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FSSAI Action on Dabur: FSSAI की सख्ती के बाद डाबर के इन प्रोडक्ट्स पर रोक, खरीदने से पहले जरूर देख लें पूरी लिस्ट, जानिए क्या है पूरा मामला और ग्राहकों पर इसका असर
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, August 4, 2026
Last Updated On: Tuesday, August 4, 2026
FSSAI Action on Dabur: एफएसएसएआई ने डाबर के कई खाद्य उत्पादों पर लिखे '100% प्योर', '100% नेचुरल' और '100% ऑर्गेनिक' जैसे दावों पर आपत्ति जताते हुए बिक्री रोकने के निर्देश दिए हैं. नियामक का कहना है कि ऐसे दावे नियमों के अनुरूप नहीं हैं और उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, August 4, 2026
FSSAI Action on Dabur: अगर आप रोजमर्रा की खरीदारी करते समय किसी उत्पाद पर लिखा ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ या ‘100% ऑर्गेनिक’ देखकर उसे बेहतर मान लेते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने डाबर इंडिया के कुछ खाद्य उत्पादों पर कार्रवाई करते हुए उनकी बिक्री रोकने के निर्देश दिए हैं. नियामक का कहना है कि इन उत्पादों पर किए गए कुछ दावे मौजूदा नियमों के अनुरूप नहीं हैं. कंपनी को 15 दिनों के भीतर इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी सौंपने को कहा गया है. इस कदम ने खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले विज्ञापन और लेबलिंग को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
किन उत्पादों पर हुई कार्रवाई और आखिर आपत्ति क्या है?
एफएसएसएआई की कार्रवाई उन उत्पादों पर हुई है, जिन पर ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’, ‘100% ऑर्गेनिक’, ‘100% प्योरिटी गारंटीड’ जैसे दावे लिखे गए थे. इनमें डाबर हनी, डाबर गाय का घी, हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर, होममेड कोकोनट मिल्क, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल और कोकोनट वॉटर जैसे उत्पाद शामिल हैं. नियामक का मानना है कि ऐसे दावों को वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित करना संभव नहीं है और इससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं. इसी कारण इन दावों को नियमों के विपरीत माना गया है.
जिन उत्पादों पर कार्रवाई हुई
- डाबर हनी
- डाबर गाय का घी
- डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर
- डाबर होममेड कोकोनट मिल्क
- डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल
- डाबर तिल का तेल
- डाबर कोकोनट वॉटर
‘100%’ लिखना नियमों के खिलाफ क्यों माना गया?
एफएसएसएआई के अनुसार भारतीय खाद्य नियमों में किसी भी खाद्य उत्पाद पर ‘100%’ जैसे दावे करने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है. यदि कोई कंपनी किसी उत्पाद को 100 प्रतिशत शुद्ध या प्राकृतिक बताती है, तो यह स्पष्ट नहीं होता कि वह शुद्धता किस आधार पर साबित की जा रही है. प्रयोगशाला यह जांच सकती है कि किसी उत्पाद में मिलावट है या नहीं, लेकिन यह प्रमाणित नहीं कर सकती कि कोई उत्पाद पूरी तरह यानी 100 प्रतिशत शुद्ध है. इसी वजह से ऐसे दावों को भ्रामक माना गया है.
ग्राहकों और बाजार पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी उत्पाद पर ‘100% प्योर’ जैसे शब्द लिखे होते हैं, तो ग्राहक उसे दूसरे ब्रांडों की तुलना में अधिक भरोसेमंद समझ सकते हैं. जबकि बाजार में बिकने वाले सभी पैक्ड खाद्य उत्पादों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन करना होता है. इस मामले में एक और मुद्दा सामने आया है कि कुछ उत्पादों पर ‘जैविक भारत’ का लोगो भी इस्तेमाल किया गया, जबकि उसके लिए आवश्यक वैध ऑर्गेनिक प्रमाणन उपलब्ध नहीं था. इसलिए मामला केवल विज्ञापन तक सीमित नहीं, बल्कि प्रमाणन नियमों से भी जुड़ा हुआ है.
खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यान
- केवल ‘100% प्योर’ जैसे दावों पर भरोसा न करें.
- उत्पाद की इनग्रेडिएंट लिस्ट जरूर पढ़ें.
- पैकेट पर दिया गया FSSAI लाइसेंस नंबर जांचें.
- ऑर्गेनिक उत्पाद खरीदते समय वैध सर्टिफिकेशन की पुष्टि करें.
- किसी भी दावे की बजाय गुणवत्ता संबंधी आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता दें.
अब आगे क्या होगा?
FSSAI का कहना है कि कंपनी को पहले भी ऐसे दावे हटाने के लिए नोटिस भेजा गया था, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. इसके बाद यह कार्रवाई की गई. हालांकि आदेश जारी होने के बावजूद कुछ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर पुराने लेबल वाले उत्पाद दिखाई दे सकते हैं, क्योंकि पैकेजिंग और ऑनलाइन लिस्टिंग बदलने में समय लगता है. अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी निर्धारित समय में क्या जवाब देती है और अपने उत्पादों की पैकेजिंग तथा दावों में क्या बदलाव करती है. यह कार्रवाई अन्य कंपनियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है कि खाद्य उत्पादों की लेबलिंग पूरी तरह नियामक मानकों के अनुरूप होनी चाहिए.
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