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नेपाल में बालेन शाह की ‘वन-टू-वन’ डिप्लोमेसी शुरू, सबसे पहले भारत से संवाद, रिश्तों पर क्या बनी बात?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, August 10, 2026
Last Updated On: Monday, August 10, 2026
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पद संभालने के बाद पहली बार किसी विदेशी राजनयिक से वन-टू-वन बातचीत की. भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव से हुई करीब एक घंटे की मुलाकात में द्विपक्षीय संबंध, विकास साझेदारी और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई. इसके बाद शाह की चीन और अमेरिका के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात प्रस्तावित रही.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, August 10, 2026
Balen Shah India: नेपाल की राजनीति में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह यानी बालेन शाह के कार्यकाल में कूटनीतिक गतिविधियां अब तेज होती दिखाई दे रही हैं. सोमवार को नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सिंहदरबार स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में बालेन शाह से मुलाकात की. करीब एक घंटे चली इस बैठक को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री बनने के बाद यह शाह की किसी विदेशी राजनयिक के साथ पहली आमने-सामने द्विपक्षीय बातचीत थी. मुलाकात के दौरान दोनों देशों के संबंधों और भविष्य के सहयोग को लेकर चर्चा हुई.
भारत-नेपाल रिश्तों को नई गति देने पर जोर
बैठक में भारत और नेपाल के पुराने संबंधों को और मजबूत बनाने पर बातचीत हुई. नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग बढ़ाने और विकास साझेदारी को आगे ले जाने के रास्तों पर विचार किया. भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने भी मुलाकात को सकारात्मक बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद मजबूत और बहुआयामी साझेदारी को और गहरा करने की साझा इच्छा है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बालेन शाह को शुभकामनाएं भी दीं.
सात दशक पुरानी साझेदारी, कई क्षेत्रों में सहयोग
भारत और नेपाल के संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं. दोनों देशों के बीच विकास सहयोग करीब सात दशक से जारी है. समय के साथ इस साझेदारी का दायरा लगातार बढ़ा है. आज भारत नेपाल में स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, सड़क और कनेक्टिविटी, व्यापार, कृषि तथा सांस्कृतिक विरासत जैसे क्षेत्रों में सहयोग करता है. नेपाल की जरूरतों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर भारत की ओर से अलग-अलग विकास परियोजनाएं भी संचालित की जाती हैं.
1951 से शुरू हुई विकास सहयोग की कहानी
नेपाल के बुनियादी ढांचे के विकास में भारत की भागीदारी पुरानी है. दोनों देशों के बीच आधुनिक विकास सहयोग की शुरुआत 1951 में काठमांडू के गौचर हवाई अड्डे के निर्माण से जुड़ी मानी जाती है. इसका निर्माण 1954 में पूरा हुआ. इसी वर्ष नेपाल में ‘इंडियन एड मिशन’ की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य भारत की विकास परियोजनाओं के बीच समन्वय स्थापित करना था. सात दशकों में यह सहयोग कई नए क्षेत्रों तक पहुंच चुका है.
चीन और अमेरिका के राजनयिकों से भी मुलाकात
भारत के राजदूत के साथ बैठक के बाद बालेन शाह की कूटनीतिक गतिविधियां और महत्वपूर्ण हो गईं. जानकारी के अनुसार, इसी दिन उनकी मुलाकात चीन के राजदूत झांग माओमिंग से भी तय थी. इसके बाद अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स स्कॉट अर्बोम के साथ बातचीत होनी थी. यानी शाह ने विदेशी प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठक के जरिए ‘वन-टू-वन’ कूटनीति की दिशा में कदम बढ़ाया है. इससे उनकी विदेश नीति को लेकर भी संकेत मिलने लगे हैं.
बैठकों में देरी की क्या रही वजह?
शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद इन उच्चस्तरीय राजनयिक मुलाकातों की तैयारी पहले से चल रही थी, लेकिन नेपाल के सुनसारी क्षेत्र में हाल की घटनाओं के कारण कार्यक्रमों में कुछ देरी हुई. अब इन बैठकों के शुरू होने से नेपाल की विदेश नीति और उसके प्रमुख पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
भारत के लिए क्यों अहम है बालेन शाह से संवाद?
भारत और नेपाल के बीच भौगोलिक निकटता के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध भी बेहद गहरे हैं. दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही, व्यापार और धार्मिक-सांस्कृतिक जुड़ाव लंबे समय से बना हुआ है. ऐसे में बालेन शाह के साथ भारत की शुरुआती उच्चस्तरीय बातचीत को दोनों देशों के रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. आने वाले समय में कनेक्टिविटी, ऊर्जा, व्यापार और विकास परियोजनाओं पर सहयोग इस रिश्ते की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
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