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11 अगस्त को बलोचिस्तान क्यों मनाता है ‘आजादी दिवस’? 14 अगस्त वाले पाकिस्तान से क्या है इतिहास का अंतर?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, August 11, 2026
Last Updated On: Tuesday, August 11, 2026
11 अगस्त को कई बलोच राष्ट्रवादी ‘बलोचिस्तान स्वतंत्रता दिवस’ के रूप में मनाते हैं, जबकि पाकिस्तान 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है. इसके पीछे 1947 में कलात रियासत की स्थिति और बाद में पाकिस्तान में उसके विलय से जुड़ा विवाद है. यही ऐतिहासिक मतभेद आज भी बलोचिस्तान की राजनीति और पहचान में दिखाई देता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, August 11, 2026
Balochistan Independence Day: हर साल 14 अगस्त को पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है, लेकिन 11 अगस्त को बलोच समुदाय के कई लोग और बलोच राष्ट्रवादी संगठन अलग से ‘बलोचिस्तान स्वतंत्रता दिवस’ मनाते हैं. इस अंतर की वजह 1947 के विभाजन और तत्कालीन कलात रियासत की स्थिति से जुड़ी है. यही इतिहास आज भी बलोचिस्तान और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक बहस का आधार बना हुआ है.
11 अगस्त 1947 को क्या हुआ था?
बलोच राष्ट्रवादियों के लिए 11 अगस्त की तारीख बेहद अहम मानी जाती है. ब्रिटिश शासन के दौरान कलात रियासत को दूसरी रियासतों की तुलना में अलग संवैधानिक स्थिति प्राप्त थी. वहां खान का शासन था और ब्रिटिश सरकार के साथ उसके विशेष संबंध थे. इतिहासकार ताज मोहम्मद ब्रीसीग के अनुसार, 11 अगस्त 1947 को कलात और मुस्लिम लीग के बीच हुए समझौते में कलात की अलग स्थिति को स्वीकार किया गया था. इसी वजह से कई बलोच राष्ट्रवादी इस दिन को अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान से जोड़ते हैं.
15 अगस्त के बाद कलात ने क्या रुख अपनाया?
भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद कलात के शासक खान मीर अहमद यार खान ने कलात को स्वतंत्र राज्य घोषित किया. बलोच राष्ट्रवादी इतिहास की अपनी व्याख्या में इसे पाकिस्तान से अलग एक स्वतंत्र अस्तित्व के रूप में देखते हैं. कुछ ऐतिहासिक स्रोतों में यह भी उल्लेख मिलता है कि कलात लगभग 227 दिनों तक स्वतंत्र स्थिति में रहा.
फिर पाकिस्तान में कैसे हुआ विलय?
कलात और पाकिस्तान के रिश्ते जल्द ही तनावपूर्ण हो गए. 1948 की शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई. पाकिस्तान का आधिकारिक पक्ष रहा है कि कलात का विलय कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ. इसके अनुसार 27 मार्च 1948 को खान अहमद यार खान ने पाकिस्तान के साथ विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए.
हालांकि, बलोच राष्ट्रवादी इस घटनाक्रम को अलग नजरिए से देखते हैं. उनका दावा है कि विलय का फैसला दबाव में कराया गया था. इसी मतभेद ने आगे चलकर बलोचिस्तान में राजनीतिक असंतोष को बढ़ाने में भूमिका निभाई.
विलय के बाद बढ़ता गया संघर्ष
कलात के पाकिस्तान में शामिल होने के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ. खान के भाई प्रिंस अब्दुल करीम ने पाकिस्तान के खिलाफ विद्रोह शुरू किया. इसके बाद 1958, 1962 और 1973 में भी संघर्ष देखने को मिले. 2000 के दशक में अलगाववादी गतिविधियों ने एक बार फिर जोर पकड़ा.
बलोचिस्तान में राजनीतिक अधिकार, प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण, विकास और स्थानीय लोगों की भागीदारी जैसे मुद्दे लंबे समय से विवाद का हिस्सा रहे हैं. पाकिस्तान सरकार इन क्षेत्रों को अपने राष्ट्रीय ढांचे का हिस्सा मानती है, जबकि अलगाववादी संगठन स्वतंत्र बलोचिस्तान की मांग करते रहे हैं.
11 अगस्त बनाम 14 अगस्त
पाकिस्तान के लिए 14 अगस्त 1947 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिलने की राष्ट्रीय स्मृति का दिन है. दूसरी ओर, कई बलोच राष्ट्रवादी 11 अगस्त को कलात की कथित स्वतंत्र स्थिति और अपनी अलग ऐतिहासिक पहचान के प्रतीक के रूप में देखते हैं.
इसलिए 11 अगस्त और 14 अगस्त केवल दो अलग-अलग तारीखें नहीं हैं. इनके पीछे इतिहास की दो अलग व्याख्याएं हैं, जो आज भी बलोचिस्तान की राजनीति, पहचान और पाकिस्तान के साथ उसके रिश्तों को प्रभावित करती हैं.
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