असम में विधानसभा की नमाज के लिए छुट्टी खत्म, सरकार का बड़ा फैसला
Authored By: सतीश झा
Published On: Saturday, August 31, 2024
Updated On: Saturday, August 31, 2024
असम विधानसभा में नमाज के लिए मिलने वाली छुट्टी अब खत्म कर दी गई है। सरकार ने यह फैसला विधानसभा के मौजूदा सत्र में लिया है, जिसे राज्य के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में एक अहम कदम माना जा रहा है। सरकार के इस निर्णय को लेकर राज्य में राजनीति भी गर्मा गई है, और आने वाले समय में इसके असर पर नजरें टिकी रहेंगी।
Authored By: सतीश झा
Updated On: Saturday, August 31, 2024
असम विधानसभा (Assam Assembly) में हर शुक्रवार को दोपहर 12 से 2 बजे तक नमाज के लिए दिया जाने वाला दो घंटे का अवकाश समाप्त कर दिया गया है। यह ब्रेक मुस्लिम विधायकों को नमाज अदा करने के लिए दिया जाता था। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि अब यह नियम बदल दिया गया है और शुक्रवार को कोई ब्रेक नहीं दिया जाएगा।
असम सरकार के इस फैसले के बाद विधानसभा की कार्यवाही के दौरान अब नमाज के लिए अलग से समय या अवकाश नहीं दिया जाएगा। सरकार के इस कदम का उद्देश्य सभी धर्मों के प्रति निष्पक्षता बनाए रखना और कामकाज में बाधा से बचना है।
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा (Assam CM Himanta Biswa Sharma) ने कहा, “हमारी सरकार सभी धर्मों का सम्मान करती है, लेकिन विधानसभा का काम सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी सदस्यों को अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करने का अधिकार है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि विधानसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से चले।”
Assam Assembly abolishes British-era rule for Friday namaz breakhttps://t.co/aob07n4hvw
— Chief Minister Assam (@CMOfficeAssam) August 31, 2024
विपक्षी दलों और कुछ मुस्लिम संगठनों ने सरकार के इस कदम की आलोचना की है, जबकि भाजपा (BJP) और उसके समर्थक इसे एक सही कदम बताते हुए सभी के लिए समानता की दिशा में उठाया गया आवश्यक कदम मान रहे हैं।
असम विधानसभा में नमाज के लिए छुट्टी खत्म करने के फैसले को RSS से जुड़े संगठनों का समर्थन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने शुक्रवार की नमाज के लिए दी जाने वाली दो घंटे की छुट्टी को समाप्त करने के असम विधानसभा के फैसले का समर्थन किया है। दोनों संगठनों ने असम सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सराहना की है।
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक शाहिद सईद ने कहा कि यह फैसला देश की धर्मनिरपेक्षता को मजबूत करने वाला है और इससे प्रगतिशील मूल्यों को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा, “कर्म ही पूजा है और यह सिद्धांत सभी धर्मों के लोगों पर समान रूप से लागू होता है।” सईद के अनुसार, इस फैसले से यह संदेश जाता है कि कामकाज में धार्मिक गतिविधियों के लिए किसी तरह की रुकावट नहीं होनी चाहिए और सभी को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
विश्व हिंदू परिषद ने भी इस कदम की सराहना की है, इसे एक निष्पक्ष और संतुलित निर्णय बताया है। VHP के अनुसार, इस फैसले से सभी धर्मों के लोगों के बीच समानता और एकता को बढ़ावा मिलेगा और विधानसभा की कार्यवाही में बाधाएं दूर होंगी।
असम सरकार के इस फैसले को लेकर राज्य में सकारात्मक और नकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, लेकिन RSS से जुड़े संगठनों के समर्थन से यह स्पष्ट है कि इस निर्णय को धर्मनिरपेक्षता और समानता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
नमाज के लिए अवकाश का इतिहास और शुरुआत
असम विधानसभा में नमाज के लिए अवकाश की शुरुआत 2011 में हुई थी। उस समय, राज्य में कांग्रेस की सरकार थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई (CM Tarun Gogoi) के कार्यकाल में मुस्लिम विधायकों की मांग को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया था। इसका उद्देश्य मुस्लिम विधायकों को शुक्रवार की नमाज अदा करने की सुविधा प्रदान करना था। इस प्रथा के तहत हर शुक्रवार को विधानसभा की कार्यवाही दो घंटे के लिए स्थगित कर दी जाती थी ताकि मुस्लिम विधायक अपनी नमाज अदा कर सकें।
हालांकि, यह प्रथा कई सालों तक बिना किसी विवाद के चली, लेकिन समय के साथ इसे लेकर विरोध के स्वर भी उठने लगे। कई लोगों ने इसे विधानसभा की कार्यवाही में बाधा के रूप में देखा और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
असम सरकार का फैसला और प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस प्रथा को समाप्त करने का फैसला लेते हुए इसे एक आवश्यक कदम बताया। उनके अनुसार, विधानसभा में कामकाज का महत्व सबसे ऊपर है और धर्म को व्यक्तिगत दायरे में ही रखा जाना चाहिए। सरकार का मानना है कि सभी धर्मों का सम्मान करते हुए भी कार्यस्थल पर धार्मिक गतिविधियों के लिए विशेष अवकाश देना उचित नहीं है।
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