10 महीने में 100 इस्तीफे, ISRO से बढ़ते इस्तीफे, आखिर निजी कंपनियों की ओर क्यों बढ़ रहे हैं भारतीय वैज्ञानिक?

Authored By: Nishant Singh

Published On: Friday, July 17, 2026

Last Updated On: Friday, July 17, 2026

Resignations at ISRO. ISRO से बढ़ते इस्तीफे और निजी स्पेस कंपनियों की ओर बढ़ते भारतीय वैज्ञानिक
Resignations at ISRO. ISRO से बढ़ते इस्तीफे और निजी स्पेस कंपनियों की ओर बढ़ते भारतीय वैज्ञानिक

Resignations at ISRO: भारत में निजी स्पेस सेक्टर के तेजी से विस्तार के बीच इसरो के कई वैज्ञानिक बेहतर अवसरों के लिए स्टार्टअप्स का रुख कर रहे हैं. हालांकि सरकार का कहना है कि इससे इसरो की कार्यक्षमता प्रभावित नहीं हुई है. जानिए वैज्ञानिकों की सैलरी, सुविधाएं, इस्तीफों की वजह और विदेशी एजेंसियों से तुलना.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Friday, July 17, 2026

Resignations at ISRO: भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से बदल रहा है. वर्ष 2020 में निजी कंपनियों के लिए स्पेस सेक्टर खोलने और 2023 की नई भारतीय अंतरिक्ष नीति लागू होने के बाद देश में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स खड़े हो चुके हैं. इनमें लगभग 500 मिलियन डॉलर का निवेश भी हो चुका है. पिक्सेल, ध्रुवा स्पेस, स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस और बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस जैसी कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं. इसी के साथ हाल के महीनों में करीब 100 वैज्ञानिकों के इसरो छोड़ने की खबरें सामने आई हैं. हालांकि केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना है कि इससे इसरो की कार्यक्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा है. वहीं पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. एस. सोमनाथ भी अग्निकुल कॉसमॉस के बोर्ड से जुड़ चुके हैं.

इसरो में नौकरी और वेतन का पूरा गणित

इसरो में वैज्ञानिक बनने के लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के बाद इंजीनियरिंग या संबंधित विषय में डिग्री जरूरी होती है. भर्ती लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन के जरिए होती है. नए वैज्ञानिक या इंजीनियर-एससी को सातवें वेतन आयोग के तहत पे लेवल-10 में 56,100 रुपये बेसिक सैलरी मिलती है. महंगाई भत्ता, मकान किराया, ट्रांसपोर्ट, प्रोफेशनल अपडेट अलाउंस और एनपीएस जैसी सुविधाओं को जोड़ने पर मासिक वेतन लगभग 95 हजार से 1.07 लाख रुपये तक पहुंच जाता है. अनुभव के साथ वैज्ञानिक लेवल-11 से लेवल-16 तक प्रमोट होते हैं, जहां बेसिक वेतन 67,700 रुपये से बढ़कर 2,05,400 रुपये तक पहुंच सकता है. वरिष्ठ वैज्ञानिकों का सालाना पैकेज लगभग 25 से 30 लाख रुपये तक हो सकता है.

विदेशी एजेंसियों और निजी कंपनियों में कितना अंतर?

अगर वेतन की तुलना करें तो नासा, ईएसए और जैक्सा जैसी अंतरिक्ष एजेंसियां भारतीय संस्थानों से कहीं अधिक भुगतान करती हैं. नासा में वैज्ञानिकों की सालाना सैलरी करीब 80 लाख से 1.25 करोड़ रुपये तक हो सकती है. यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) में यह लगभग 55 से 90 लाख रुपये और जापान की जैक्सा में 35 से 55 लाख रुपये सालाना बताई जाती है. वहीं स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन जैसी निजी कंपनियां इससे भी बेहतर पैकेज देती हैं. यही वजह है कि निजी स्पेस स्टार्टअप्स अनुभवी वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं.

कम वेतन के बावजूद इसरो की सबसे बड़ी ताकत

भले ही इसरो का वेतन विदेशी एजेंसियों से कम हो, लेकिन सुविधाओं के मामले में यह अब भी मजबूत माना जाता है. कर्मचारियों और उनके परिवार को मेडिकल सुविधा, सरकारी आवास, ट्रांसपोर्ट, बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता, कैंटीन और रिटायरमेंट के बाद भी सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिलती हैं. इसके विपरीत नासा और अन्य विदेशी संस्थानों में कर्मचारियों को आवास खुद लेना पड़ता है और मेडिकल व्यवस्था हेल्थ इंश्योरेंस पर आधारित होती है. यानी वहां आय अधिक है, लेकिन जीवनयापन का खर्च भी काफी ज्यादा रहता है.

फिर भी क्यों छोड़ रहे हैं वैज्ञानिक?

रिपोर्टों के अनुसार हाल के महीनों में 100 से 120 वैज्ञानिक इसरो से इस्तीफा दे चुके हैं. इनमें यूआर राव सैटेलाइट सेंटर और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के अनुभवी वैज्ञानिक भी शामिल बताए जाते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि निजी कंपनियों में बेहतर वेतन, तेज करियर ग्रोथ, नेतृत्व की भूमिका और नई तकनीकों पर काम करने के अवसर इस बदलाव की प्रमुख वजह हैं. इसी को देखते हुए अंतरिक्ष विभाग ने नया निर्देश जारी किया है, जिसके तहत गगनयान और अन्य राष्ट्रीय महत्व के मिशनों से जुड़े ग्रुप-ए वैज्ञानिकों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर अंतिम फैसला अब सीधे अंतरिक्ष विभाग स्तर पर लिया जाएगा. यह कदम महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रतिभाओं को बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

यह भी पढ़ें :- राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को भी मिलेगा राष्ट्रगान जैसा सम्मान? सरकार ला रही नया कानून

About the Author: Nishant Singh
निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
Leave A Comment

अन्य खबरें

अन्य खबरें