क्या होता है FDTL नियम? जिसका इंडिगो पर दिखा असर, जानें कैसे किया जाता है इसका उपयोग
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Tuesday, December 9, 2025
Updated On: Tuesday, December 9, 2025
इंडिगो में पिछले कुछ दिनों से जारी फ्लाइट रद्द होने की बड़ी समस्या के पीछे FDTL नियम को कारण बताया जा रहा है. यह नियम पायलट और क्रू मेंबर्स की ड्यूटी समय सीमा तय करता है. ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं क्या होता है FDTL नियम और DGCA के नए बदलावों ने कैसे इंडिगो के रोस्टर सिस्टम को प्रभावित किया?
Authored By: Ranjan Gupta
Updated On: Tuesday, December 9, 2025
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों बड़े संकट से गुजर रही है. पांच दिनों में 2000 से ज्यादा उड़ानें रद्द होने से देशभर के एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी का माहौल है. हजारों यात्री फंस गए हैं, कई अपने जरूरी काम पर समय से नहीं पहुंच पा रहे. इंडिगो की घरेलू उड़ानों में 60% हिस्सेदारी है, ऐसे में इसके ठप्प होने का असर पूरे सिस्टम पर दिख रहा है. कंपनी ने इस भारी अव्यवस्था के पीछे “रोस्टर क्राइसिस” को वजह बताया है और सीधे तौर पर DGCA के नए FDTL नियमों की ओर इशारा किया है. आखिर यह FDTL है क्या? और कैसे इसके बदलते नियमों ने इंडिगो जैसे बड़े ऑपरेटर को अचानक संकट में डाल दिया? आइए जानते हैं..
क्रू मेंबर्स के लिए रोस्टर
हर एयरलाइन महीने की शुरुआत में पायलट और क्रू मेंबर्स का रोस्टर जारी करती है. इसी रोस्टर पर आगे की उड़ानों की पूरी प्लानिंग टिकती है. इसमें तय होता है कि किस उड़ान में कितने पायलट और कितने क्रू मेंबर्स की जरूरत होगी. फिर इसी हिसाब से फ्लाइट्स का शेड्यूल बनाया जाता है. यह पूरी प्रक्रिया रोज़मर्रा की उड़ानों को सुचारू रखने के लिए जरूरी होती है.
क्या होता है FDTL नियम
रोस्टर तैयार करते समय एयरलाइन को FDTL नियमों का पालन करना पड़ता है. FDTL यानी फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट. यह तय करता है कि एक पायलट या क्रू मेंबर अधिकतम कितने घंटे ड्यूटी कर सकता है. सप्ताह में उसे कितना आराम मिलेगा. ड्यूटी के दौरान किस समय ब्रेक जरूरी है. लगातार कितनी देर तक उड़ान में काम करना सुरक्षित है. यह नियम पायलटों की सेहत और यात्रियों की सुरक्षा दोनों के लिए बेहद अहम माने जाते हैं.
कैसे बनते हैं फ्लाइट्स के रोस्टर
रोस्टर तैयार करते वक्त FDTL के हिसाब से ही सब कुछ सेट किया जाता है. पायलट और क्रू का ड्यूटी टाइम, रेस्ट टाइम, ग्राउंड टाइम और टर्न-अराउंड टाइम सभी पहले तय होते हैं. इसके साथ हर फ्लाइट के लिए पायलटों की जोड़ी और क्रू मेंबर्स की संख्या भी फाइनल की जाती है. जैसे किसी फ्लाइट के लिए एक कैप्टन, एक फर्स्ट ऑफिसर और तय संख्या में फ्लाइट अटेंडेंट अनिवार्य होते हैं. घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए क्रू की ड्यूटी भी उड़ान की अवधि के अनुसार बदली जाती है. लंबी उड़ानों में क्रू संख्या बढ़ जाती है, जबकि छोटी उड़ानों में टीम छोटी रखी जाती है.
सरकार के नए नियम से बढ़ा दबाव
इंडिगो की मुश्किलें तब शुरू हुईं, जब सरकार ने FDTL के नए नियम लागू कर दिए. इन नियमों का मकसद पायलटों को अत्यधिक थकान से बचाना था. लेकिन इंडिगो पहले से ही स्टाफ की कमी से जूझ रही थी. नए नियम लागू होते ही कंपनी पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया. अब उन्हें अपने पायलटों को ज्यादा आराम देना पड़ रहा था. इससे शेड्यूल बिगड़ने लगा.
स्टाफ कम होने की वजह से कंपनी सभी उड़ानों को संभाल नहीं पा रही थी. कई फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं. इसका असर पूरे नेटवर्क पर पड़ा और सिस्टम गड़बड़ा गया. एक-एक रद्द उड़ान अगली उड़ानों को भी प्रभावित करती चली गई. नतीजा यह हुआ कि यात्रियों की परेशानी बढ़ गई और इंडिगो विवादों के केंद्र में आ गई.
यह भी पढ़ें :- आखिर किसे मिलता है ग्लोबल ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड? अनंत अंबानी का नाम आते ही बढ़ी उत्सुकता
यह भी पढ़ें
news via inbox
समाचार जगत की हर खबर, सीधे आपके इनबॉक्स में - आज ही हमारे न्यूजलेटर को सब्सक्राइब करें।















