पीरियड्स के ब्लड से चल सकता है कई बीमारियों का पता, जानिए कैसे मिलते हैं सेहत से जुड़े संकेत
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, March 12, 2026
Updated On: Thursday, March 12, 2026
पीरियड्स के दौरान निकलने वाला ब्लड केवल एक सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि महिलाओं की सेहत से जुड़े कई संकेत भी देता है. रिसर्च के अनुसार इसके अध्ययन से एंडोमेट्रियोसिस, गर्भाशय की सूजन और अन्य समस्याओं के संकेत मिल सकते हैं. भविष्य में यह जांच महिलाओं की बीमारियों की पहचान का आसान तरीका बन सकती है.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Thursday, March 12, 2026
Period Blood: महिलाओं में पीरियड्स हर महीने होने वाली एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, लेकिन अब वैज्ञानिक इसे केवल एक प्राकृतिक चक्र नहीं मानते. विशेषज्ञों के अनुसार पीरियड्स के दौरान निकलने वाला ब्लड शरीर के अंदर चल रही कई स्वास्थ्य स्थितियों के बारे में संकेत दे सकता है. खासतौर पर यह गर्भाशय यानी यूटरस की सेहत को समझने में मददगार माना जा रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि पीरियड ब्लड एक ऐसा जैविक नमूना है जिसे आसानी से प्राप्त किया जा सकता है और इसके अध्ययन से गर्भाशय में होने वाले बदलावों की जानकारी मिल सकती है. पहले यूटरस से जुड़ी समस्याओं को पहचानने के लिए जटिल टेस्ट या सर्जरी की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि केवल पीरियड ब्लड की जांच से ही कई बीमारियों के शुरुआती संकेत मिल सकें.
एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी का मिल सकता है पता
कई शोध में यह सामने आया है कि पीरियड ब्लड की मदद से एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी की पहचान करने की संभावना है. यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी कोशिकाएं शरीर के अन्य हिस्सों में विकसित होने लगती हैं. इसके कारण तेज दर्द, अनियमित पीरियड्स और गर्भधारण में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं. वैज्ञानिकों ने पाया है कि जिन महिलाओं को यह समस्या होती है, उनके पीरियड ब्लड में कुछ विशेष प्रकार की कोशिकाओं और जीन की गतिविधि अलग होती है. उदाहरण के तौर पर उनके शरीर में “नेचुरल किलर” नाम की इम्यून कोशिकाएं कम मात्रा में पाई जाती हैं. ये कोशिकाएं शरीर को संक्रमण से बचाने और प्रजनन प्रक्रिया को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
अन्य गर्भाशय संबंधी समस्याओं का भी मिलता है संकेत
पीरियड ब्लड के अध्ययन से केवल एंडोमेट्रियोसिस ही नहीं, बल्कि गर्भाशय से जुड़ी कई दूसरी समस्याओं के बारे में भी जानकारी मिल सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे गर्भाशय की परत में सूजन, गर्भाशय की दीवार में असामान्य वृद्धि और एंडोमेट्रियल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के संकेत भी मिल सकते हैं. कुछ रिसर्च में यह भी देखा गया है कि पीरियड ब्लड में मौजूद कोशिकाओं में सूजन से जुड़े संकेत ज्यादा पाए जाते हैं. इससे गर्भाशय की परत के सामान्य रूप से ठीक होने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. कई मामलों में इसका संबंध पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) या बार-बार गर्भपात जैसी समस्याओं से भी जोड़ा गया है.
बायोमार्कर की खोज से आसान होगी जांच
वैज्ञानिक इस समय पीरियड ब्लड में मौजूद कुछ खास प्रोटीन, जीन और कोशिकाओं की पहचान करने पर काम कर रहे हैं, जिन्हें बायोमार्कर कहा जाता है. अगर इन बायोमार्कर को सही तरीके से समझ लिया जाए तो भविष्य में महिलाओं की कई बीमारियों का पता लगाने के लिए सर्जरी या दर्दनाक जांच की जरूरत नहीं पड़ेगी. इस दिशा में कई रिसर्च टीमों ने बड़ी संख्या में महिलाओं के नमूनों का अध्ययन किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में पीरियड ब्लड का विश्लेषण एक आसान और कम दर्द वाला टेस्ट बन सकता है, जिससे महिलाओं की प्रजनन से जुड़ी बीमारियों का जल्दी पता लगाया जा सकेगा और समय पर इलाज भी संभव हो पाएगा.
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