5 बिलियन डॉलर की संपत्ति छोड़, बौद्ध भिक्षु बने मलेशिया के शीर्ष उद्योगपति आनंद कृष्णन के बेटे वेन अजान सिरिपान्यो

Authored By: अंशु सिंह

Published On: Thursday, November 28, 2024

ven ajan siripanyo son of famous industrialist anand krishnan
ven ajan siripanyo son of famous industrialist anand krishnan

जीवन में ऐसे क्षण आते हैं, जब इंसान को धन, वैभव एवं अन्य भौतिक चीजों से विरक्ति आ जाती है और वह आध्यात्मिक मार्ग पर चल पड़ता है। मलेशिया के एक बड़े, प्रभावशाली उद्योगपति एवं एयरसेल कंपनी के पूर्व मालिक आनंद कृष्णन के इकलौते बेटे वेन अजान के साथ भी शायद कुछ यही हुआ। उन्होंने 5 बिलियन डॉलर का साम्राज्य छोड़ कर, बौद्ध भिक्षु बनना स्वीकार किया और आज द्ताओ डम मठ के प्रमुख के रूप में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

Authored By: अंशु सिंह

Last Updated On: Thursday, November 28, 2024

हाइलाइट्स

  • मलेशिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति आनंद कृष्णन के बेटे हैं वेन
  • 18 साल की आयु में लिया था संन्यास
  • 5 बिलियन डॉलर की संपत्ति को छोड़कर बने बौद्ध भिक्षु
  • लंदन से की है पढ़ाई-लिखाई, आठ भाषाओं में हैं दक्ष

फोर्ब्स के अनुसार, 86 वर्षीय आनंद कृष्णन मलेशिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं, जिनकी संपत्ति 5 बिलियन डॉलर (40 हजार करोड़ रुपये) के आसपास है। उनके व्यापार टेलीकॉम, सैटेलाइट, मीडिया, तेल, गैस एवं रियल एस्टेट तक फैले हुए हैं। एक समय वे एयरसेल (दिवालिया घोषित) के मालिक हुआ करते थे, जिसने आईपीएल की टीम चेन्नई सुपर किंग्स को स्पॉन्सर किया था। इन्हीं आनंद कृष्णन के बेटे ने 18 साल की आयु में सारा ऐशो आराम, विलासी जीवनशैली को छोड़कर संन्याल लेने का निर्णय ले लिया। इस फैसले में पिता ने बेटे का पूरा साथ दिया। क्योंकि आनंद खुद एक सच्चे बौद्धी हैं। वैसे, वेन कभी-कभी पिता से मिलने उनके घर जाते रहते हैं।

वेन की मां का था थाई राज परिवार से ताल्लुक

बताते हैं कि वेन अजान सिरिपान्यो की संन्यास की शुरुआत थाईलैंड में उनकी मां मॉमवाजारोंगसे सुप्रिंदा चक्रबन के परिवार से मिलने के बाद हुई। वेन की मां थाई के राज परिवार से ताल्लुक रखती थीं। पहले वेन ने अस्थायी रूप से बौद्ध धर्म अपनाया एवं एक आश्रम में रहने का फैसला लिया। उन्होंने दो दशक से अधिक जंगल में भिक्षु के रूप में बिताए हैं। वे थाईलैंड-म्यांमार के समीप द्ताओ डम मठ के प्रमुख (abbot) के रूप में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उनका जीवन बेहद साधारण है। भौतिक चीजों का संपूर्ण त्याग कर चुके हैं। बौद्ध धर्म के नियमों का पालन करते हुए, भिक्षाटन कर अपना गुजारा करते हैं। दिलचस्प ये है कि वेन ने लंदन से शिक्षा दीक्षा हासिल की है। वे आठ भाषाओं में बात कर सकते हैं। इससे उनमें एक वैश्विक दृष्टिकोण विकसित हो सका है।

परोपकारी गतिविधियों में गहरी रुचि रखते हैं आनंद

आनंद ने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से ग्रेजुएशन किया। मलेशिया के एक मध्यवर्गीय परिवार में जन्म लेने वाले आनंद की हमेशा से परोपकारी गतिविधियों में रुचि रही है। वर्ष 1985 में उन्होंने लव एयर रॉक कंसर्ट प्रोजेक्ट के लिए करीब 240 मिलियन डॉलर रेज करने में मदद की थी। इस पैसे का इस्तेमाल अफ्रीका में पड़े सूखा राहत के लिए किया गया। इसके अलावा, वे आर्ट, एजुकेशन, स्पोर्ट्स एवं मानवाधिकार से जुड़े मसलों के लिए करोड़ों रुपये दान कर चुके हैं।

About the Author: अंशु सिंह
अंशु सिंह पिछले बीस वर्षों से हिंदी पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। उनका कार्यकाल देश के प्रमुख समाचार पत्र दैनिक जागरण और अन्य राष्ट्रीय समाचार माध्यमों में प्रेरणादायक लेखन और संपादकीय योगदान के लिए उल्लेखनीय है। उन्होंने शिक्षा एवं करियर, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक मुद्दों, संस्कृति, प्रौद्योगिकी, यात्रा एवं पर्यटन, जीवनशैली और मनोरंजन जैसे विषयों पर कई प्रभावशाली लेख लिखे हैं। उनकी लेखनी में गहरी सामाजिक समझ और प्रगतिशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को न केवल जानकारी बल्कि प्रेरणा भी प्रदान करती है। उनके द्वारा लिखे गए सैकड़ों आलेख पाठकों के बीच गहरी छाप छोड़ चुके हैं।
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