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दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल सोसाइटियों में से एक है भारत, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कही ये बात
Authored By: सतीश झा
Published On: Monday, July 15, 2024
Last Updated On: Monday, July 15, 2024
हाल के वर्षों में साइबर अपराध बढ़ता ही जा रहा है। सरकार की ओर से समय-समय पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके रोकथाम को लेकर सरकारी स्तर पर व्यापक कार्ययोजना चलाई जा रही है। विज्ञान भवन में उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने भी इसको लेकर बात की है।
Authored By: सतीश झा
Last Updated On: Monday, July 15, 2024
देश में बढ़ती डिजिटल पहुंच के साथ-साथ साइबर अपराध की घटनाओं में वृद्धि से यह स्पष्ट है कि यह एजेंसियों, जांचकर्ताओं, नियामकों और कानूनी समुदाय के लिए चिंता का एक नया क्षेत्र बन गया है। इस चिंता को भारत की ओर से बीते साल जी20 के शिखर सम्मेलन में भी पूरी दुनिया के साथ साझा किया गया था। एक बार फिर भारत सरकार की ओर से चिंता जताई गई है। साथ ही सरकार की तैयारियों को सभी के सामने रखा गया है।
विज्ञान भवन (Vigyan Bhavan) में हुआ कार्यक्रम
शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में वैश्विक आतंकवाद निरोधक परिषद (जीसीटीसी) द्वारा आयोजित तीसरे साइबर सुरक्षा सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ (Vice President Shri Jagdeep Dhankhar) ने कहा कि वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी डिजिटल सोसाइटियों में से एक के रूप में भारत की प्रमुख स्थिति पर प्रकाश डालते हुए, श्री धनखड़ ने जोर देकर कहा कि भारत में 820 मिलियन से अधिक सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और इसने 500 मिलियन से अधिक व्यक्तियों के लिए बैंकिंग समावेशन हासिल किया है। उन्होंने इस तथ्य की ओर भी ध्यान आकर्षित किया कि वर्ष 2023 तक वैश्विक डिजिटल लेन-देन में देश की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत होगी।
भारत की उपलब्धियों की सराहना
आज दुनिया भारत में सेवा वितरण में प्रौद्योगिकी के बड़े पैमाने पर उपयोग को देखकर दंग है, निस्सन्देह गांव स्तर तक भी। बाधाकारी प्रौद्योगिकियों की अपार संभावनाओं की चर्चा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी प्रौद्योगिकी का न केवल अर्थव्यवस्था, व्यवसाय या व्यक्तिगत उत्पादकता पर बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी प्रभाव पड़ सकता है। यह कहते हुए कि इन उभरती प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न चुनौतियों को अवसरों में बदला जाना चाहिए, श्री धनखड़ ने उनकी सकारात्मक क्षमता का दोहन करने के लिए प्रणालियों को अद्यतन करने का आह्वान किया। उन्होंने देश के लाभ के लिए इन प्रगतियों को एकीकृत करने के लिए सक्रिय उपायों की आवश्यकता पर भी जोर दिया
श्री धनखड़ के विचारों ने आधुनिक युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा की बदलती आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित किया। उन्नत प्रौद्योगिकियों और तकनीकी श्रेष्ठता के माध्यम से, राष्ट्र अपनी सुरक्षा को मजबूत कर सकते हैं और वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को बेहतर बना सकते हैं। नरम कूटनीतिक शक्ति और तकनीकी क्षमता का तालमेल राष्ट्रीय रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटक बन गया है।













