स्मारक पर जारी है सियासत, मनमोहन सिंह के साथ नरसिम्हा राव की भी चर्चा

Authored By: सतीश झा

Published On: Sunday, December 29, 2024

Updated On: Sunday, December 29, 2024

Smarak Par Jari Hai Siyasat, Manmohan Singh Aur Narsimha Rao Ki Charcha

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के बाद उनके योगदान और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा जारी है। उन्हें निगम बोध घाट पर भव्य सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, और सरकार ने इस अवसर पर दिखाए गए सम्मान को सराहा गया। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख नेताओं की उपस्थिति ने यह साबित किया कि पूर्व प्रधानमंत्री के प्रति आदर और सम्मान भारतीय राजनीति में एक अहम स्थान रखता है। लेकिन इसी बीच, मनमोहन सिंह के साथ एक और पूर्व प्रधानमंत्री, नरसिंह राव की चर्चा भी उठने लगी है, जिससे सियासी समीकरण नया मोड़ ले रहे हैं।

Authored By: सतीश झा

Updated On: Sunday, December 29, 2024

मनमोहन सिंह का स्मारक बनाने की चर्चा कांग्रेस द्वारा शुरू की गई है, लेकिन इस चर्चा में नरसिंह राव का नाम भी अचानक उभर आया है। ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस ने कभी नरसिंह राव के योगदान का उचित सम्मान नहीं किया। 2004 में जब उनका निधन हुआ था, तब उनके अंतिम संस्कार के समय कांग्रेस पार्टी ने उन्हें वह सम्मान नहीं दिया, जो उन्हें मिलना चाहिए था। राव की पार्थिव देह को कांग्रेस मुख्यालय के बाहर एंबुलेंस में आधे घंटे तक रखा गया था, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने उसे अंदर लाने की अनुमति नहीं दी। यह एक सियासी असंवेदनशीलता थी, जो आज भी कांग्रेस पार्टी के इतिहास का हिस्सा है।

यह सवाल अब राजनीतिक गलियारों में उठ रहा है कि क्या कांग्रेस अब नरसिंह राव का स्मारक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएगी, जो उनके योगदान को सही तरीके से मान्यता दे सके। नरसिंह राव ने भारत की आर्थिक नीतियों में ऐतिहासिक बदलाव किए थे, जिनका प्रभाव आज तक महसूस किया जाता है। उनके समय में ही आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत हुई, और देश ने वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को मजबूत किया। बावजूद इसके, उनकी सरकार के प्रति कांग्रेस का रवैया कभी सम्मानजनक नहीं रहा।

कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में मनमोहन सिंह को स्मारक बनाने की बात की है, लेकिन क्या वह नरसिंह राव के योगदान को भी उसी तरह सम्मान देने की योजना बना रही है? इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है, और अब सवाल यह उठ रहा है कि कांग्रेस पार्टी अपने ऐतिहासिक कर्तव्यों को निभाएगी या फिर पूर्व प्रधानमंत्री के योगदान को नकारेगी।

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का शनिवार दोपहर दिल्ली के निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। उन्हें जो सम्मान और भव्यता के साथ विदाई दी गई, वह बिल्कुल उचित था। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, और अन्य केंद्रीय मंत्री उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इसके साथ ही सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान की उपस्थिति में पूर्व प्रधानमंत्री को सैन्य सम्मान और 21 तोपों की सलामी दी गई।

मनमोहन सिंह की शुद्ध छवि और सादगी के बावजूद उनके कार्यकाल में बड़े घोटालों का सामने आना एक ऐतिहासिक सत्य है। उनकी ईमानदारी के बावजूद कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में टूजी, थ्रीजी, कोयला, एशियन गेम्स जैसे बड़े घोटाले हुए, जिसकी आलोचना हुई। इसके बावजूद, उनका जीवन और कार्य इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। उनकी चुप्पी और संयम को कभी नहीं भुलाया जा सकता, जब कांग्रेस की कारगुजारियों के कारण उन्हें कई बार अपमान का सामना करना पड़ा।

हालांकि, भारत सरकार ने उनके अंतिम संस्कार में जिस प्रकार का सम्मान और आदर दिखाया, वह वास्तव में सराहनीय था। यह दिखाता है कि राजनीति से परे भी, एक पूर्व प्रधानमंत्री का सम्मान करना चाहिए। कांग्रेस की वर्तमान स्थिति यह है कि वह मनमोहन सिंह का स्मारक बनाने की बात कर रही है, लेकिन क्या उसने कभी नरसिंह राव के योगदान को सम्मान देने के बारे में सोचा? कांग्रेस ने कभी भी नरसिंह राव के योगदान को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया, और यह अभी भी एक मुद्दा है।

भारतीय जनता पार्टी ने अपने नेताओं के लिए हमेशा सम्मान और सम्मानजनक दृष्टिकोण अपनाया है, चाहे वह अटल बिहारी वाजपेयी हों या नरेंद्र मोदी। यही कारण है कि मोदी सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री के सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके विपरीत, कांग्रेस पार्टी को यह सोचने की आवश्यकता है कि क्या वह नरसिंह राव और अन्य नेताओं के सम्मान की दिशा में आगे बढ़ेगी, ताकि उनके योगदान को सही तरीके से मान्यता मिल सके।

About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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