहार भी तय नियमों के अनुसार होना जरूरी होगा.
सरकार का फैसला और नया कानून
सरकार ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ में संशोधन करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है. इस संशोधन के तहत अब वंदे मातरम् को भी उसी कानून के दायरे में लाया जाएगा, जिसमें पहले से राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान शामिल हैं. इसका सीधा मतलब है कि वंदे मातरम् का अपमान करना अब केवल नैतिक रूप से गलत नहीं, बल्कि कानूनी अपराध भी माना जाएगा. जैसे ही यह संशोधन लागू होगा, वैसे ही नए नियम भी प्रभावी हो जाएंगे.
क्या कहता है राष्ट्रीय सम्मान कानून?
इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान को गाने से रोकता है या उसमें बाधा डालता है, तो उसे तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति यह अपराध दोबारा करता है, तो उसके लिए कम से कम एक साल की सजा अनिवार्य हो जाती है. अब यही नियम वंदे मातरम् पर भी लागू होंगे. यानी किसी कार्यक्रम में इसके दौरान बाधा डालना या अपमान करना कानूनी कार्रवाई को न्योता दे सकता है.
वंदे मातरम् के गायन के नए नियम
सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, वंदे मातरम् का पूरा आधिकारिक संस्करण लगभग 3 मिनट 10 सेकंड का होता है, जिसमें कुल छह श्लोक शामिल हैं. इसे खास सरकारी समारोहों में गाया या बजाया जाना चाहिए. जैसे राष्ट्रीय ध्वज फहराने के समय, राष्ट्रपति या राज्यपाल के कार्यक्रमों में, और महत्वपूर्ण सरकारी आयोजनों में इसके प्रदर्शन की अपेक्षा की जाएगी.
कार्यक्रमों में पालन करने वाले प्रोटोकॉल
अगर किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम् और राष्ट्रगान दोनों गाए जाने हों, तो सबसे पहले वंदे मातरम् गाया जाएगा और उसके बाद राष्ट्रगान. इसके दौरान उपस्थित सभी लोगों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे सम्मान के रूप में सावधान मुद्रा में खड़े रहें. यह नियम देश के प्रति सम्मान दर्शाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया है.
बैंड और सिग्नल से जुड़े नियम
अगर वंदे मातरम् किसी बैंड द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है, तो इसकी शुरुआत से पहले ढोल या बिगुल की आवाज से संकेत दिया जाएगा. यह एक तरह का औपचारिक संकेत होगा, जिससे लोगों को पता चले कि अब राष्ट्रगीत शुरू होने वाला है. इस प्रक्रिया का उद्देश्य पूरे कार्यक्रम को अनुशासित और सम्मानजनक बनाना है.
सिनेमा हॉल में क्या रहेगा नियम?
सरकार ने सिनेमा हॉल और फिल्म प्रदर्शन के लिए कुछ छूट भी दी है. अगर वंदे मातरम् किसी फिल्म के साउंडट्रैक का हिस्सा है, तो दर्शकों को खड़े होने की अनिवार्यता नहीं होगी. यानी मनोरंजन के दौरान इसे एक अलग श्रेणी में रखा गया है, ताकि दर्शकों पर अनावश्यक दबाव न बने.
कब हो सकती है जेल?
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल किन परिस्थितियों में जेल हो सकती है? अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम् के गायन में बाधा डालता है, उसका अपमान करता है या किसी सभा में अशांति फैलाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. पहली बार में तीन साल तक की सजा या जुर्माना हो सकता है, जबकि दोबारा अपराध करने पर कम से कम एक साल की जेल तय मानी जाएगी.
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