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Dev Uthani Ekadashi 2025: देवउठनी एकादशी पर इस शुभ मुहूर्त में करें श्रीहरि का पूजन, जानें व्रत तिथि, पूजन विधि और खास उपाय
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, October 31, 2025
Last Updated On: Friday, October 31, 2025
Dev Uthani Ekadashi 2025: कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी 2025 पर जब भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागेंगे, तब सृष्टि में फिर से शुभता और सौभाग्य का संचार होगा. 1 नवंबर को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व पर अभिजीत मुहूर्त से लेकर ब्रह्म मुहूर्त तक पूजा का विशेष महत्व रहेगा. श्रीहरि के जागरण के साथ ही विवाह और मांगलिक कार्यों की शुरुआत का यह दिन जीवन में नई उमंग भर देगा. जानें व्रत तिथि, पूजन विधि और खास उपाय.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, October 31, 2025
Dev Uthani Ekadashi 2025: हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi 2025) को हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु चार महीनों की योगनिद्रा से जागते हैं और सृष्टि के संचालन का कार्य पुनः संभालते हैं. कहा जाता है कि इस दिन से ही शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है- शादी, गृहप्रवेश, मुंडन और यज्ञ जैसे कार्यों पर लगे प्रतिबंध समाप्त हो जाते हैं. आइए जानते हैं इस वर्ष देवउठनी एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और खास उपाय जो जीवन में सौभाग्य और समृद्धि का वरदान दे सकते हैं.
देवउठनी एकादशी 2025 की तिथि और समय
पंचांग के अनुसार, देवउठनी एकादशी 2025 की तिथि 1 नवंबर (शनिवार) को मनाई जाएगी.
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 1 नवंबर, सुबह 9 बजकर 11 मिनट
- एकादशी तिथि समाप्त: 2 नवंबर, सुबह 7 बजकर 31 मिनट
इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहने के कारण व्रत 1 नवंबर को ही रखा जाएगा. व्रत का पारण (उपवास तोड़ने का समय) 2 नवंबर दोपहर 1:11 से 3:23 बजे तक रहेगा.
देवउठनी एकादशी 2025 के पूजन के शुभ मुहूर्त
देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए कई विशेष मुहूर्त बताए गए हैं –
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 मिनट से 12:27 मिनट तक (सबसे शुभ समय)
- गोधूली मुहूर्त: शाम 5:36 से 6:02 बजे तक
- प्रदोष काल: शाम 5:36 बजे से प्रारंभ
इन मुहूर्तों में श्रीहरि का पूजन, दीपदान और जागरण करने से जीवन में शुभता, धन और सुख की वृद्धि होती है.
देवउठनी एकादशी की धार्मिक महत्ता
Dev Uthani Ekadashi 2025: पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं. इन चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है, जिसमें विवाह, गृहप्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते. देवउठनी के साथ ही चातुर्मास का समापन होता है और मांगलिक कार्यों की शुरुआत का मार्ग खुल जाता है.
इस दिन माता तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह भी मनाया जाता है. माना जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन तुलसी और विष्णु का विधिपूर्वक पूजन करता है, उसे असीम सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है.
देवउठनी एकादशी की पूजन विधि
देवउठनी एकादशी का व्रत बहुत पवित्र माना गया है. इसे विधि-विधान से करने पर जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं.
पूजन विधि इस प्रकार है:
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और घर के दरवाजे को पानी से धोकर पवित्र करें.
- आंगन में चूने या गेरू से सुंदर अल्पना (चित्रकारी) बनाएं.
- गन्ने का मंडप तैयार करें और उसके नीचे भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें.
- पूजा में गुड़, रुई, रोली, अक्षत, पुष्प और दीपक का उपयोग करें.
- भगवान विष्णु के समक्ष यह मंत्र बोलें – “उठो देव, बैठो देव, तुम्हारे उठने से सभी शुभ कार्य हों”.
- तुलसी माता को भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें और दीप जलाकर आरती करें.
इन गलतियों से रहें सावधान
देवउठनी एकादशी के दिन कुछ चीजें भूलकर भी नहीं करनी चाहिए –
- तामसिक भोजन और मदिरा का सेवन सख्त वर्जित है.
- तुलसी के पत्ते तोड़ना इस दिन निषेध है, क्योंकि इसी दिन तुलसी विवाह होता है.
- श्रीहरि को जगाने के बाद ही उनकी पूजा करें.
इस दिन देर तक न सोएं, बल्कि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर जागरण और भजन करें.
ब्रह्म मुहूर्त में करें ये शुभ उपाय
नवंबर को देवउठनी एकादशी का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:31 से 5:13 बजे तक रहेगा. इस शुभ घड़ी में कुछ सरल उपाय करने से धन, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.
- विष्णु मंत्र का जाप करें: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जाप करें. यह मन को शांति और जीवन में स्थिरता प्रदान करता है.
- कर दर्शन मंत्र का पाठ करें: उठते ही अपनी हथेलियों को देखें और ‘ॐ कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती, करमूले तु गोविन्दः, प्रभाते करदर्शनम्’ मंत्र का जाप करें. इससे देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है.
- दान का महत्व: ब्रह्म मुहूर्त में पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी, केले या धन का दान करें. यह उपाय अत्यंत फलदायी होता है और जीवन में लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.
निष्कर्ष: शुभता, समृद्धि और नई शुरुआत का दिन
देवउठनी एकादशी सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि नई शुरुआत और शुभ कार्यों की अनुमति का प्रतीक है. इस दिन श्रीहरि के जागने के साथ ही जीवन में भी ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है. इसलिए इस एकादशी पर श्रद्धा, भक्ति और संकल्प के साथ भगवान विष्णु और माता तुलसी की पूजा करें, ताकि आपके जीवन में हर सुबह देवउठनी जैसी उज्ज्वल और मंगलमयी हो.
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