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पेपर लीक और बेरोजगारी पर कांग्रेस का बड़ा अभियान, राहुल गांधी चार शहरों में करेंगे युवा महासम्मेलन
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, June 13, 2026
Last Updated On: Saturday, June 13, 2026
पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और बढ़ती बेरोजगारी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है. राहुल गांधी कोटा, इलाहाबाद, पटना और दिल्ली में युवाओं को संबोधित करेंगे. पार्टी परीक्षा सुधार, पारदर्शिता और रोजगार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, June 13, 2026
Rahul Gandhi Youth Conference: देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और बढ़ती बेरोजगारी को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है. लाखों छात्र और युवा लंबे समय से भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और परीक्षा व्यवस्था की खामियों को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. इसी बीच कांग्रेस ने इन मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है. पार्टी का कहना है कि यह केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन युवाओं की आवाज उठाने का प्रयास है जो वर्षों से नौकरी और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था का इंतजार कर रहे हैं.
राहुल गांधी रहेंगे अभियान का चेहरा
कांग्रेस ने इस पूरे आंदोलन की कमान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सौंपी है. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि राहुल गांधी लगातार छात्रों, युवाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं, इसलिए वे इस अभियान का नेतृत्व करेंगे. इसके तहत देश के विभिन्न शहरों में बड़े युवा और छात्र सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र, शिक्षाविद, युवा संगठन और भर्ती प्रक्रियाओं से प्रभावित अभ्यर्थी अपनी बात रख सकेंगे.
चार बड़े शहरों में होंगे महासम्मेलन
आंदोलन के पहले चरण में कांग्रेस ने चार प्रमुख शहरों को चुना है, जिन्हें देश के शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा केंद्रों के रूप में भी देखा जाता है.
प्रस्तावित कार्यक्रम
- 17 जून – कोटा (राजस्थान)
- 10 जुलाई – इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)
- 11 जुलाई – पटना (बिहार)
- 14 जुलाई – दिल्ली
इन आयोजनों में राहुल गांधी युवाओं को संबोधित करेंगे और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे.
कांग्रेस किन मुद्दों को बना रही है आधार?
पार्टी का दावा है कि हाल के वर्षों में कई बड़ी परीक्षाएं विवादों में रही हैं. पेपर लीक, भर्ती प्रक्रिया में देरी, परीक्षा शुल्क में वृद्धि और नियुक्तियों में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों ने युवाओं के भरोसे को कमजोर किया है. कांग्रेस का कहना है कि इन समस्याओं के कारण लाखों अभ्यर्थियों का समय, पैसा और मेहनत प्रभावित हुई है.
पार्टी नेताओं के अनुसार, युवाओं की नाराजगी अब केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. इसी कारण कांग्रेस इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है.
युवाओं तक पहुंचने की खास रणनीति
कांग्रेस इस अभियान को केवल सभाओं तक सीमित नहीं रखना चाहती. पार्टी ने अपनी छात्र इकाई एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और राज्य स्तर की इकाइयों को व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी है.
अभियान के तहत:
- युवाओं को ऑनलाइन और ऑफलाइन निमंत्रण भेजे जाएंगे.
- कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संपर्क कार्यक्रम होंगे.
- कोचिंग संस्थानों में छात्रों से संवाद किया जाएगा.
- सोशल मीडिया पर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.
- राहुल गांधी के कार्यक्रमों की लाइव स्क्रीनिंग की जाएगी.
- विभिन्न छात्र और युवा संगठनों को आंदोलन से जोड़ा जाएगा.
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
इस अभियान के दौरान कांग्रेस केंद्र सरकार के सामने कई अहम मांगें रखेगी. इनमें शामिल हैं:
- नीट परीक्षा व्यवस्था में सुधार और विकेंद्रीकरण.
- सरकारी परीक्षाओं के आवेदन शुल्क को समाप्त करना.
- पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई.
- परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करना.
- भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध और पारदर्शी बनाना.
- शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर ठोस कदम उठाना.
संसद से सड़क तक उठेगा मुद्दा
कांग्रेस ने साफ किया है कि यह आंदोलन केवल जनसभाओं तक सीमित नहीं रहेगा. पार्टी आगामी संसद सत्र में भी पेपर लीक, भर्ती घोटालों और बेरोजगारी के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाएगी. कांग्रेस का दावा है कि वह युवाओं की समस्याओं को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाना चाहती है ताकि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाने को मजबूर हो.
निष्कर्ष
पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दे आज देश के करोड़ों युवाओं से सीधे जुड़े हुए हैं. ऐसे समय में कांग्रेस ने इन विषयों को लेकर बड़ा राजनीतिक अभियान शुरू करने का फैसला किया है. अब सभी की नजर राहुल गांधी के प्रस्तावित सम्मेलनों और इस आंदोलन के प्रभाव पर रहेगी. यह देखना दिलचस्प होगा कि यह अभियान युवाओं के बीच कितना असर छोड़ पाता है और क्या इससे परीक्षा एवं भर्ती व्यवस्था में सुधार की बहस को नई दिशा मिलती है.
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