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गुरु पुष्य योग : खरीदारी का महामुहूर्त 21 नवंबर को, चार गुना मिलेगा फल
Authored By: स्मिता
Published On: Friday, November 15, 2024
Last Updated On: Friday, November 15, 2024
भगवान कृष्ण और मां लक्ष्मी को पुष्य नक्षत्र का देवता और देवी माना जाता है, क्योंकि उनका जन्म इसी शुभ समय में हुआ था। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार इस नक्षत्र का स्वामी शनि ग्रह या शनि देव है।
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Friday, November 15, 2024
पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि ग्रह है। यदि पुष्य नक्षत्र कर्क राशि में पड़ता है, तो चंद्रमा और बृहस्पति की युति होगी। दो शुभ ग्रहों के बीच यह मिलन शुभ माना जाता है। इसलिए गुरु पुष्य योग के दौरान बड़े आयोजन किए जाते हैं। इस वर्ष का अंतिम संपूर्णकालिक गुरु पुष्य योग 21 नवंबर, गुरुवार को रहेगा। इस दिन गुरुवार के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा, जिससे यह पूर्णकाल योग अत्यधिक फलदायी माना जा रहा है। इस योग में रवि योग और अमृत सिद्धि योग का भी संयोग है, जो इसे और भी उत्तम फलकारी (Guru Pushya Yoga) बनाते हैं।
दैवीय शक्ति
मान्यता है कि गुरु पुष्य योग में दैवीय शक्ति होती है, जो आपके प्रयास में 99.99% सफलता की गारंटी देता है। गुरु पुष्य अमृत योग ‘आध्यात्मिक और धार्मिक’ गतिविधियों के अभ्यासी के लिए अत्यंत लाभकारी है। इसे कोई काम शुरू करने के लिए “अत्यंत शुभ” मुहूर्त माना जाता है।
पुष्य नक्षत्र का प्रतीक गाय का थन
भगवान कृष्ण और मां लक्ष्मी को पुष्य नक्षत्र का देवता और देवी माना जाता है, क्योंकि उनका जन्म इसी शुभ समय में हुआ था। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार इस नक्षत्र का स्वामी शनि ग्रह या शनि देव है। वैदिक ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से आठवां है। पुष्य नक्षत्र का प्रतीक गाय का थन है, जो पोषण, प्रचुरता और उर्वरता का प्रतीक है। हिंदू पौराणिक कथाओं में, इसे देवताओं के पुजारी और देवताओं के गुरु बृहस्पति से जोड़ा जाता है, जो आध्यात्मिक ज्ञान, मार्गदर्शन और आशीर्वाद का प्रतीक है।
खरीदारी में स्थिरता प्रदान करता है
ज्योतिष मठ संस्थान, भोपाल के ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम ने बताया, ‘यह विशेष योग स्थिरता प्रदान करने वाला है। इस दिन पीली धातु, पीले अनाज, पीले वस्त्र, मांगलिक कार्यों के लिए वस्तुएं, धार्मिक सामग्री, पुस्तकें, साहित्य और सामाजिक-धार्मिक कार्यों के लिए संकल्प जैसी चीजें खरीदना शुभ रहेगा। गुरु पुष्य नक्षत्र का यह महा मुहूर्त विशेष रूप से खरीदारी में स्थिरता प्रदान करेगा, जो विवाह और मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त माना गया है।
अमृत सिद्धि योग
विनोद गौतम के अनुसार, इस दिन के चार शुभ योग- गुरु पुष्य योग, रवि योग, अमृत सिद्धि योग और शुभ योग, चार गुना फल प्रदान करेंगे। यह दिन भूमि, भवन, सोना, पीतल की मूर्तियां, मंदिर, पूजा की सामग्री, और गृह प्रवेश व मांगलिक कार्यों हेतु सामग्री की खरीदारी के लिए अत्यधिक लाभकारी रहेगा।
(हिन्दुस्थान समाचार के इनपुट के साथ)
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