Sawan Shivratri 2026 Puja: घर पर ऐसे करें महादेव की पूजा, जानें चार प्रहर का महत्व, व्रत नियम और पूजा का सही समय

Authored By: Nishant Singh

Published On: Monday, August 10, 2026

Last Updated On: Monday, August 10, 2026

Sawan Shivratri 2026 Puja घर पर महादेव की पूजा विधि
Sawan Shivratri 2026 Puja घर पर महादेव की पूजा विधि

Sawan Shivratri 2026 Puja: सावन शिवरात्रि 2026 इस बार 11 अगस्त को मनाई जाएगी. भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और रात्रि के चार प्रहर की आराधना का विशेष महत्व है. घर पर पूजा करने वाले भक्त जानें अभिषेक की विधि, जरूरी सामग्री, व्रत के नियम, निशिता काल और 12 अगस्त को पारण का सही समय.

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Sawan Shivratri 2026 Puja: सावन शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास मानी जाती है. इस बार यह पर्व 11 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा. भक्त दिनभर व्रत रखने के साथ शिवलिंग का अभिषेक, मंत्र जाप और रात्रि जागरण करते हैं. खास तौर पर रात के चार प्रहर में की जाने वाली पूजा का धार्मिक महत्व बताया गया है.

सुबह से शुरू करें महादेव की आराधना

सावन शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करके सबसे पहले घर के पूजा स्थल को साफ करें. अगर घर में शिवलिंग है तो उसे स्वच्छ स्थान पर स्थापित कर पूजा की तैयारी करें. शिवलिंग न होने पर भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर के सामने भी पूजा की जा सकती है. इसके बाद भगवान गणेश का स्मरण करके दीपक और धूप जलाएं तथा पूजा का संकल्प लें.

जलाभिषेक से लेकर बेलपत्र तक

पूजा की शुरुआत शिवलिंग पर साफ पानी और गंगाजल चढ़ाकर की जा सकती है. इसके बाद परंपरा के अनुसार दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक किया जाता है. अभिषेक के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करना शुभ माना जाता है. इसके बाद चंदन, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और शमी के पत्ते अर्पित किए जा सकते हैं. बेलपत्र को भगवान शिव की पूजा में विशेष स्थान प्राप्त है.

भोग और आरती से पूरी होगी पूजा

अभिषेक के बाद भगवान शिव को फल, मिठाई या पंचमेवा का भोग लगाया जा सकता है. इसके बाद धूप-दीप से आरती करें. परिवार के सदस्य मिलकर शिव मंत्र, शिव चालीसा या शिव से जुड़े स्तोत्रों का पाठ कर सकते हैं. पूजा के दौरान दिखावे से ज्यादा मन की श्रद्धा और सात्विक भाव को महत्व देना जरूरी माना जाता है.

रात के चार प्रहर की पूजा क्यों खास?

सावन शिवरात्रि पर रात्रि पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. उपलब्ध समय के अनुसार चार प्रहर इस तरह रहेंगे-

  • पहला प्रहर: शाम 7:09 से रात 9:56 बजे तक – दूध से अभिषेक.
  • दूसरा प्रहर: रात 9:56 से 12:44 बजे तक – दही से अभिषेक.
  • तीसरा प्रहर: रात 12:44 से सुबह 3:31 बजे तक – घी से अभिषेक.
  • चौथा प्रहर: सुबह 3:31 से 6:19 बजे तक – शहद से अभिषेक.

तीसरे प्रहर में निशिता काल रात 12:05 से 12:48 बजे तक बताया गया है. इस दौरान शिव आराधना को विशेष महत्व दिया जाता है. हालांकि चारों प्रहर जागना संभव न हो तो भक्त अपनी सुविधा के अनुसार मुख्य पूजा कर सकते हैं.

व्रत में रखें सात्विकता का ध्यान

सावन शिवरात्रि का व्रत रखने वाले भक्त फलाहार कर सकते हैं. फल, दूध और पानी जैसे विकल्प लिए जाते हैं. सामान्य नमक, अनाज, प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से परहेज करने की परंपरा है. इस दिन क्रोध, कटु वचन और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर मन को शांत रखने का प्रयास किया जाता है. रात में जागरण, मंत्र जाप और शिव ध्यान भी व्रत का अहम हिस्सा माना जाता है.

12 अगस्त को होगा व्रत का पारण

11 अगस्त को व्रत रखने के बाद 12 अगस्त 2026, बुधवार को सुबह 5:49 बजे के बाद पारण किया जा सकता है. पारण से पहले स्नान करके भगवान शिव की पूजा करें और फिर सात्विक भोजन ग्रहण करें. साबूदाना या कुट्टू से बने व्यंजन भी व्रत खोलने के लिए लिए जा सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन शिवरात्रि की पूजा में सामग्री से अधिक श्रद्धा, संयम और भगवान शिव के प्रति समर्पण का महत्व है.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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