ऑपरेशन सिंदूर के बाद ऑपरेशन महादेव, क्या होगा इससे आतंकियों का खात्मा ?
Authored By: सतीश झा
Published On: Monday, July 28, 2025
Updated On: Thursday, July 31, 2025
जम्मू-कश्मीर में हाल के दिनों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए दो बड़े अभियानों — ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) और ‘ऑपरेशन महादेव’ (Operation Mahadev) — ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब आतंकवाद पर निर्णायक प्रहार की ओर बढ़ रहा है भारत? या यह केवल आतंक के सिर काटने जैसा प्रयास है, जिसकी जड़ें अब भी पाकिस्तान में फल-फूल रही हैं?
Authored By: सतीश झा
Updated On: Thursday, July 31, 2025
‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) और अब ‘ऑपरेशन महादेव’ (Operation Mahadev)— दोनों अभियानों में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठनों के विदेशी आतंकियों को निशाना बनाकर मार गिराया गया है. ‘महादेव’(Operation Mahadev) के तहत लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकी मारे गए, जो हाल ही में पहलगाम हमले में शामिल थे. इससे यह स्पष्ट होता है कि अब सुरक्षाबलों की रणनीति अधिक आक्रामक, सटीक और टेक्नोलॉजी-संचालित हो चुकी है. यह ऑपरेशन भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त अभियान ‘ऑपरेशन महादेव’ का हिस्सा था.
सूत्रों के मुताबिक, यह मुठभेड़ ऊपरी जंगल क्षेत्रों में उस समय शुरू हुई, जब क्षेत्र में दिन में गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया.
विदेशी आतंकी और लश्कर-ए-तैयबा से संबंध
शीर्ष खुफिया सूत्रों ने पुष्टि की है कि मारे गए तीनों आतंकवादी पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे और विदेशी नागरिक थे. ये आतंकी हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में भी शामिल थे, जिसमें सुरक्षाबलों और नागरिकों को निशाना बनाया गया था.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले – अब आतंक को मिलेगा निर्णायक जवाब, भारत नहीं झुकेगा किसी दबाव में
लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) पर हुई चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने जोरदार बयान देते हुए कहा, “भारत ने इस ऑपरेशन के माध्यम से न केवल अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया, बल्कि राष्ट्रीय दृढ़ता, नैतिकता और राजनीतिक कुशलता का भी परिचय दिया है.” उन्होंने कहा कि भारत अब किसी भी आतंकी हमले का निर्णायक और स्पष्ट उत्तर देगा.
राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद को आश्रय और समर्थन देने वालों को अब कोई शरण नहीं मिलेगी. उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना यह भी कहा कि भारत अब किसी भी तरह की परमाणु ब्लैकमेलिंग या अन्य अंतरराष्ट्रीय दबावों के आगे झुकने वाला नहीं है. रक्षा मंत्री ने विपक्ष को भी निशाने पर लिया और कहा कि भारत की सुरक्षा से जुड़े मामलों में राजनीतिक एकता और राष्ट्रीय हितों की प्राथमिकता ज़रूरी है. उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर से यह संदेश गया है कि भारत न केवल अपने नागरिकों की रक्षा के लिए तैयार है, बल्कि देश की संप्रभुता पर कोई भी हमला अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
राजनाथ सिंह के इस बयान के बाद लोकसभा में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेजें थपथपाकर समर्थन जताया. विपक्ष की ओर से हालांकि कुछ सदस्यों ने जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग भी उठाई.
ऑपरेशन महादेव में आधुनिक तकनीक और कड़ा समन्वय
‘ऑपरेशन महादेव’ को बेहद सुनियोजित रणनीति के तहत अंजाम दिया गया. इसमें ड्रोन, स्निफर डॉग्स, थर्मल इमेजिंग उपकरण और विशेष कमांडो दस्तों की सहायता ली गई. सेना और पुलिस के जवानों ने घने जंगलों में छिपे आतंकियों को घेर कर मार गिराया.
क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन जारी
सुरक्षा बलों द्वारा इलाके में सघन तलाशी अभियान जारी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और आतंकी जंगल में छिपा न हो. स्थानीय लोगों को एहतियात के तौर पर घरों में रहने की सलाह दी गई है.
उपराज्यपालऔर सेना की प्रतिक्रिया
घटना के बाद सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे एक बड़ी कामयाबी बताया है और कहा कि यह कार्रवाई “उन तत्वों के लिए सख्त संदेश है जो जम्मू-कश्मीर की शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं.” उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (Manoj Sinha)ने सुरक्षाबलों को बधाई देते हुए कहा, “देश की सुरक्षा के लिए हमारे जवानों का साहस और समर्पण नमन योग्य है। आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”
आतंकियों की रीढ़ तोड़ना जरूरी
- हालांकि, इन अभियानों में बड़ी सफलता मिल रही है, लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि यह लड़ाई सिर्फ सीमा के भीतर नहीं लड़ी जा रही. आतंकवाद की जड़ें अब भी पाकिस्तान की जमीन पर मौजूद हैं, जहां से आतंकी घुसपैठ, फंडिंग और ट्रेनिंग जारी है. जब तक इन स्रोतों को पूरी तरह प्रभावहीन नहीं किया जाता, आतंक का पूरी तरह सफाया एक चुनौती बना रहेगा.
- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘महादेव’ जैसे अभियानों से यह संदेश स्पष्ट है कि भारत अब आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा. यह केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और रणनीतिक दृष्टिकोण का भी परिणाम है. यदि इसी गति से कार्यवाही जारी रही और साथ ही कूटनीतिक दबाव और आंतरिक सुधार किए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब कश्मीर आतंकवाद मुक्त और स्थायी शांति की राह पर होगा.
यह भी पढ़ें :- संसद में 28 जुलाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर होगी चर्चा, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया
यह भी पढ़ें
news via inbox
समाचार जगत की हर खबर, सीधे आपके इनबॉक्स में - आज ही हमारे न्यूजलेटर को सब्सक्राइब करें।
[newsletter_form]














