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Bhadrapad Month 2024: 20 अगस्त को शुरू हो चुके भाद्रपद या भादो माह में किन चीज़ों का सेवन निषिद्ध है
Authored By: स्मिता
Published On: Wednesday, August 21, 2024
Last Updated On: Wednesday, August 21, 2024
सावन पूर्णिमा की समाप्ति के साथ ही 20 अगस्त से भाद्रपद या भादो माह (Bhadrapad or Bhado Month) शुरू हो चुका है। हिंदू पंचांग का यह छठा महीना है, जो भगवान श्रीकृष्ण और श्रीगणेश को समर्पित है।
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Wednesday, August 21, 2024
हर महीने का अपना महत्व है। हर माह किसी न किसी देवता के माह के रूप में माना जाता है। हर महीना सुख और शान्ति का प्रतीक है। इसलिए इसके अपने पर्व और त्योहार हैं। सावन को शिवजी का महीना माना जाता है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों और अन्य शिवालयों में जल अर्पित किये जाते हैं। सावन में हरियाली तीज, श्रावण सोमवार और रक्षाबंधन त्योहार मनाये जाते हैं। सावन की तरह भादो महीना भी विशेष देव को समर्पित है और विशेष पर्व और त्योहार मनाये जाते हैं।
20 अगस्त से शुरू होकर 18 सितंबर तक रहेगा भाद्रपद (Bhadrapad Month 2024)
सावन का महीना खत्म होते ही हिंदू पंचांग का छठा महीना भाद्रपद (Bhadrapad Month 2024) शुरू हो गया है। सावन पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाने के बाद दूसरे दिन यानी 20 अगस्त से भाद्रपद या भादो माह शुरू हो गया। इस महीने को त्योहार वाला माह माना जाता है। इस माह में भगवान कृष्ण और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भादो को भादरवा के नाम से भी जाना जाता है। भाद्रपद महीना 20 अगस्त से शुरू होकर 18 सितंबर 2024 को खत्म हो जाएगा। इस महीने का आखिरी दिन भाद्रपद पूर्णिमा है, जो पितृ पक्ष की शुरुआत का प्रतीक है। भाद्रपद तब शुरू होता है जब सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करता है। धार्मिक दृष्टिकोण से, इस महीने का बहुत महत्व है, क्योंकि यह आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर में अगस्त और सितंबर के बीच आता है।
श्रीकृष्ण, श्रीविष्णु और श्रीगणेश की विशेष पूजा-अर्चना
भाद्रपद विशेष रूप से पूजा, अनुष्ठान और उपवास के लिए महत्वपूर्ण है। भाद्रपद माह के दौरान भगवान कृष्ण, भगवान विष्णु, भगवान गणेश, भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करना भी जरूरी है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, भाद्रपद के दौरान पवित्र नदियों में स्नान, गरीबों को दान देना और उपवास करना बहुत लाभकारी होता है। माना जाता है कि पूरे महीने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। घर में लड्डू गोपाल की स्थापना, शंख स्थापित करना और श्रीमद्भगवद गीता का पाठ करने से धन, यश और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और श्रीगणेश चतुर्थी की धूम (Shree Krishna Janmashtami and Shree Ganesh Chaturthi 2024)
भाद्रपद में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, राधा जन्मोत्सव, कजरी तीज, श्री गणेश चतुर्थी, अनंत चतुर्दशी, कुश अमावस्या और विश्वकर्मा पूजा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार मनाये जाते हैं। भाद्रपद के दौरान दस दिवसीय गणेश उत्सव गणेश चतुर्थी से शुरू होता है और अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होता है। इन दिनों भगवान गणेश की विशेष पूजा करने की परंपरा है। माना जाता है कि भाद्रपद के दौरान भगवान कृष्ण की पूजा करने से पापों का नाश होता है और परेशानियां कम होती हैं। भक्तों को शंख में दूध और जल से भगवान कृष्ण का अभिषेक करना चाहिए और फिर उन्हें नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। शास्त्रों में इस पवित्र महीने के दौरान भगवान विष्णु और उनके अवतारों की विशेष पूजा भी करनी चाहिए। इस महीने में हर दिन भगवान कृष्ण को तुलसी के पत्ते और मक्खन चढ़ाना शुभ माना जाता है।
क्या कहता है आयुर्वेद (Ayurveda about Bhadrapad)
भाद्रपद चातुर्मास काल का दूसरा महीना है। आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. संजीव (Ayurveda Expert Dr. Sanjeev) के अनुसार, यह मौसमी परिवर्तन का समय है, जो शरीर और पाचन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए तले हुए और मसालेदार भोजन या ऐसी कोई भी चीज़ खाने से बचने की सलाह दी जाती है जिसे पचने में लंबा समय लगता है। इसकी बजाय स्वस्थ खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। इस महीने के दौरान योग, प्राणायाम और नियमित व्यायाम करें। इस महीने के दौरान केवल शाकाहारी (सात्विक) भोजन खाएं।
भाद्रपद के दौरान कच्चे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। दही और गुड़ खाने से परहेज करना चाहिए। मांस और शराब का सेवन वर्जित है। इन सभी के कारण पाचन तंत्र के प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
















