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Assembly Election 2024 : झारखंड चुनाव में कांग्रेस के नेताओं की गैरमौजूदगी, हेमंत सोरेन पर पूरी तरह निर्भर
Authored By: सतीश झा
Published On: Thursday, November 7, 2024
Last Updated On: Thursday, November 7, 2024
झारखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी अपनी किस्मत आजमा रही है। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में हाल की हार के बाद, पार्टी के नेताओं को झारखंड से कुछ बेहतर खबर की उम्मीद है। पिछली बार कांग्रेस ने 31 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 16 सीटें जीती थीं। इस बार, लोकसभा चुनाव में उसने दो सीटें हासिल कीं और अब 30 विधानसभा सीटों पर मुकाबले में है। लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस का कोई बड़ा नेता झारखंड में चुनाव प्रचार के लिए मैदान में नहीं उतरा है।
Authored By: सतीश झा
Last Updated On: Thursday, November 7, 2024
13 नवंबर को पहले चरण के मतदान में 43 सीटों पर वोटिंग होनी है, और इससे पहले कांग्रेस, जेएमएम और राजद गठबंधन ने 5 नवंबर को अपना घोषणापत्र जारी किया। घोषणापत्र के विमोचन के कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Congress President Mallikarjun Kharge) और प्रभारी महासचिव गुलाम अहमद मीर (General Secretary Ghulam Ahmed Mir) रांची पहुंचे थे। हालांकि, यह केवल घोषणापत्र जारी करने की औपचारिकता थी, न कि प्रचार का हिस्सा।
कांग्रेस ने झारखंड चुनाव का पूरा जिम्मा हेमंत सोरेन (Hemant Soren) के कंधों पर छोड़ दिया है। कांग्रेस के अधिकांश बड़े नेता नदारद हैं, जबकि बीजेपी ने झारखंड में बड़े स्तर पर अपनी तैयारियां की हैं। भाजपा ने छह-छह सीटों के क्लस्टर बनाए हैं और केंद्रीय मंत्री, राज्यों के उपमुख्यमंत्री और सांसदों को इनका प्रभारी बनाया है। इसके चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान और हिमंत बिस्वा सरमा लगातार झारखंड में मेहनत कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की झारखंड में दो चुनावी सभाएं हो चुकी हैं, अमित शाह और राजनाथ सिंह की रैलियां भी हो चुकी हैं। लेकिन राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने झारखंड के लिए समय नहीं निकाला है। प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) वायनाड में खुद चुनाव लड़ रही हैं, और हिमाचल प्रदेश में छुट्टी मनाने का समय निकाल सकती हैं, लेकिन उनकी भी झारखंड में कोई चुनावी सभा नहीं होगी। कांग्रेस के पास कई पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन किसी ने झारखंड में प्रचार के लिए समय नहीं दिया है। इसके बाद अगर कांग्रेस चुनाव में हारती है, तो शायद नेता एक बार फिर ईवीएम (EVM) को दोष देंगे।
















