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Jantar Mantar CJP Protest: धरना बनाम धरना, नीट विवाद पर सड़क से संसद तक सियासी संग्राम, पटना-जयपुर-भोपाल में बढ़ा बवाल, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, July 22, 2026
Last Updated On: Wednesday, July 22, 2026
Congress vs BJP: नीट विवाद और शिक्षा सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब राष्ट्रीय सियासी संघर्ष में बदल गया है. दिल्ली से लेकर पटना, जयपुर और भोपाल तक कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने हैं. संसद में हंगामा, सड़कों पर प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था के बीच अब देश की नजर सरकार के अगले कदम और समाधान पर टिकी है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, July 22, 2026
Congress vs BJP: नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन (Jantar Mantar CJP Protest) अब सिर्फ छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया है. जंतर-मंतर से उठी आवाज ने देश की राजनीति को भी सीधे प्रभावित किया है. राजधानी दिल्ली से लेकर पटना, जयपुर, भोपाल, लखनऊ, मुंबई और अहमदाबाद तक विरोध-प्रदर्शन तेज हो चुके हैं. एक तरफ छात्र और सामाजिक संगठन अपनी मांगों पर अड़े हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस और बीजेपी भी आमने-सामने दिखाई दे रही हैं. ऐसे में यह आंदोलन अब शिक्षा के मुद्दे के साथ-साथ राजनीतिक संघर्ष का भी बड़ा केंद्र बन गया है.
जंतर-मंतर से शुरू हुई लड़ाई पूरे देश में पहुंची
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है. हजारों छात्र, अभिभावक और सामाजिक संगठन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. जब प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की, तब पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया. इस दौरान कई जगह धक्का-मुक्की, झड़प और हिरासत जैसी घटनाएं सामने आईं. इसके बाद आंदोलन और अधिक चर्चा में आ गया तथा देशभर में इसके समर्थन और विरोध दोनों की आवाजें तेज होने लगीं.
संसद के भीतर भी गूंजा आंदोलन का मुद्दा
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने इस पूरे मामले को प्रमुख मुद्दा बनाया. कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे और सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया. विपक्ष ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने, पुलिस कार्रवाई की जांच और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसी मांगें उठाईं. लगातार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी. सरकार ने कहा कि वह चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है.
पटना, जयपुर और भोपाल में बढ़ा सियासी टकराव
दिल्ली के बाहर भी आंदोलन का असर साफ दिखाई दिया. बिहार की राजधानी पटना में कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए. दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी के बाद तनाव बढ़ा और कुछ स्थानों पर पत्थरबाजी तथा झड़प की घटनाएं भी सामने आईं. जयपुर, भोपाल, लखनऊ, मुंबई और अन्य शहरों में भी दोनों दलों ने अलग-अलग प्रदर्शन किए. कई जगह पुलिस को हालात संभालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पड़े. इससे साफ संकेत मिला कि आंदोलन अब राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का बड़ा मंच बन चुका है.
छात्र संगठन भी रहे सक्रिय
कई छात्र संगठनों ने भी अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन जारी रखा. पटना के जेपी गोलंबर इलाके में छात्र संगठन और पुलिस के बीच टकराव हुआ, जिसके बाद स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को सख्ती करनी पड़ी. कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जबकि कई जगह विरोध शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहा. आंदोलन से जुड़े संगठनों ने साफ कहा कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा.
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने बढ़ाया तापमान
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है और शांतिपूर्ण विरोध को बलपूर्वक रोक रही है. राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान दिए और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए. वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है. दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाते रहे.
सुरक्षा व्यवस्था हुई और सख्त
लगातार बढ़ते प्रदर्शनों को देखते हुए राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई. संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए. कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके. संसद, जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस लगातार निगरानी करती रही. विभिन्न राज्यों में भी स्थानीय प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए.
बातचीत और समाधान की उम्मीद कायम
राजनीतिक तनाव के बीच सरकार और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी रहीं. लोकसभा अध्यक्ष द्वारा सभी दलों के नेताओं से चर्चा की पहल की गई ताकि संसद में इस मुद्दे पर सहमति बन सके. दूसरी ओर आंदोलनकारी संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. उनका कहना है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस फैसले और जवाबदेही तय होने तक आंदोलन जारी रहेगा.
शिक्षा का मुद्दा अब राष्ट्रीय बहस का केंद्र
नीट विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल अब केवल परीक्षा तक सीमित नहीं हैं. यह मुद्दा छात्रों के भविष्य, प्रशासनिक पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही से जुड़ चुका है. सड़क से लेकर संसद तक जारी विरोध और राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में देश की राजनीति और शिक्षा नीति दोनों को प्रभावित कर सकता है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि बातचीत, जांच और राजनीतिक सहमति के जरिए इस विवाद का समाधान किस दिशा में आगे बढ़ता है.
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